बोले कन्नौज: किराना बाजार की परेशानी.. पार्किंग न पानी
Kannauj News - कन्नौज का किराना कारोबार हर माह 20 करोड़ का होता है, लेकिन व्यापारियों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बाजारों में साफ-सफाई, पीने के पानी, शौचालयों और पार्किंग की कमी है। व्यापारियों ने...

कन्नौज का किराना कारोबार हर माह करीब 20 करोड़ का होता है। समय और परिस्थितियों के साथ ही व्यवसाय की जटिलताओं से यह कारोबार करने वाले कई दिक्कतों से जूझ रहे हैं। बाजारों में साफ-सफाई और पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। इतना ही नहीं यूरिनल और शौचालय की सुविधा भी बाजारों से नदारद है। जिले भर के फुटकर दुकानदार यहां से सामान ले जाते हैं। व्यापारियों का कहना है कि मुख्य मंडी में ही आग से बचाव के पर्याप्त इन्तजाम नहीं हैं। पीने के लिए शुद्ध पानी तक नसीब नहीं होता। दुकानदार प्यास बुझाने के लिए जेब से रुपये खर्च कर बोतलबंद पानी लेते हैं। इतना ही नहीं बाजारों में संकरी गलियों के बीच पार्किंग न होने से जाम बेहाल किए रहता है।
जितना बड़ा यहां का बाजार है समस्याएं भी उतनी ही बड़ी हैं। रोज लगने वाला जाम, नियमित सफाई न होना, नो इंट्री की दिक्कत जैसी अनगिनत समस्याएं किराना कारोबारियों को परेशान करती हैं। आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान से बातचीत के दौरान किराना व्यापारी अमर सिंह ने कहा कि किराना बाजार में पुलिस गश्ती के साथ पानी के आरओ लगवाने चाहिए। गर्मी में तो यह समस्या और भी बढ़ जाती है, इसके साथ ही बाजार में चोरी ,जाम, साफ-सफाई और बजबजती नालियां हमारे व्यापार में रोड़ा अटका रही हैं।
जिले में किराना कारोबारियों की दिनों-दिन बढ़ती समस्याओं से उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। सबसे बड़ी समस्या बाजारों में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर है। पर्याप्त सुरक्षा उपाय न होने से बाजारों में दिक्कतें पेश आती हैं । शहर हो या किराना कारोबार की बड़ी मंडी वाला छिबरामऊ दोनों जगह सीसीटीवी कैमरे लगाने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। बावजूद इसके जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई पहल नहीं दिख रही है। किराना दुकानदारों की दूसरी बड़ी समस्या बाजार में आने वाले ग्राहकों के लिए शौचालय की अनुपलब्धता है, जिससे न केवल ग्राहक बल्कि दुकानदार भी परेशान रहते हैं। प्रमुख बाजारों में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराया जाए ताकि ग्राहकों और दुकानदारों को सुविधा मिल सके। तीसरी बड़ी समस्या शहर के बाजार में वाहन पार्किंग को लेकर है।
प्रदीप गुप्ता ने बताया कि ग्राहक अपनी गाड़ियां बेतरतीब तरीके से सड़कों पर ही वाहन खड़े कर देते हैं, जिससे बाजार में जाम की समस्या उत्पन्न होती है। इससे न केवल ग्राहकों को परेशानी होती है बल्कि दुकानदारों का भी व्यापार प्रभावित होता है क्योंकि जाम की वजह से ग्राहक बाजार आने से कतराते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार को उचित पार्किंग स्थलों का निर्माण कराना चाहिए ताकि बाजार में ट्रैफिक का दबाव कम हो और ग्राहक आसानी से खरीदारी कर सकें । बाजारों में कई बार ऐसा देखा जाता है कि सामान उतारने और वापस निकालने के लिए कोई निश्चित समय निर्धारित नहीं होने के कारण ट्रैफिक अव्यवस्थित हो जाता है। यदि प्रशासन एक तय समय सीमा निर्धारित कर दे कि किस समय बाजार में माल उतारा जा सकता है और किस समय तक उसे निकालना अनिवार्य होगा, तो इससे ट्रैफिक की समस्या काफी हद तक सुलझ सकती है। एक और महत्वपूर्ण मुद्दा नापतोल विभाग के लाइसेंस रिन्यूअल को लेकर है, जिसमें वर्तमान में दुकानदारों को हर दो साल में लाइसेंस का नवीनीकरण करवाना पड़ता है, जिससे उन्हें बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और अनावश्यक परेशानी होती है। यदि इस नवीनीकरण की अवधि को बढ़ाया जाना चाहिए इससे दुकानदारों को राहत मिलेगी और वे अपने व्यवसाय पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
ऑनलाइन शॉपिंग ने डाला बिक्री पर असर
किराना व्यापारी प्रतीक गुप्ता बताते हैं कि दो-तीन साल से ऑनलाइन शॉपिंग ने सब कुछ चौपट कर दिया। सबसे बुरा प्रभाव छोटे व्यवसाइयों पर पड़ रहा है। उपभोक्ता घर बैठे ही सामान मंगवा ले रहे हैं। पहले ग्राहक जब दुकान आता था तो अपने बजट के अनुसार खरीदारी तो करता ही था साथ ही दूसरी चीजें पसंद आने पर वह भी खरीद लेता था। पर अब अधिकतर लोग ऑनलाइन सामान ले रहे हैं। इससे शहर के किराना व्यापारियों का धंधा मंदा पड़ता जा रहा है। सोनू ने बताया कि व्यापारियों की सुरक्षा के लिए दिन के साथ रात में भी पुलिस की सुरक्षा बढ़ाई जाए, जिससे हम अच्छे से अपना व्यापार कर सकें।
दुकानों से रोजाना 50 लाख का कारोबार
कन्नौज। शहर में करीब 150 से अधिक किराने की थोक दुकानें हैं। इनमें 400 से अधिक श्रमिक काम करते हैं। व्यापारियों और श्रमिकों का परिवार इन्हीं दुकानों पर आश्रित है। इसके अलावा माल ढुलाई में लगे वाहन सामान रखने और उतारने वाले श्रमिक भी इसी व्यापार पर निर्भर हैं। इन दुकानों से प्रतिदिन 50 लाख से अधिक का कारोबार होता है।
स्थानीय व्यापारियों को नो एंट्री में रियायत देने की मांग
थोक दुकानदार मुन्ना गुप्ता बताते हैं कि शहर के बीच स्थित दुकानदारों को काफी दुश्वारियां झेलनी पड़ती हैं, क्योंकि यहां कोई ट्रांसपोर्ट की सुविधा नहीं है। बाहर से माल मंगाने में दुकान तक ट्रक नहीं पहुंच पाता है। बाहर से माल आता है तो उसे छोटे वाहन से मंगाना पड़ता है। शहर के बीच में होने की वजह से रात को ही माल आता है। साथ ही, पुलिस की नो इंट्री ने काफी छकाकर रखा है। व्यापारियों को माल मंगाने के लिए नो एंट्री में कुछ छूट जरूर देनी चाहिए।
कई तरह के टैक्स से दिलाई जाए राहत
टैक्स को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। व्यापारियों का कहना है कि माल मंगाने पर मंडी शुल्क लिया जाता है। एक देश है तो टैक्स भी एक होना चाहिए। कई राज्यों में मंडी शुल्क नहीं वसूला जाता है। यहां पर डेढ़ फीसदी शुल्क वसूल लिया जाता है। ऐसे में व्यापारियों की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ता है। मंडी शुल्क के अतिरिक्त विकास शुल्क लिया जाता है। पालिका की ओर से तमाम टैक्स लिए जाते हैं, लेकिन सुविधाएं नहीं दी जाती हैं।
दुकानों का पंजीयन शुल्क किया जाए कम
जय गुप्ता ने कहा कि दुकानों के लिए श्रम विभाग में लिए जाने वाला पंजीयन शुल्क को कम किया जाए। अभी बहुत ज्यादा है। इस पर शासन और प्रशासन स्तर से गंभीरता दिखाई जाए। इसके अलावा सप्ताहिक बंदी का कहीं पालन होता है तो कहीं दिनभर दुकानें खुली रहती हैं। किराना मार्केट के पूरे व्यापारी साप्ताहिक बंदी का पालन कर रहे हैं। लेकिन, अन्य जगह दुकानें खुलने से उनको काफी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए साप्ताहिक बंदी का सख्ती से पालन होना चाहिए। बाजार की समस्याएं हल करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
शिकायतें
1. बाजार में अन्ना जानवरों का बढ़ता आतंक, व्यापारियों के लिए मुसीबत है।
2. बिजली विभाग के पैनल बॉक्स खुले रहने के कारण करंट लगने का खतरा रहता है।
3. बाजार में सुरक्षा की व्यवस्था नहीं है। प्रशासन यहां सीसीटीवी कैमरे लगाए और पुलिस की गश्त करवाएं जिससे लोग सुरक्षित महसूस कर सकें।
4. पार्किंग न होने से व्यापारी और ग्राहक सड़क पर ही वाहन खड़ा करने के लिए मजबूर होते हैं।
5. संकरे बाजार में जाम की समस्या व्यापारियों के लिए सिरदर्द बन चुकी है।
6. लाइसेंस सैंपल क्वॉलिटी मेंटेन आदि समस्याओं से प्रतिदिन रूबरू होना पड़ता है। थोक व्यवसाय के लिए नहीं मिलती कोई राहत
सुझाव
1. अन्ना जानवरों के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए उनको पकड़ने का अभियान चलाया जाए।
2. खुले बिजली के पैनल बॉक्स को बंद कराया जाए।
3. व्यापारियों और ग्राहकों के लिए पोर्टेबल टॉयलेट व शौचालय का निर्माण कराया जाए।
4. सरकारी पार्किंग का निर्माण कराया जाए ताकि किराना बाजार में जाम न लगे।
5. हमेशा वारदात का खतरा कारोबारियों के ऊपर बरकरार रहता है, सुरक्षा की व्यवस्था की जाए।
6. किराना बाजार में पेयजल व्यवस्था का इंतजाम किया जाए, हैंडपंप और वाटर कूलर लगवाया जाए।
7. संकरे बाजार में चार पहिया वाहनों और ई रिक्शा के संचालन पर प्रतिबंध लगाया जाए।
बोले दुकानदार
बाजार में कूड़े दान न होने से सड़क पर ही कूड़ा डाल दिया जाता है, इस पर अन्ना जानवर मंडराते रहते हैं। -प्रतीक गुप्ता
फूड लाइसेंस को लेकर परेशान किया जाता है तो कभी माप-तौल विभाग के अधिकारियों द्वारा परेशान किया जाता है। -रोहित
व्यापारियों ने कई बार अधिकारियों से मंडी में पार्किंग की मांग की। अभी वाहन सड़क पर ही खड़े करने पड़ते हैं। -सोनू गुप्ता
सबसे बड़ी समस्या मॉल व ऑनलाइन शॉपिंग है। मॉल व ऑनलाइन के प्रचलन से उनका व्यवसाय प्रभावित हुआ है।-नरेश गुप्ता
घर परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। ब्रांडेड कंपनियों द्वारा भी अपने उत्पाद पर मार्जिन कम कर दिया गया है। -मुन्ना गुप्ता
दुकानों के सामने खड़े वाहनों का पुलिस चालान कर देती है, इस डर से बाजार में ग्राहक नहीं आते हैं। -जय गुप्ता
बोले जिम्मेदार
किराना बाजार में व्यापारियों के लिए पीने के पानी की भी व्यवस्था कराई जाएगी और जहां पर दुकानों के आसपास कूड़ा जमा है, वहां पर सफाई कर्मचारियों को भेज कर साफ-सफाई कराई जाएगी। किराना बाजार में जो भी समस्याएं हैं, उनका जल्द निवारण किया जाएगा।
-श्यामेंद्र चौधरी , पालिका ईओ
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