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बोले प्रयागराज : हांफ रहीं सहकारी समितियां, समय पर नहीं मिलती खाद और बीज

Gangapar News - उत्तर प्रदेश में सहकारी समितियों की स्थिति अत्यंत खराब है। बारा तहसील के विकास खंड शंकरगढ़ की समितियों को समय पर बीज और खाद नहीं मिल रहा है। कर्मचारियों को वेतन की समस्या है, और जर्जर भवनों में कार्य...

Newswrap हिन्दुस्तान, गंगापारThu, 3 April 2025 04:28 PM
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बोले प्रयागराज : हांफ रहीं सहकारी समितियां, समय पर नहीं मिलती खाद और बीज

बारा की समितियां खस्ताहाल उत्तर प्रदेश में 1960‌ के लगभग हरित क्रांति के साथ किसानों की स्थिति मजबूत करने के लिए बनाई सरकारी समितियां इस समय हांफ रही हैं। उसी के साथ सहकारिता आंदोलन भी अंतिम सांस ले रहा है। बारा तहसील के विकास खंड शंकरगढ़ की बहुउद्देश्यीय ससकारी समितियां, किसान साधन सहकारी समिति और संघ किसानों को समय पर न तो बीज दे रहे हैं न खाद। समितियों के कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़ गए हैं। हरित क्रांति और सहकारी समिति दोनों कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हरित क्रांति ने कृषि उत्पादन में वृद्धि की जबकि सहकारी समितियां किसानों को संगठित कर उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाने का काम किया। वर्तमान में सहकारी समितियां अपने अस्तित्व के लिए ही संघर्ष कर रही हैं। विकास खंड शंकरगढ़ अंतर्गत कुल नौ साधन सहकारी समितियां संचालित हो रही हैं। इनमें से अधिकांश समितियां 25 से 30 वर्ष पूर्व बनाई गई थीं और इनमें से कई भवन 40 से 50 साल पुराने हैं और जर्जर अवस्था में हैं। इन जर्जर इमारतों में आज भी सहकारी समितियों का संचालन किया जा रहा है, जिससे वहां काम करने वाले कर्मचारियों और ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

सहकारी समितियों के भवनों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि बरसात के समय इनमें पानी टपकता है, दीवारें सीलन से भर जाती हैं और कई जगहों पर छतें गिरने का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों और समिति से जुड़े कर्मचारियों ने कई बार प्रशासन से इन जर्जर भवनों की मरम्मत की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सहकारी समितियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ होती हैं, लेकिन प्रशासन की अनदेखी के कारण ये संस्थाएं बदहाल स्थिति में पहुंच गई हैं। बरसात के दिनों में समितियों में कार्य करना जोखिम भरा हो जाता है, लेकिन संबंधित अधिकारी इन समस्याओं से बेखबर बने हुए हैं। विभागीय अधिकारियों को चाहिए कि वे जल्द से जल्द इन समितियों के जर्जर भवनों की मरम्मत कराएं ताकि किसानों और कर्मचारियों को सुरक्षित वातावरण में काम करने की सुविधा मिल सके। यदि जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो किसी बड़ी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता। विकास खंड शंकरगढ़ के जोरवट,अकौरिया, नारीबारी, नौढि़या उपहार, बड़गड़ी, शिवराजपुर, गोइसरा अतरसुईया, भारत नगर में सहकारी समितियां है। विकासखंड शंकरगढ़ नौ समस्तियां संचालित हो रही है। इसमें कार्य करने वाले सचिव एवं उनके सहायकों को सिर्फ समितियां से यूरिया, खाद एवं अन्य खाद सामग्रियों के बिक्री से जो कमीशन मिलता है उसी से काम करने वाले सहायकों एवं सचिव का परिवार चलता है। विकासखंड शंकरगढ़ के कई समितियां के सचिव ने बताया कि डीएपी में 25.20 पैसे, युरिया में 16.50 पैसे व एपीएस में 25 रुपये कमीशन मिलता है उसी में कर्मचारी एवं सचिव का वेतन व अन्य खर्च सम्मिलित होते हैं।

1904 में पारित किया गया था पहला सहकारिता कानून

भारत का पहला सहकारी कानून सहकारी ऋण समिति अधिनियम 25 मार्च 1904 में पारित किया गया था। कर्नाटक के गडग जिला के कनागिनहाल गांव की कृषि ऋण सहकारी समिति भारत के प्रथम सहकारी कानून के तहत गठित पहली सहकारी समिति थी। भारत में सहकारिता आंदोलन के जनक त्रिभुवन दास किसी भाई पटेल को माना जाता है। बारा तहसील अंतर्गत विकास खंड जसरा में‌ सहकारी संघ की करोड़ों की जमीन पर दबंगों का कब्जा है। श्री लाल चंद्र इंटर कालेज जसरा और रेलवे स्टेशन के बीच मे करोड़ो रुपए की जमीन सहकारी संघ जसरा की है।इसी प्रकार जारी में भी संघ की जमीन पर दबंगों का कब्जा है। सहकारिता से जुड़े किसानों का कहना है कि यदि इस जमीन पर से कब्जा हटवा कर संघ अपने कब्जे में ले ले तो करोड़ों रुपये की संपत्ति आ सकती है। उस धन से समितियों का ब्यापार बढ़ सकता है और समितियां आर्थिक संकट से उबर सकती है।

हमारी भी सुनें

सरकार के निर्देश पर समितियां सही तरीके से चलाई जा रही हैं जिसमें किसानों को किसी प्रकार की और असुविधा न हो परंतु सरकार को हम लोगों के मानदेय पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि अभी तक जो भी मानदेय मिलता है वह कमीशन पर निर्भर करता है।

-प्रणय सिंह सचिव, साधन सहकारी समिति शंकरगढ़

किसानों के प्रति हम लोग समर्पित हैं ।सरकार की जो भी योजनाएं आती हैं उसको किसानो तक पहुंचाना हम लोगों का कर्तव्य होता है परंतु हम लोगों को मानदेय को लेकर इस पर कोई कठोर कदम नहीं उठता गया है। क्योंकि हम लोग सिर्फ जो बी फैक्स से किसानों तक खाद पहुंचता है उसी कमीशन के बल पर हम लोगों का परिवार चलता है।

-हजारी प्रसाद सिंह, बी फैक्स बड़गड़ी शंकरगढ

साजन सहकारी समिति होने से काफी फायदा हम लोगों को है। समय-समय पर हम लोग अपना अनाज बी फैक्स समितियां पर आकर तौल करवाते हैं और समय पर इसका मूल्य भी हम लोगों के खाते में आ जाता है।

-धनराज, किसान, बड़गड़ी

विकासखंड शंकरगढ़ के अंतर्गत कई समितियां संचालित हो रही है। हम लोग समय-समय पर अपना अनाज भी किसी भी समितियां में असानी से तौल करवाते है। हम लोगों को काफी फायदा मिलता है साथ ही सरकार के निर्देश पर दो और समितिया बन रही हैं।उससे किसानों को और भी फायदा मिलेगा।

-विकेश कुमार सिंह, पूरे बल्दू शंकरगढ

जो सचिव वर्तमान समय में कार्यरत हैं उनको शासन द्वारा वेतन नहीं दिया जाता है। समिति बोर्ड जो भी प्रस्ताव पास करती है उसमें संबंधित विभाग के एडिओ व विभाग के लोग दबाव बनाते हैं। शासन से आग्रह है कि समिति की कैबिनेट जो भी प्रस्ताव करें उस पर किसी भी अधिकारियों का हस्तक्षेप ना हो क्योंकि समिति को चलाना कैबिनेट का दायित्व है। कैबिनेट प्रस्ताव के उपरांत किसी भी अधिकारियों का हस्तक्षेप ना हो।

-कुंजन लाल मिश्रा, अध्यक्ष, बी फैक्स शिवराजपुर

समिति को खाद मंगाने में समस्या उत्पन्न होती थी। पहले विभाग द्वारा पांच लाख रूपए का क्रेडिट दिया जाता था वो उसको प्रस्ताव बनाकर उसकी 10 लाख कर दिया गया था। फिर भी समस्या उत्पन्न होती है इसके लिए क्रेडिट को 15 लाख करने के लिए प्रस्ताव शासन स्तर तक भेजा गया है।

-अखिलेश सिंह पटेल, अध्यक्ष, बी फैक्स नौढिया उपहार शंकरगढ

क्रय केन्द्र खुल जाने से किसानों की समस्या काफी आसान हो चुकी है। हम लोग अपने उपज को नजदीकी में क्रय केन्द्र मे बेचते हैं एवं फिंगर लगाने के एक सप्ताह के उपरांत हम लोगों के पैसे खाते में आ जाते हैं।

-संदीप सिंह, किसान अमरपुर शंकरगढ़

क्षेत्र का छोटा किसान हो या बड़ा किसान सभी अपने ऊपज को सरकार द्वारा निर्धारित क्रय केन्द्रों व समितियों में बेच रहे हैं इससे किसानों को काफी सुविधा मिल रही है।

-शक्तिमान पाल, शिवराजपुर

समितियों की दुर्दशा का कारण लाल फीताशाही है यमुनानगर की सहकारी समितियां हों या सहकारी संघ उनकी दुर्दशा का कारण केवल लालफीताशाही है। करोड़ों रुपए की सहकारी समिति संघ की भूमि माफियाओं के कब्जे में हैं किंतु जिले में बैठे अधिकारी मौन है।कई बार लिखित और मौखिक जानकारी दी गई किन्तु कोई सुनवाई नहीं हो रही। क्षेत्र के प्रमुख साधन सहकारी समिति के नामांतरण की पत्रावली एसडीएम बारा के कार्यालय में धूल फांक रही है।लोटाढ़ गौहानी सहकारी समिति की भूमि का पता ही नहीं है। विभागीय अधिकारी मौन है।संघ से जुड़े क्रय विक्रय के भवन पर कब्जा की होड़ लगी है। फिर भी विकास खंड से लेकर जनपद तक के अधिकारी चुप है। किसानों को खाद का संकट है तो कर्मचारी को वेतन का।

अनिल कुमार मिश्र, सदस्य संचालक मंडल, डिस्ट्रिक्ट को आपरेटिव बैंक

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