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सवारियां ढोना पाप तो नहीं फिर हमारा अपमान क्यों

Farrukhabad-kannauj News - फर्रुखाबाद-फतेहगढ़ में ऑटो चालकों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। न तो कोई विधिवत स्टैंड है और न ही प्रशासनिक सहयोग। पुलिस अक्सर उन्हें परेशान करती है और जाम की स्थिति में अपमान सहना पड़ता है।...

Newswrap हिन्दुस्तान, फर्रुखाबाद कन्नौजThu, 27 Feb 2025 01:05 AM
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सवारियां ढोना पाप तो नहीं फिर हमारा अपमान क्यों

फर्रुखाबाद-फतेहगढ़ के अलावा लालेगट से पांचालघाट, ठंडी सड़क से सेंट्रल जेल जैसे रूटों पर ऑटो चला रहे चालक भी ढेरों समस्याओं का सामना कर रहे हैं। ऑटो चालकों के लिए न तो शहर में कोई भी विधिवत स्टैंड है और न ही प्रशासनिक स्तर से और भी सहूलियतें। लिहाजा ऑटो चालकों का दर्द बढ़ता ही जा रहा है। रही सही कसर ई-रिक्शा वालों ने पूरी कर दी है। ऐसे में धीरे-धीरे ऑटो भी कम होते जा रहे हैं। आपके अपने अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान से ऑटो चालक राजीव कहने लगे कि हमारे लिए कोई स्टैंड ही नहीं हैं। अक्सर हम लोगों को जाम लगने पर पुलिस परेशान करने लगती है जबकि वास्तविक जाम किन कारणों से लगता है इसकी किसी को कोई फिक्र नहीं है। सवारियों के सामने उन्हें अपमान का घूंट पीना पड़ता है। जब कभी वाहन चेकिंग की बारी आती है तब ऑटो चालकों को ही निशाना बना लिया जाता है।

जितेंद्र कहते हैं कि चालान कब हो जाता है पता ही नहीं लगता है। जबकि वे लोग अपनी रोजी रोटी की खातिर एक दो सवारियों के लिए भटकते हैं । तिराहे चौराहों पर सवारियां लेने के चक्कर में चालान कर दिए जाते हैं। कम से कम थोड़ी तो पुलिस वालों को मानवीयता दिखानी चाहिए। अमित कहने लगे कि भोलेपुर, लालगेट और ठंडी सड़क पर अक्सर जाम लग जाता है और जाम खुलवाने की जब बारी आती है तो पुलिस ऑटो पर डंडों से प्रहार करने लगती है। ऐसा होने से ऑटो को भी नुकसान पहुंचता है। सवारियों के सामने जो जलालत महसूस होती है बबलू कहते हैं कि ऑटो चालकों के लिए शहर में कोई ऐसा स्टैंड नहीं है जहां पर सवारियों को एक साथ लिया जा सके। जगह-जगह सवारियां बैठाना उनकी मजबूरी है। यदि रुककर सवारियां नहीं लेेंगे तो आखिर उनका पेट कैसे पलेगा। मधुरेश कहते हैं कि वैसे भी ऑटो धीरे धीरे खत्म हो रहे हैं और ई रिक्शा ने उसकी जगह ले ली है। हम लोगों के पास पहले से ही ऑटो हैं इस वजह से उसको चलाना मजबूरी हो गया है। कई लोगों ने तो ऑटो छोड़कर दूूसरे धंधों को अपना लिया है। सर्वेश कहते हंै कि पुलिस हो या फिर परिवहन विभाग उन्हें दुश्मन की नजर से देखती है। जबकि अतिक्रमण की सबसे बड़ी समस्या दुकानदार पैदा करते हैं। उनकी बजाय मुख्य मार्ग पर जाम लगने की दशा में ऑटो वालों पर ही पुलिस डंडा फटकारती है। संदीप और बंगाली कहते हैं कि फर्रुखाबाद-फतेहगढ़ में दो स्थाई स्टैंड होने चाहिए जिससे कि सवारियां स्टैंड पर आकर बैठ सकें और उन्हें भी अपमानित होने से बचना पड़े।

जाम के झाम पर भी नहंी बन सका ऑटो स्टेंड

तमाम कोशिशों के बाद भी फर्रुखाबाद-फतेहगढ़ में ऑटो चालकों की प्रमुख मांग का समाधान नही हो सका है। इससे आटो चालक व्यथित हैं। आटो चालक संतोष कहते हैं कि अक्सर जाम लगने पर उन्हीं लोगों को जिम्मेदार बताया जाता है पर जो मांग है यदि इसे पूरा कर दिया जाए तो निश्चित तौर पर काफी आसानी होगी और सवारियों को एक स्थान पर बैठने का ठिकाना मिल जाएगा।

ऑटो चालक विकास कहते हैं कि फतेहगढ़ चौराहे के निकट और ठंडी सड़क पर ऑटो स्टैंड बनाए जाने की मांग पिछले दस वर्षों से की जा रही है। तत्कालीन डीएम एनकेएस चौहान ने ऑटो चालकों की मांग पर सहमति जताते हुए अफसरों को कार्रवाई के निर्देश दिये थे। इसके बाद भी ऑटो चालको को अपना कोई स्टैंड नहीं मिला सका है। स्टैंड न मिलनेे के कारण ही ऑटो चालक इधर-उधर रोक कर पुलिस का कोपभाजन बनते हैं। सवारियां जहां कहती हैं वहीं उतारना पड़ता है। इसी तरह जहां कहीं सवारियां मिल गईं वहीं बैठाना भी पड़ता है। यदि स्टैंड बने हों तो सभी लोगों को काफी राहत मिल जाए। स्टैंड न होने का खामियाजा हम लोग भुगत रहे हैं। यदि स्टैंड जल्द ही निर्धारित नहीं किए गए तो आटो चालकों की दिक्कतों में इजाफा होता ही चला जाएग्

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