Hindi NewsUttar-pradesh NewsEtawah-auraiya NewsStruggles of the Rajak Community Unfulfilled Needs and Environmental Challenges

बोले इटावा : बदहाली के घाट उतर रही खुशहाली

Etawah-auraiya News - बोले इटावा : बदहाली के घाट उतर रही खुशहालीबोले इटावा : बदहाली के घाट उतर रही खुशहाली

Newswrap हिन्दुस्तान, इटावा औरैयाFri, 28 Feb 2025 02:24 AM
share Share
Follow Us on
बोले इटावा : बदहाली के घाट उतर रही खुशहाली

एक समय था जब घर-घर जाकर रजक समाज के लोग मैले कपड़े एकत्र करते थे। इन कपड़ों को यमुना किनारे और तालाब पोखर पर ले जाकर उसकी धुलाई करते थे। इन कपड़ो में प्रेस करके घर-घर पहुंचने के बाद मिलने वाला मेहनताना ही उनकी जीविका का एकमात्र साधन है। लेकिन यमुना में प्रदूषण होने के बाद उनके भी यमुना घाटों पर कपड़े धोने पर रोक लगा दी गई। अमित कुमार बताते हैं कि यमुना कार्य योजना के तहत घाट किनारे कपड़े न धो पाने के चलते स्पोर्ट्स स्टेडियम के पास दो दशक पहले धोबी घाट के नाम पर केवल तालाब का निर्माण कराया गया हालांकि जिस तालाब को रजक समाज के लोगों को प्रयोग करना चाहिए वहां पशुपालक अपने गाय भैंस नहलाने लगे। रवि प्रकाश ने बताया कि रजक समाज के लोगों के लिए स्थाई व्यवस्था नहीं हो सकी। आज भी तालाब के किनारे न तो टिनशेड है और न ही कपड़े सुखाने के लिए जरूरी इंतजाम।

विमलेश ने बताया अपने सीमित संसाधनों के बल पर ही वे अपनी जीविका चलाने को मजबूर हैं और तो और तालाब में भरे गंदे पानी में जोक व अन्य जलीय जीवों के चलते उन्हें कई बार बीमारियों का भी सामना करना पड़ता है। गर्मी के दिनों में तालाब के आसपास गंदगी रहने के चलते वह कई बार बीमार हो जाते हैं। विनोद दिवाकर का कहना था कि प्रशासन ने उनके लिए न तो कोई सबमर्सिबल पंप लगा रखा है और न ही जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए। ऐसे में नुमाइश के ही कर्मचारी उनसे मेहनताने के एवज में रुपये भी वसूल करते है। हमारी खुशहाली अब बदहाली के घाट उतर रही है। जिला प्रशासन से लेकर नगर पालिका और जिले की प्रशासनिक व्यवस्था में रजक समाज के लोगों का बड़ा सहयोग है। दरअसल, सरकारी कार्यालय की कुर्सी पर पड़ी तौलिया से लेकर साहब के कपड़े धोने तक का काम रजक समाज के लोग करते हैं लेकिन इन सब के बावजूद उनकी बुनियादी समस्याओं को लेकर अब तक कोई पहल नहीं हुई। न तो नगर पालिका ने उनके लिए कोई व्यवस्था की और न ही प्रशासन ने उनके लिए कभी कोई जरूरी इंतजाम जुटाए। रघुवीर का कहना है कि सरकार ने भी आज तक उनके लिए कोई विशेष योजना को संचालित नहीं किया। लिहाजा कपड़े रंगने से लेकर उनमें प्रेस करने धोने और सुखाने तक का काम वे अपने संसाधनों पर कर रहे हैं।

महंगाई में कमाई हुई कम, कैसे भरें दम : महंगाई की मार भी रजक (धोबी) समाज को झेलनी पड़ रही है। आज एक जोड़ी कपड़े धोने के उन्हें 30 से 40 रूपये मिलते हैं जबकि इस रकम में उन्हें कपड़ों को लोगों के घर से लाना, उन्हें धोकर सूखने के बाद प्रेस कर वापस घर तक पहुंचाना होता है। इसके साथ एक जोड़ी कपड़ों को प्रेस करने के लिए 10 से 15 रूपये मिलते हैं। उनका कहना है कि आज कोयले की कीमत 45 रुपए प्रति किलो है जबकि बिजली से प्रेस चलाना महंगा होता जा रहा है ऐसे में सरकारी सब्सिडी युक्त बिजली न मिल पाने और कोयले में कोई भी छूट न मिलने के चलते उनका कामकाज प्रभावित हो रहा है लिहाजा वे अपनी मेहनत और उससे मिली आमदनी से घर चलाने के लिए मशक्कत कर रहे हैं। इसके साथ ही शहरी क्षेत्र में लॉन्ड्री के बढ़ने से भी उनके व्यापार पर संकट के बादल मंडरा रहे है। बच्चों की अच्छी शिक्षा के इंतजाम तो दूर बल्कि खाने तक के लाले हैं।

सुझाव:

1. तालाब के गंदे पानी की निकासी के लिए नाला निर्माण जरूरी है साथ ही यहां टीन शेड व जरूरी संसाधन उपलब्ध कराया जाए।

2. तालाब में पशुओं के जाने से गंदगी फैल जाती है इसकी साफ सफाई के लिए पालिका को प्रबंध करना चाहिए, ताकि समाज के लोग भी बीमारी से दूर रहे।

3. तालाब में पानी भरने की एवज में लिए जाने वाला सुविधा शुल्क को बंद कराया जायें।

4. तालाब के आसपास रोशनी का भी प्रबंध किया जाए रात के समय यहां अंधेरा रहता है।

5. रजक समाज के उत्थान के लिए सरकारी योजना व सब्सिडी का प्रावधान किया जाए।

6. रजक समाज के बच्चों के लिए बेहतर पढ़ाई की व्य्वस्था सरकार द्वारा की जाए।

समस्या:

1. धोबी घाट का सही मायने में निर्माण कराया जाए टीन शेड कपड़े सुखाने के लिए जरूरी स्थान आदि उपलब्ध नहीं है।

2. पानी खड़ा होने के चलते कई बार कपड़े धोने के दौरान बीमारी का शिकार हो जाते है।

3. तालाब के आसपास गंदगी रहने से भी बीमारी और अन्य जीव जीव जंतुओं का खतरा रहता है। आए दिन जोंक व अन्य विषैले जीव जुंत उन्हें काट लेते है।

4. कोई सुरक्षित स्थान न होने से बारिश में कपड़े सुखाने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है।

5. जरूरी संसाधन न तो नगर पालिका ने उपलब्ध कराई न ही प्रशासन ने इस पर ध्यान दिया।

6. समाज के लोगो के बच्चों के लिए पठन-पाठन की अच्छी व्यवस्थी नहीं है।

समाज के उत्थान के लिए न हुआ कोई काम

स्पोर्ट्स स्टेडियम के बाहर अस्थाई तौर पर बनाए गए धोबी घाट के किनारे बानो व नगीना ने बताया कि समाज के उत्थान के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई लिहाजा हमारे बच्चे पढ़ाई लिखाई छोड़कर इस काम में कैसे उतरेंगे न तो इतने संसाधन है और न ही इतना पैसा है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा देकर किसी अच्छे काम से जोड़ सकें। सरकार ने भी अब तक कोई ऐसी योजना नहीं बनाई जिससे हमें जरूरी साधन उपलब्ध हो सके केवल राशन मिल जाने से घर नहीं चलता। काम को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है कि सभी संसाधन उपलब्ध हो।

धोबी घाट का निर्माण तो दो दशक पहले कर दिया गया लेकिन संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए। प्रशासनिक अधिकारी या नगर पालिका ने इस ओर नहीं देखा। - रघुवीर

समाज के लिए तालाब में पानी भरने और पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है स्वयं पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है। पालिका को यहां एक नल लगवा दिया जाए। - मुकेश

तालाब किनारे महिलाओं के लिए शौचालय का कोई स्थान नहीं है महिलाओं को खुले में शौच जाने की मजबूरी है। नगर पालिका में अपनी समस्या को रखा है। - मोहिनी

बच्चों की शिक्षा के लिए सरकार की ओर से कभी कोई मदद नहीं मिली। सरकार को हमारे बच्चों की शिक्षा व बेटियों के विवाह की योजना बनानी चाहिए।

- रामबाबू

धोबी घाट आने वाले रास्ते पर गेट लगाने की है गेट के न होने से हर कोई यहां चला आता है। साथ ही पशुपालक तालाब में अपने जानवरों को नहलाते हैं।

- राम खिलाड़ी

शाम होते ही धोबी घाट पर अंधेरा छा जाता है प्रशासन की ओर से एक भी लाइट नहीं लगवाई गई। लाइटें लगवाई जाएं ताकि अराजकता खत्म की जा सके।

- सुनील

तालाब पर कपड़े धोने के गंदे पानी के निकासी का कोई साधन नहीं है पास में बने गड्ढे में गंदा पानी एकत्रित हो जाता है जिससे कई बार बीमारियों का सामना करना पड़ता है। - बब्लू

मलाल इस बात का है कि यमुना की सफाई को करोड़ों रुपए खर्च हो चुके है। अरबो रुपए अभी भी खर्च हो रहे है। धोबियों को हटाने पर भी यमुना साफ नहीं हो पाई।- रवि प्रकाश

लंबे समय से कपड़े धो कर परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं लेकिन सरकारी स्तर से कोई भी योजना रजक समाज के लिए नहीं बनी।

- संजय

कपड़े धोने, सुखाने व रंगने के साथ ही प्रेस करने के लिए जरूरी सब्सिडी उपलब्ध हो। साथ ही उपकरण भी सरकार की ओर से उपलब्ध होने चाहिए ।

- देवेंद्र

कपड़े सुखाने के लिए खुले मैदान का सहारा लेना पड़ता है यदि टीन शेड आदि की व्यवस्था बन जाए तो काफी सहूलियत मिल जाएगी।

- विनोद दिवाकर

समाज के लोगों के लिए सरकारी योजनाओं का संचालन जरूरी है। साथ ही नगर पालिका को हमारे लिए उचित स्थान व घाट आदि की व्यवस्था करनी चाहिए। - नगीना

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।

अगला लेखऐप पर पढ़ें