बोले देवरिया : डाकिया को बाइक भत्ता और पेंशन की मिले सुविधा
Deoria News - Deoria news:एक दशक पहले तक देश-विदेश से लोगों के बीच उनके अपनों की सूचनाओं का अदान-प्रदान करने वाला डाक विभाग अब अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हो रहा है।
देवरिया। चिट्टी शब्द आते ही लोगों के जेहन में वह डाकिया याद आ जाता है, जो डेढ़ दशक पहले तक शहर से लेकर गांव तक अपनी एक अलग पहचान बनाए रखता था। समय के साथ डाक विभाग अपने को बदलने की कोशिश में लगा है लेकिन विभाग की सबसे मजबूत कड़ी डाकिया के हालात समय के साथ और खराब होते गए। नियमित कर्मचारियों के रिटायर होने के बाद विभाग ने संविदा पर डाकियों की तैनाती शुरू की। इन्हें हर माह करीब 15 हजार रुपये मानदेय मिलता है। इनके लिए न स्वाथ्य की सुविधा है और न ही रिटायर होने के बाद पेंशन। भटनी में तैनात डाकिया काजल राजभर कहती हैं कि उन्हें रोजाना कम से कम 100 डाक बांटनी होती है। इसके अलावा आधार आधारित पेमेंट समेत अन्य कार्य भी करने होते हैं। महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन डाकिया के मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं की जा रही। कम मानदेय के चलते घर खर्च चलाना और बच्चों की परवरिश करना कठिन हो गया है। बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाना डाकिया के लिए सपना हो गया है।
नहीं बढ़ा भत्ता: कर्मचारियों के रिटायर होने और नए कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं होने से विभाग में डाकियों की संख्या भी घटती जा रही है। ऐसे में अब कर्मचारियों को अधिक क्षेत्र कवर करना पड़ता है। लेकिन साइकिल भत्ता के नाम पर सालों से तय किया गया 60 रुपये महीना ही भत्ता दिया जाता है। त्रिपुरारी दीक्षित कहते हैं कि अधिक दूरी तय करने के कारण अब साइकिल से डाक बांटना संभव नहीं है। बाइक से डाक बांटने पर रोजाना सौ से दो सौ रुपये पेट्रोल में खर्च हो जाता है। कई बार डाकियों ने बाइक भत्ता की मांग की मगर न तो सरकार ने इस पर ध्यान दिया और न ही अधिकारी इसका संज्ञान ले रहे। तेल का खर्च मानदेय से ही जाता है। जबकि पहले से ही हम लोगों का वेतन बहुत कम है। विनय कुमार और धनंजय यादव का कहना है कि अगर हमारे साथ किसी तरह की दुर्घटना हो जाए तो परिवार को कुछ नहीं मिलता। हादसे पर इलाज भी अपने खर्च पर कराना पड़ता है। हम डाकियों की मांग है कि सरकार हमारा दस लाख रुपये तक का बीमा कराए। इसके साथ ही डाकिया और उनके परिवार को इलाज की भी सुविधा मिलनी चाहिए। सरकार या तो आयुष्मान कार्ड बनवाए या स्वास्थ्य बीमा का इंतजाम करे।
आधार आधारित पेमेंट से लेकर जीवित प्रमाण-पत्र तक बना रहे डाकिया
कोरोना काल में डाक विभाग और डाकिया का महत्व बढ़ गया। डाकिया को इलेक्ट्रानिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। डाकिया लोगों के दरवाजे-दरवाजे पहुंच कर आधार आधारित पेमेंट देने की सुविधा देना शुरू कर दिए। एक-एक महीने में जिले में एक-एक करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन आधार से किया गया। इसके अलावा वाहन बीमा की भी सुविधा डाक विभाग ने शुरू की है। इसके तहत डाकिया लोगों के घर जाकर मौके से वाहन का बीमा करता है। लोगों का आधार कार्ड बनाने के साथ ही जीवित प्रमाण-पत्र की सुविधा भी देता है। फोन करने पर डाकिया पेंशनर्स के घर जाते हैं और उनका लाइव जीवित प्रमाण-पत्र बनाते हैं। डाकियों का कहना है कि जीवित प्रमाण-पत्र लोगों के दरवाजे पर जाकर बनाते हैं, लेकिन उसके लिए उन्हें कुछ नहीं मिलता। वह अपना पेट्रोल खर्च कर जाते हैं। ऐसे कार्य के लिए भी उन्हें अलग से कुछ राशि मिलना चाहिए।
समय के साथ डाक विभाग ने बदली सूरत
डाक विभाग में समय के साथ बहुत कुछ बदल गया। साधारण तथा पंजीकृत डाक के अलावा स्पीड पोस्ट, एक्सप्रेस पार्सल, प्रीमियम पार्सल आदि की सुविधा से भी विभाग जुड़ चुका है। विभाग अब ई-पोस्ट द्वारा त्वरित संदेश भेजने की सुविधा भी प्रदान कर रहा है। पहले केवल मनी ऑर्डर के द्वारा धन अंतरण की सुविधा थी, अब इलेक्ट्रॉनिक मनी ऑर्डर, इंस्टेंट मनी ऑर्डर, वेस्टर्न यूनियन, मनीग्राम, एमओ विदेश, आइएफएस मनी ऑर्डर, मोबाइल मनी ऑर्डर ट्रांसफर के जरिए देश-विदेश में त्वरित धन अंतरण की सेवा दे रहा है।
शिकायतें
1. डाकिया को फील्ड में काम के लिए केवल 60 रुपये महीना साइकिल भत्ता मिलता है।
2. डाकिया के लिए कोई बीमा सुविधा नहीं है। इन्हें हादसा होने पर मदद नहीं मिलती।
3. डाकिया को प्रति माह केवल 15 हजार रुपये मासिक मानदेय मिलता है। महंगाई को देखते हुए यह काफी कम है।
4. संविदा पर तैनात डाकिया को रिटायर होने के बाद विभाग से किसी तरह का कोई फंड या पेंशन की सुविधा नहीं मिलती।
5. डाक बांटने के अलावा डाकिया से अन्य कई तरह के काम लिए जाते हैं पर इसके लिए कोई भुगतान नहीं किया जाता।
सुझाव
1. डाकिया को प्रति माह साइकिल भत्ता की बजाय बाइक भत्ता मिले तो उन्हें सहूलियत मिलेगी।
2. डाकिया का कम से कम 10 लाख का बीमा होना चाहिए। उसके और परिवार के लिए भी स्वास्थ्य बीमा की सुविधा हो।
3. मानदये को बढ़ाकर कम से कम 25 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाना चाहिए।
4. डाकिया को पेंशन योजना का लाभ दिया जाना चाहिए, जिससे उनकी बुढ़ापे की लाठी मिल जाए।
5. डाकिया को अतिरिक्त कार्य जैसे आधार से पेमेंट और पार्सल पहुंचाने के लिए अतिरक्ति भुगतान हो।
बोले डाकिया
डाकिया लोगों के घर जाकर डाक से लेकर मनीआर्डर तक पहुंचाता है, पर कम वेतन होने से खुद परेशान रहता हैं।
-रामध्यान
डाकिया को साइकिल भत्ता 60 रुपये प्रति माह मिलता है। जो एक लीटर पेट्रोल की कीमत से भी कम है।
आशीष सिंह
साइकिल से हम लोग डाक बांटने जाते हैं, लेकिन विभाग से हमारे लिए सुरक्षा बीमा तक नहीं है।
खुश मोहम्मद
डाकिया लोगों की सुविधा को हर समय खड़ा है। मगर उसकी दिक्कतों पर किसी का ध्यान नहीं है।
अंश सिंह
हम अपनी समस्याओं को लेकर कई बार आंदोलन कर चुके हैं मगर उस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
चंद्रजीत
डाकिया दरवाजे-दरवाजे पहुंच कर कार्य करता है, लेकिन उसकी सुविधा पर किसी का ध्यान नहीं है।
अभय यादव
आज भी साइकिल का भत्ता दिया जाता है। जबकि हम छह हजार रुपये महीना पेट्रोल में खर्च करते हैं।
चंदन
डाकिया की ड्यूटी 4 घंटे की है, लेकिन हम 8-8 घंटे काम करते हैं। हमारे वेतन में वृद्धि होनी चाहिए।
शुभा प्रसाद
डाकिया का एक दिन का वेतन 500 रुपये है, जबकि हम 200 रुपये से अधिक पेट्रोल में खर्च करते हैं।
त्रिपुरारी दीक्षित
डाकिया का बीमा होना चाहिए और उसको साइकिल भत्ता की जगह बाइक का भत्ता मिलना चाहिए।
विनय कुमार
महंगाई के हिसाब से डाकिया को कम वेतन मिलता है। हमारे वेतन में वृद्धि हो व अन्य सुविधाएं भी दी जाए।
उमाशंकर प्रसाद
डाकिया का10 लाख रुपये का बीमा होना चाहिए। जिससे कोई घटना हो तो परिवार को सहारा मिल सके।
धनंजय यादव
कोरोना काल में जान की परवाह किए बिना लोगों को सुविधाएं दीं, पर हमारी सुविधा पर ध्यान नहीं है।
अखिलेश सिंह
डाक विभाग अच्छा कार्य कर रहा है। लेकिन सरकारी कर्मियों की तरह हमें सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
भगवान कुमार
डाक विभाग अपनी सुविधाएं तो बढ़ा रहा है, लेकिन उनकी सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
अदालत कुमार
हमारी ड्यूटी भले 4 घंटे की है, मगर पूरा दिन कार्य करते हैं। सरकारी कर्मियों की तरह ही सुविधा मिले।
उमेश शर्मा
बोले जिम्मेदार
ग्रामीण डाकियों की सुविधाओं का ख्याल रखा जाता है। डाक विभाग की तरफ से सभी डाकियों का 50 हजार रुपये का बीमा होता है। वेतन और भत्ता शासन स्तर से ही निर्धारित किया जाता है। डाकिया की हर समस्या का समाधान प्राथमिकता पर की जाती है।
अजय पांडेय, डाक अधीक्षक, देवरिया
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