गर्भावस्था में लापरवाही से आटिज्म की चपेट में आ रहे बच्चे
Deoria News - गर्भावस्था के दौरान लापरवाही और दवाओं के गलत इस्तेमाल से बच्चे आटिज्म की चपेट में आ सकते हैं। देवरिया में मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग में हर महीने 8 से 10 बच्चे आटिज्म से पीड़ित आ रहे हैं। यह...

देवरिया, निज संवाददाता। गर्भावस्था के दौरान की जा रही लापरवाही, समय से पहले जन्म, वजन कम होने, अधिक आयु में पैदा होने वाले बच्चे आटिज्म की चपेट में आते हैं। गर्भावस्था के दौरान बिना डॉक्टर की सलाह के दवाईयां लेने से साइड इफेक्ट होता है, इससे भी बच्चा आटिज्म से पीड़ित होता है। मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में हर महीने आटिज्म पीड़ित 8 से 10 बच्चे आ रहे हैं। अधिक उम्र में शादियां आने वाली संतानों के लिए खतरनाक हो सकती हैं। आटिज्म प्रारंभिक मस्तिष्क विकास के महत्वपूर्ण पहलुओं को प्रभावित करता हैं। यह बीमारी लड़कों में ज्यादा पाया जाता हैंI स्वस्थ्य मनुष्य के मस्तिष्क का पूरा क्षेत्र एक दूसरे के साथ संवाद करते हैं I जबकि आटिज्म से प्रभावित बच्चों में, यह क्रिया धीमी होती है। यह बीमारी अनुवांशिक व पर्यावरणीय दोनों कारणों से होता है। यह गर्भ में पल रहे बच्चे के दिमाग के विकास को बाधित करते हैं। इससे दिमाग के विकास को नियंत्रित करने तथा सेल्स व दिमाग के बीच संपर्क बनाने वाले जीन में गड़बड़ी होती है। गर्भावस्था में वायरल इंफेक्शन या हवा में फैले प्रदूषण के कणों के संपर्क में आने से पैदा होने वाला बच्चा आटिज्म की चपेट में आ जाता है। इस बीमारी का टीके से कोई संबंध नहीं हैं। मानसिक स्वास्थ्य विभाग की मनो सामाजिक परामर्शदाता वर्षा सिंह के अनुसार यदि कोई बच्चा ऑटिज्म से पीड़ित है, तो उसके परिवार के दूसरे बच्चे के भी ऑटिज्म होने की संभावना अधिक रहती है। यदि बच्चे को ऑटिज्म है, तो उसे अक्सर आनुवंशिक परीक्षण करवाने की सलाह दी जाती हैं। आनुवंशिक परीक्षण से ऑटिज्म का आनुवंशिक कारण पता चल जाता है। मेडिकल कालेज की ओपीडी में महीने में आटिज्म से पीड़ित 8 से 10 बच्चे आते हैं, जिनका जांच व इलाज किया जाता है।
आटिज्म पीड़ित बच्चों में यह होते हैं लक्षण
- एक ही बात या कार्य को बार-बार दोहराना
- विभिन्न सामाजिक स्थिति में लोगों से बातचीत करने में दिक्कत आना
- आंख से आंख मिलाकर बात करने में कठिनाई होना
- सामाजिक संकेतों को समझने में परेशानी होना
- अपनी भावनाओं को बताने में दिक्कत होना
आटिज्म पीड़ित बच्चे से इस तरह करें बर्ताव
- पीड़ित बच्चे के साथ संवाद को आसान बनायें
- बच्चे के साथ धीरे-धीरे व साफ आवाज में बात करें
- बात करते समय ऐसे शब्दों का प्रयोग करें जो समझने में आसान हो
- बच्चे को बात समझने और उसका जवाब देने को पूरा समय दें
कोट---
आजकल 35 वर्ष की उम्र के बाद होने वाली शादियां होने, मोबाईल, टीबी के अत्यधिक प्रयोग से भी बच्चे आटिज्म की चपेट में आने लगे हैं। इससे प्रभावित बच्चों को सीखने में कठिनाई होती है तथा सामान्य से कम बुद्धि के लक्षण होते हैं। कुछ विकार वाले बच्चों में सामान्य से उच्च बुद्धि होती है। वह जल्दी सीखते हैं, फिर भी उन्हें संवाद करने और जो जानते हैं उसे जिंदगी में लागू करने में परेशानी होती है।
डा. अश्वनी मिश्रा, न्यूरो सर्जन
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