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जिले में सुन्नी की 4400 और शिया पक्ष की 400 वक्फ संपत्ति हैं दर्ज

Bijnor News - जिले में 4800 वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं, जिनमें सुन्नी पक्ष की 4400 और शिया पक्ष की 400 संपत्तियां शामिल हैं। वक्फ संपत्तियों का ब्योरा विभाग के रिकार्ड में नहीं है और वक्फ निरीक्षक की तैनाती नहीं होने...

Newswrap हिन्दुस्तान, बिजनौरThu, 3 April 2025 02:38 AM
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जिले में सुन्नी की 4400 और शिया पक्ष की 400 वक्फ संपत्ति हैं दर्ज

जिले में वक्फ रिकार्ड में 4800 वक्फ संपतियां दर्ज हैं, जिसमें सुन्नी पक्ष की 4400 और शिया पक्ष की 400 वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं। ये सारी संपत्तियां धारा 37 के तहत वक्फ बोर्ड में दर्ज की गई हैं। वक्फ के दर्ज रिकार्ड में संपतियों का ब्योरा चौहदी (नक्शा) का ब्योरा मिलना मुश्किल है। हालांकि जिले में दर्ज 4800 वक्फ संपत्तियों का ब्योरा विभाग के रिकार्ड में दर्ज नहीं है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अन्तर्गत वक्फ का कार्य देखा जाता है। वक्फ के पास संपतियों में कितने कब्रिस्तान, मस्जिद, ईदगाह, इमामबाड़ा, मदरसा आदि का रिकार्ड नहीं है। किस वक्फ संपति की कितनी चौहदी है इसका रिकार्ड भी विभाग के पास नहीं है। किसी वक्फ संपति पर कोई विवाद होने पर उसको तहसील प्रशासन को भेज दिया जाता है। विभाग के पास जिले में वक्फ की विवादित संपति का भी कोई ब्योरा नहीं है।

जिले में वक्फ निरीक्षक नहीं है तैनात

जिले में वक्फ से जुड़े मामले देखने के लिए वक्फ निरीक्षक की तैनाती होती है, जो अल्पसंख्यक विभाग के अन्तर्गत आता है। जिले में काफी समय से कोई भी वक्फ निरीक्षक तैनात नहीं है। इसके चलते वक्फ का कार्य प्रभावित हो रहा है।

ऐसे दर्ज होती है वक्फ में संपति

बिजनौर, संवाददाता।

वक्फ का अर्थ होता है खुदा के नाम पर किसी चीज को दान करना। वो चल व अचल दोनों प्रकार की हो सकती है। वक्फ संपति को दर्ज कराने के लिए एक प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ता है। संपति को वक्फ करने के बाद वक्फ बोर्ड उसका केयरटेयर बन जाता है।

वरिष्ठ अधिवक्ता हसन अली चौधरी ने बताया कि कोई भी व्यक्ति अपनी निजी संपति को वक्फ करना चाहता है, तो वह संपति खिदमते खल्क (जनकल्याण) के काम आती है। वह कभी बिक नहीं सकती है। इस कार्य को कराने के लिए संबंधित वक्फ बोर्ड में प्रार्थना पत्र या आवेदन देना पड़ता है। वक्फ बोर्ड मालिक के हलफनामा व गवाहों के साथ उस संपति को वक्फ संपति मानकर बोर्ड में दर्ज कर लेता है और वक्फ संपति का नंबर दे देता है। फिर उस संपति की देखभाल वक्फ बोर्ड करता है। एक बार संपति वक्फ करने के बाद उसका मालिक भी उसे वापस नहीं ले सकता है।

वक्फ बोर्ड के कार्य

वक्फ की संपति कभी बिक नहीं सकती। न संपति किसी अन्य के नाम ट्रांसफर्मर हो सकती है। वक्फ संपति का कोई मालिक नहीं होता है, सिर्फ केयर टेकर होता है। वक्फ संपति का जो भी आमदनी होती है वह इंसानियत के कामों में खर्च की जाती है। वक्फ बोर्ड वक्फ की हुई संपति की केयर टेकर बनकर पूर्ण देखभाल करता है।

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