बोले बांदा: हम कोचिंग चलाने वाले हो रहे दोहरी मार के शिकार
Banda News - बांदा में 200 से अधिक कोचिंग संस्थान हैं, जो हजारों परिवारों का भरण-पोषण करते हैं। ऑनलाइन क्लासेस और सरकारी शिक्षकों के दबाव के कारण छात्रों की संख्या में कमी आई है। कोचिंग संचालकों ने सरकारी शिक्षकों...
बांदा। हर में दो सौ से अधिक कोचिंग संस्थान हैं, जिनसे एक हजार से अधिक परिवारों का भरण-पोषण हो रहा है। प्रतिस्पर्धा के इस व्यापार में ऑनलाइन के बढ़ते दबाव ने कोचिंग संस्थानों को काफी नुकसान पहुंचाया है। छात्रों की संख्या कम हो गई है। इस चुनौती से जुझ रहे कोचिंग संचालकों का दर्द सरकारी शिक्षकों ने बढ़ा रखा है। जोकि स्कूल से मोटी तनख्वाह लेने के बाद भी छात्र-छात्राओं को प्रताड़ित कर अपने-अपने घरों में बुलाकर पढ़ा रहे हैं। आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान से बातचीत में कोचिंग संचालकों ने अपना दर्द बयां किया। दिनेश समेत तमाम कोचिंग संचालकों ने कहा कि इस पेशे से वही जुड़े हैं, जिन्हें नौकरियां नहीं मिलीं। शिक्षा के बलबूते परिवार का किसी तरह से भरण-पोषण कर रहे हैं। वर्तमान में कोचिंग संचालन में सबसे बड़ी समस्या ऑनलाइन क्लासेज हैं। ऑनलाइन क्लासेज ने कमर तोड़ रखी है। आज से चार साल पहले के मुकाबले छात्र संख्या घटी है। दूसरी चुनौती सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षक हैं। सरकारी शिक्षक स्कूलों में पढ़नेवाले छात्र-छात्राओं पर दबाव बनाते हैं कि उनसे ही बच्चे कोचिंग पढ़ें। ऐसे में ये हमारे मुंह का निवाला ही छीन रहे हैं। उनसे न पढ़ने वाले बच्चों को कक्षा में तरह-तरह से प्रताड़ित करते हैं। ऐसे में कोचिंग संस्थानों में उन्हीं स्कूलों के छात्र-छात्राएं आते हैं, जिनके शिक्षक उनके घर से दूर रहते हैं या जहां के शिक्षक कोचिंग आदि नहीं पढ़ाते हैं।
बच्चों से गुप्त फीडबैक ले होनी चाहिए कार्रवाई: सरकारी शिक्षकों के कोचिंग पढ़ाने पर रोक है। बावजूद इसके अधिक कमाई के लिए बच्चों को प्रताड़ित कर कोचिंग पढ़ने के लिए दबाव बनाते हैं। कोचिंग संचालकों ने कहा कि डीआईओएस को ऐसे सरकारी शिक्षकों पर कार्रवाई करनी चाहिए। इसके लिए स्कूलों में पढ़नेवाले बच्चों से फीडबैक लेना होगा, तभी नकेल कसी जा सकेगी।
सामाजिक तत्वों के जमावड़े से पढ़ाई प्रभावित:संस्थान के बाहर खड़े असामाजिक तत्वों और तेज रफ्तार बाइक राइडर कोचिंग संचालकों के लिए बड़ी समस्या हैं। अधिकांश कोचिंग संस्थान मुख्य सड़कों के किनारे स्थित हैं, जहां असामाजिक तत्वों द्वारा छात्र और छात्राओं को परेशान करने की घटनाएं सामने आती हैं।
बोले संचालक
कोचिंग संस्थान को चलाने में कई तरह की समस्याओं का सामना करते हैं। छात्रों द्वारा समय पर फीस भुगतान न होने से संस्थान के अन्य खर्चे पूरा करने में परेशानी होती है। इसके अलावा कोचिंग संस्थान के बाहर असामाजिक तत्वों का खतरा और तेज रफ्तार बाइकर्स से दुर्घटना का डर हमेशा बना रहता है। छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा प्रभावित होती है। -आरके
अभिभावकों को अपने बच्चों पर ध्यान देना चाहिए। पेरेंट्स को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके बच्चे घर से कोचिंग के लिए निकलते समय सही से जाएं और समय पर संस्थान पहुंचें। यह भी जिम्मेदारी बनती है कि अभिभावक बच्चों से लगातार अपना संपर्क बनाकर रखें और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे सुरक्षित माहौल में पढ़ाई कर रहे हैं या नहीं। -पंकज पाठक
शिक्षकों की एक आम समस्या यह है कि कई बच्चे घर से कोचिंग के लिए तो निकलते हैं, लेकिन संस्थान नहीं पहुंचते हैं। अभिभावकों को बच्चों की गैरहाजिरी की जानकारी तक नहीं होती। बाद में जब रिजल्ट खराब होता है, तो वे कोचिंग संस्थान और शिक्षकों को दोष देते हैं। असल में बच्चे कोचिंग में नियमित रूप से नहीं आते, इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। -नंद किशोर द्धिवेदी
समय बदल रहा है। ऐसे में आजकल के दौर में बच्चों को पढ़ाई के लिए उनके अभिभावक मोबाइल फोन और अन्य गैजेट्स प्रदान करते हैं, लेकिन अक्सर बच्चे इसका दुरुपयोग करते मिलते हंै। गंभीर मसले पर अभिभावकों की नजरअंदाजी के कारण कई बच्चे इसका इस्तेमाल पढ़ाई करने में कम अपने मनोरंजन के लिए ज्यादा करते हैं। इससे उनका ध्यान भटकता है। बच्चों का रिजल्ट नहीं आने की स्थिति में शिक्षक इसके जिम्मेदार माने जाते हैं जबकि घर में ही अभिभावकों के सामने बच्चे मोबाइल फोन पर गेम और फिल्में देखते रहते हैं। भोलू शर्मा
बोले जिम्मेदार
डीआईओएस दिनेश कुमार कहते हैं कि हाल ही में पदभार संभाला है। पंजीकृत कोचिंग संचालकों की जो भी समस्याएं हैं, उन्हें कार्यालय आकर बताएं। समस्याओं का त्वरित निस्तारण कराया जाएगा। जनपद में बहुत जल्द सभी कोचिंगों का सर्वे कराया जाएगा। बिना रजिस्ट्रेशन या सरकारी शिक्षकों के कोचिंग संचालित करते पाए जाने पर संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी।
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