बोले बांदा: जाम के शोर में दब गई बर्तन बाजार की खनक
Banda News - बांदा के बर्तन व्यापारियों को जाम, अतिक्रमण, महंगाई और कम आमदनी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्राहकों की आवाजाही रुक गई है और दुकानदारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। नगर...
बांदा। शहर के बर्तन व्यापारियों को दुश्वारियों ने घेर रखा है। जाम अतिक्रमण, बढ़ती महंगाई, प्रतिस्पर्धा, कम आमदनी जैसी समस्याओं से बर्तन बाजार बेदम हो गया है। सड़कों पर लोगों की आवाजाही तो दिखती है, लेकिन जाम और अतिक्रमण के कारण दुकान तक ग्राहक नहीं पहुंचते हैं। कारोबारी हरिओम और संदीप कुमार कहते हैं कि शासन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक कई बार समस्याओं को सामने रख चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं होती है। जाम और अतिक्रमण ने बर्तन बाजार की चमक ही छीन ली है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि आमदनी न होने से दुकान और घर खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। इन्हीं दुश्वारियों को बर्तन व्यापारियों ने आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान से बयां किया।
पार्किंग न होने से पैदल चलना मुश्किल:कारोबारी हर्ष गुप्ता और राजू अंसारी कहते हैं कि शहर के बीचोबीच बाजार है। पार्किंग की व्यवस्था न होने से ग्राहकों को अपने वाहन पार्क करने तक की जगह नहीं मिलती। जाम लगने से पैदल चलना भी दूभर होता है। नगर पालिका द्वारा बार-बार सर्वे के बावजूद यहां शौचालय तक नहीं बना। इससे दुकानदारों से लेकर बाजार आने वाले ग्राहकों तक को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जाम और अतिक्रमण ने हमारे बाजार की चमक छीन ली है।
पेयजल की नहीं कोई व्यवस्था:कारोबारी आशीष ओमर और सुरेश गुप्ता ने बताया कि बाजार में आसपास कहीं पर पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके लिए कई बार बाजार में हैंडपंप और वाटर कूलर लगाने की प्रशासन से मांग की गई लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। बर्तन व्यापारियों के साथ नगर और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले ग्राहकों को भी पीने के पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। गर्मी के मौसम में हालत और खराब हो जाते हैं इसलिए बाजार में वाटर कूलर लगाया जाए।
रात में पुलिस की गश्त जरूरी : कारोबारी आशू सेठी और आलोक जैन के मुताबिक बर्तन के अलावा भी बाजार में कई पेशों से जुड़े व्यापारी अपना कारोबार करते हैं। यहां रोजाना करोड़ों रुपये का कारोबार होता है पर सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर कुछ भी नहीं है। दिन में तो एक-दो सिपाही बाजार में रहते हैं, लेकिन रात में वह भी नहीं हैं। रात में दुकानों की सुरक्षा भगवान भरोसे रहती है। ऐसे में दिन भर दुकान पर बैठने के बाद देर शाम डरते-डरते अपने अपने घरों को लौटते हैं। भरोसा नहीं रहता कि रात में कोई वारदात न हो जाए। दुकानदार प्रेम नारायण और रमेश चन्द्र गुप्ता कहते हैं कि बाजार में ई रिक्शों का बगैर रोक टोक संचालन भी आफत है, इनकी वजह से जाम लगा रहता है।
बोले कारोबारी
बर्तन और कटलरी जैसे समानों पर टैक्स के बढ़ने से ग्राहक टैक्स देने से बचते हैं। इससे हमारे कारोबार के साथ आमदनी पर भी प्रभाव पड़ता है।- हरिओम
एक डिनर सेट पर 18 प्रतिशत जीएसटी है। अंदर की कटलरी पर 12 प्रतिशत जीएसटी है। जबकि कटलरी मात्र 50 से 100 ग्राम होती है। -संदीप
पेयजल की समस्या है। पानी के लिए भटकना पड़ता है। सर्दियों के दिनों में जैसे-तैसे काम चल जाता है। गर्मियों में पानी खरीदकर पीना पड़ता है।-हर्ष गुप्ता
पार्किंग की सुविधा न होने से बाजार में आए दिन जाम की समस्या रहती है। ग्राहक दुकानों तक नहीं पहुंचते। -राजू अंसारी
बोले जिम्मेदार
सिटी मजिस्ट्रेट संदीप केला कहते हैं कि बाजार में व्यापारियों की सभी समस्याओं का जल्द ही कोई न कोई हल निकाला जाएगा। जाम और अतिक्रमण की समस्या के लिए बाकायदा अभियान चलाकर बाजार को अतिक्रमण मुक्त किया जाएगा।
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