राष्ट्ररक्षा पर सब कुछ कुर्बान करने की दी सीख
Balrampur News - ईद-उल-अजहा नमाज आदा करने के बाद शुरू हुआ कुर्बानी का सिलसिला, गरीबों में बांटे...

ईद-उल-अजहा
नमाज आदा करने के बाद शुरू हुआ कुर्बानी का सिलसिला, गरीबों में बांटे गए कुर्बानी के गोस्त
ईद-उल-अजहा की नमाज अदा करने के लिए मस्जिदों और ईदगाहों में किया गया था विशेष प्रबंध
बलरामपुर, संवाददाता।
फर्ज-ए-कुर्बानी का त्यौहार ईद-उल-अजहा सोमवार को पूरे जिले में धूमधाम से मनाया गया। सुबह सूरज निकलने के बाद ईदगाहों और मस्जिदों में मुसलमान ने ईद उल अजहा का विशेष नमाज अदा करने के बाद एक दूसरे के गले मिलकर बक़रीद की मुबारकबाद दी। जिसके बाद कुर्बानी का सिलसिला शुरू हुआ।
जिले में हर्षोल्लास के साथ ईद-उल-अजहा त्योहार मनाया गया। मस्जिदों व ईदगाहों पर ईद की नमाज अदा कर लोगों ने एक दूसरे से गले मिलकर बकरीद की मुबारकबाद दी। ईद-उल-अजहा की नमाज अदा करने के लिए मस्जिदों और ईदगाहों में विशेष प्रबंध किया गया था। ईदगाहों और मस्जिदों की साफ-सफाई कराकर वजू के लिए पानी व नमाज अदा करने के लिए चटाई की पर्याप्त व्यवस्था की गई थी। सभी मस्जिदों और ईदगाह में नमाज के समय में 15 मिनट से आधा घंटा तक का अंतर रखा गया था। जिससे अगर किसी व्यक्ति की नमाज छूट जाए तो वह अन्य मस्जिदों अथवा ईदगाहों पर जाकर नमाज अदा कर सके। नमाज के दौरान शांति और आपसी सद्भाव का संदेश दिया गया। नमाज का सिलसिला सुबह छह बजे से शुरू हुआ और अंतिम नमाज बड़ा ईदगाह में आठ बजे अदा की गई। नगर पालिका ने भी कुर्बानी के बाद साफ-सफाई के लिए तैयारियां कर रखी हैं। ईद-उल-अजहा की नमाज के बाद कुर्बानी का सिलसिला शुरू हुआ। जो ईद के दूसरे व तीसरे दिन भी निरंतर कुर्बानी चलती रहेगी। मुस्लिम धर्मगुरुओं ने ईद पर कुर्बानी का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल न करने की अपील की है। हजरत इब्राहीम और हजरत इस्माइल की सुन्नत पर अमल करते हुए मुसलमानों ने घरों में बकरों, भेड़ों और दुम्बों को राहे खुदा में कुर्बान किया। वहीं बड़े जानवरों की कुर्बानी निर्धारित जगहों पर की गई। कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा गया। पहला भाग रिश्तेदारों और दोस्तों को दिया गया, दूसरा हिस्सा गरीब व जरूरतमंदों को तकसीम किया गया, जबकि तीसरा हिस्सा परिवार के लिए इस्तेमाल में लिया गया। पर्व को लेकर जिला प्रशासन सतर्क रहा। नमाज के समय कड़ी सुरक्षा के साथ पुख्ता इंतजाम रहे। सभी मस्जिदों व ईदगाहों के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रही।
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कुर्बानी का हिस्सा पाकर खिले गरीबों के चेहरे
महंगाई के दौर में बकरे का गोश्त अधिक महंगा होने से गरीबों को साल भर बकरे का गोश्त नसीब नहीं हो पाता है। बकरीद के दिन कुर्बानी किए गए जानवरों के गोश्त के तीन हिस्सों में से एक हिस्से पर गरीबों का हक होने के चलते गरीबों को आसानी से बकरे का गोश्त उपलब्ध हो जाता है। जिससे उनके घरों में इस त्यौहार के चलते उनको व उनके बच्चों का भी त्योहार मन जाता है। कुर्बानी करने वाले हैसियतमंद लोग अपने आसपास मौजूद गरीबों में गोश्त का हिस्सा तक्सीम करते हैं। इसके अलावा तमाम गरीब जरूरतमंद खुद हैसियतमंदो के घरों तक जाकर अपने हक के हिस्से का गोश्त मांगते हैं।
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