देवी भक्तों ने भय से मुक्ति को किया मां चंद्रघंटा की आराधना
Balia News - 0 भोर से ही दुर्गा सप्तशती के मंत्रों से गूंजा वातावरण सेब, केला व दूध से भक्तों ने लगाया मां को भोग (सचित्र, पिक: 18 व 19) बलिया, संवाददाता। वासंतिक

बलिया, संवाददाता। वासंतिक नवरात्र के तीसरे दिन मंगलवार को देवी भक्तों ने मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप का पूजन-अर्चन विधि-विधान से किया। सुबह से ही प्रसिद्ध देवी मंदिरों पर दर्शन के लिए भक्तों की कतार नजर आयी। घरों में दुर्गा सप्तशती का पाठ व मां के जयकारों से संपूर्ण वातावरण गूंज उठा। जिले के पश्चिमी छोर पर स्थित मंगला भवानी मंदिर, ब्रह्माणी देवी मंदिर, पचरूखा देवी मंदिर, शंकरपुर भवानी मंदिर पर सैकड़ों की संख्या में भक्तों ने मां चंद्रघंटा का दर्शन पूजन किया। देवी भक्त महिला व पुरुषों ने मां को पीले व सफेद फूल चढ़ाए तथा सेब व केला का भोग लगाया। इस दौरान मां के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो उठा। थम्हनपुरा निवासी आचार्य डॉ. अखिलेश उपाध्याय ने बताया कि मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप के पूजन से भय से मुक्ति तथा धन धान्य की बढ़ोतरी व ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। मां के इस स्वरूप के पूजन से साहस व पराक्रम में वृद्धि के साथ ही जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है। मां दुर्गा का यह स्वरूप परम शांति दायक व कल्याणकारी माना जाता है।
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आयुर्वेद की नजर में आरोग्यवर्धक है नवरात्र
बलिया। नवरात्र में उपवास रखकर पूजन-अर्चन आध्यात्मिक ही नहीं, वैज्ञानिक दृष्टि से भी परिपूर्ण है। राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय में तैनात डॉ. सुभाष यादव ने बताया कि भारतीय प्राचीन चिकित्सा पद्धति में आयुर्वेद उपवास को ‘उपवास परम औषधि माना गया है। नवरात्र ऋतुसंधि कासमय होता है। ऐसे में उपवास के साथ सात्विक आहार लेने से शरीर के विकार बाहर निकलकर आरोग्यता प्रदान करते हैं। डॉ. यादव ने बताया कि नवरात्र में प्रयोग होने वाले सामग्रियों का औषधीय महत्व है। इसके सेवन से चर्मरोग सहित अन्य बीमारियों से बचा जा सकता है।
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