औरैया में बताया भागवत का महत्व
Auraiya News - आजादनगर के शीतलामाता मन्दिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन पंडित रजनीश त्रिपाठी ने शुकदेव जी के जन्म और परीक्षित श्राप की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि भागवत कथा भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और...

कस्बे के आजादनगर में स्थित शीतलामाता मन्दिर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन कथा वाचक पंडित रजनीश त्रिपाठी द्वारा शुकदेव जन्म, परीक्षित श्राप और अमर कथा का वर्णन किया गया। पार्वती जी के कहने पर कि शंकर जी ने पार्वती जी को अमर कथा सुनाई थी। कथा सुनते सुनते पार्वती जी सो गई वह पूरी कथा श्री सुखदेव जी ने सुनी और अमर हो गए। शंकर जी सुखदेव जी के पीछे उन्हें मृत्युदंड देने के लिए दौड़े। सुखदेव जी भागते भागते व्यास जी के आश्रम में पहुंचे और उनकी पत्नी के मुंह से गर्भ में प्रविष्ट हो गए। इस तरह श्री सुखदेव जी का जन्म हुआ। कथा व्यास ने बताया कि भगवान की कथा विचार, वैराग्य, ज्ञान और हरि से मिलने का मार्ग बता देती है। राजा परीक्षित के कारण भागवत कथा पृथ्वी के लोगों को सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। समाज द्वारा बनाए गए नियम गलत हो सकते हैं। किंतु भगवान के नियम ना तो गलत हो सकते हैं और नहीं बदले जा सकते हैं। कथा व्यास ने कहा कि भागवत के चार अक्षर इसका तात्पर्य यह है कि भा से भक्ति, ग से ज्ञान, व से वैराग्य और त त्याग जो हमारे जीवन में प्रदान करे, उसे हम भागवत कहते हैं। साथ ही श्रीमद् भागवत तो दिव्य कल्पतरु है यह अर्थ, धर्म, काम के साथ साथ भक्ति और मुक्ति प्रदान करके जीव को परम पद प्राप्त कराता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत केवल पुस्तक नही साक्षात श्रीकृष्ण स्वरुप है। इसके एक एक अक्षर में श्रीकृष्ण समाये हुये हैं। इस अवसर पर परीक्षित शिव दुबे, अमित दुबे, उमेश दीक्षित सहित तमाम श्रोता मौजूद रहे।
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