बोले आगराः इन सेवकों को है सुरक्षा सुविधाओं की दरकार
Agra News - आगरा में 200 से ज्यादा युवाओं की टीम ने बेसहारा गायों की सेवा करने का बीड़ा उठाया है। वे अब तक 1000 से अधिक गोवंशों का रेस्क्यू कर चुके हैं। हालांकि, सरकारी लापरवाही और संसाधनों की कमी के कारण गायों...
आगरा। सनातन संस्कृति में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। यही वजह है कि गाय के दूध की तुलना अमृत से होती है। गाय की सेवा को ईश्वर की सेवा माना जाता है। इसके बाद भी ये हैरत वाली ही बात है कि शहर में बड़ी संख्या में गोवंश आज भी बेसहारा घूम रहा है। इलाज के लिए जो इंतजाम हैं। वो नाकाफी नजर आते हैं। हालांकि ऐसी निराश्रित गायों की सेवा करने के लिए 200 से ज्यादा युवाओं की टोली खड़ी हो गई है लेकिन उनके पास भी संसाधनों और सहयोग का अभाव है। टीम के पास टिर्री वाली एक एंबूलेंस भी हैं। जिसकी मदद से वो एक हजार से भी ज्यादा गोवंशों का रेस्क्यू कर चुके हैं। संवाद कार्यक्रम में युवाओं ने गोवंशों की दुर्दशा पर चिंता जाहिर की। कहा कि गायों की सुरक्षा और सेवा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए जाने की जरूरत है।
योगी सरकार में गायों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। गोतस्करों के खिलाफ भी सख्ती से कार्रवाई की जा रही है। लेकिन सरकारी मशीनरी की लापरवाही गोवंशों पर भारी पड़ रही हैं। गोवंश सड़क पर बेसहारा घूम रहे हैं। खाने की तलाश में यहां से वहां भटक रहे हैं। दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। घायल हो जाने पर सड़क ही उनका सहारा है। कई गोवंश तेजाब के हमलों में भी घायल हुए हैं। कैमरे में कैद तस्वीरें सच्चाई बयां कर रही हैं। ये दिखा रही हैं कि निराश्रित गायों की देखभाल का जिम्मा संभालने वाले विभाग के अधिकारी अपने कर्तव्यों के प्रति कितने गंभीर हैं। गोवंशों की दुर्दशा होते देख युवाओं की टीम ने गोसेवा का का बीड़ा अपने कंधों पर उठाया है। इस टीम से 200 से भी ज्यादा युवा जुड़े हुए हैं। जिन्होंने अपने दिन रात गोसेवा का समर्पित कर दिए हैं। जिले में कहीं भी गोवंश घायल अवस्था में पड़ा दिखता है। तो लोग इस टोली से जुड़े युवाओं को फोन करते है। टीम के सदस्य मौके पर पहुंचते हैं। अपने स्तर पर गोवंश के इलाज से खाने पीने का सभी इंतजाम करते हैं। अब तक 1000 से भी ज्यादा गोवंशों की जान बचा चुके हैं।
गो सेवा करने वाले इन युवाओं ने बताया कि आज भी काफी संख्या में गोवंश बेसहारा घूम रहे हैं। उनके सामने हर दिन पेट भर भोजन जुटाने की चुनौती रहती है। कंठ तर करने के लिए भी गोवंशों को दर दर भटकना पड़ता है। उन्होंने सभी से अपील की कि घर का भोजन कचरे में नहीं फेंके। बेकार बचे भोजन को सड़क पर घूमने वाले इन बेसहारा, बेजुबानों को दें। गायों की इस बेकदरी से गाय को माता का दर्जा देने वाले हजारों लोग निराश हैं। उनका कहना है कि गायों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। गोतस्करी और गोहत्या रोकने के लिए विशेष टीम का गठन किया जाना चाहिए। जो भी लोग गायों पर तेजाब से हमले कर रहे हैं। उनके खिलाफ एन एस ए ( राष्ट्रीय सुरक्षा कानून ) के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। टीम के सदस्यों ने बताया कि उनके पास एक टिर्री है। जिसे उन्होंने एंबूलेंस का रूप दे दिया है। जहां भी घायल गोवंश मिलने की सूचना होती है। टीम के सदस्य अपने काम छोड़कर घायल गोवंश के पास पहुंचते हैं। सरकारी मदद आने का इंतजार किए बिना टिर्री वाली एंबूलेंस में गोवंश को लादकर अपने साथ ले आते हैं। खुले स्थान पर उन्होंने टेंट लगाकर अस्थाई पशु चिकित्सालय बनाया है। वहीं पर गोवंशों का इलाज करते हैं। टीम के सदस्य गोवंशों का पेट भरने के लिए अपने घर से भोजन लाते हैं। जरूरत पड़ने पर घर घर घूमकर भूसा और हरा चारा जुटाते हैं। गोवंशों की दवा पानी का खर्चा भी खुद ही वहन करते हैं। युवाओं की इस ।
की जा रही है गोवंशों की बेकदरी
शहर में गोवंशों की हालत बहुत अच्छी नहीं है। अगर लोगों के निजी प्रयास नहीं हों तो हालात बेहद खराब हो जाएं। ये गोवंश की महत्ता ही है कि खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोवंशों की दशा को लेकर बेहद संजीदा रहते हैं। इसके बाद भी अधिकारी गोवंशों की देखरेख में लापरवाही दिखा रहे हैं। सरकारी मशीनरी की इस लेटलतीफी की वजह है कि गोवंशों की मदद के लिए लोगों को खुद कदम आगे बढ़ाने पड़े हैं। हजारों की संख्या में लोग अपने अपने स्तर से इस टीम से जुड़े हुए हैं। सभी चाहते हैं कि गोवंशों की बेकदरी न की जाए। गोवंशों को मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप भोजन, पानी और सुरक्षा दी जाए।
गोतस्करी रोकने के लिए बने विशेष टीम
गोतस्करों की चहल कदमी भी गो प्रेमियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। उन्होंने बताया कि गोतस्करी रोकना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है। कई बार आनन-फानन में सूचना मिलती है। गोतस्करों तक पहुंचने के लिए बेहद कम समय मिलता है। गोतस्कर हमला कर देते हैं। जान का खतरा रहता है। गायों की सेवा कर रहे युवाओं ने गोतस्करी रोकने के लिए विशेष टीम और अलग से क्यूआरटी टीम बनाए जाने की मांग की है। अलग से हेल्पलाइन नंबर जारी करने के लिए गुहार लगाई है। जिससे गोतस्करी रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई हो। उन लोगों को भी समय पर पुलिस सहायता मिल पाए।
तेजाब डालने पर लगे एनएसए
गोप्रेमियों की माने तो काफी संख्या में गोवंश तेजाबी हमले में घायल हुए हैं। रात में उपद्रवी गोवंशों पर तेजाब डालकर उन्हें घायल कर देते हैं। टीम तेजाबी हमलों से घायल हुए दर्जनों गोवंशों का इलाज कर चुकी है। टीम के सदस्यों ने बताया कि कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में ही गायों पर तेजाब से हमले हुए हैं। इस पर पूरी तरह रोक लगाया जाना बेहद जरूरी है। गो प्रेमियों ने कहा कि जो भी लोग गोवंशों पर तेजाब से हमले कर रहे हैं। उनके खिलाफ एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत कानूनी कार्रवाई किए जाने की जरूरत है। तभी इस तरह की वारदातों पर अंकुश लग पाए। गोवंशों को सुरक्षा मिल पाएगी।
तत्काल इलाज का हो इंतजाम
निराश्रित गोवंशों की देखभाल का जिम्मा संभाल रहे युवाओं ने बताया वो अपने स्तर पर गोवंशों का जैसे तैसे इलाज कर रहे हैं। उनके पास संसाधनों का अभाव है। सरकारी मदद समय पर नहीं मिल पाती है। उन्होंने आपसी चंदे से एक टिर्री का इंतजाम किया है। जिसे वो गोवंशों की मदद लिए एंबूलेंस की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें चोट वाला मलहम और गायों की दवाएं मिल जाएं तो वो ज्यादा से ज्यादा गायों का इलाज आसानी से कर पाएंगे। गायों के इलाज में जरा भी देरी नहीं होगी। गोप्रेमियों ने कहा कि गोवंशओं के इलाज में सरकारी मशीनरी को भी सक्रियता दिखानी होगी। तभी मुश्किलें कम हो पाएंगी।
हरे चारे और भोजन का हो पुख्ता प्रबंध
अस्थाई गोशाला में पड़े बेजुबान गोवंशों के लिए भोजन-पानी का प्रबंध करना भी टीम के लिए मुश्किल भरा काम है। खास तौर पर हरा चारा जुटा पाने में सबसे ज्यादा मुश्किल होती है। इसे जुटाने के लिए टीम के सदस्य सुबह ही घरों से निकल जाते हैं। मॉर्निंग वॉक के साथ ही अपनी मेहनत से गोवंशों के लिए हरा चारा जुटाते हैं। गोवंशों को संतुलित आहार देने के लिए सब्जियों का इंतजाम करते हैं। इसके बाद साथ बैठकर सब्जियां काटते हैं। फिर सब्जी और हरे चारे से गोवंशों की सानी की जाती है। गोप्रेमियों का कहना है कि लोग जागरुकता दिखाएं तो गोवंशों के लिए भोजन पानी का प्रबंध आसानी से हो सकता है। केवल करना इतना है कि लोगों को घर में बचे हुए भोजन को उनकी एकता पुलिस चौकी के पीछे बनी गोशाला तक पहुंचाना है।
वर्जन (फोटो)-
सनातन संस्कृति में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। गाय के दूध की तुलना अमृत से होती है। गायों की दुर्दशा देखकर मन आहत होता है। व्यवस्थाओं में बड़ा सुधार किए जाने की जरूरत है।
जितेंद्र दैपुरिया- गोप्रेमी
शहर में बड़ी संख्या में गोवंश बेसहारा घूम रहा है। इलाज के लिए जो इंतजाम हैं। वो नाकाफी हैं। सरकारी मशीनरी को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। गोवंशों का बेहतर इलाज मिलना चाहिए।
सोनू शर्मा- गोप्रेमी
निराश्रित गायों की सेवा करने के लिए हमारी पूरी टीम लगातार काम कर रही है। लेकिन हमारे पास संसाधनों और सहयोग का अभाव है। हम सभी लोग जैसे तैसे इस व्यवस्था को चला रहे हैं।
भगवान दास शर्मा - गोप्रेमी
टीम के पास टिर्री वाली एक एंबूलेंस हैं। जिसे हम आपसी सहयोग से चलाते हैं। हमें कहीं भी गोवंश के पड़े होने की सूचना मिलती है। हम टिर्री वाली एंबूलेंस घायल गोवंश को इलाज के लिए लाते हैं।
आदि दीक्षित - गोप्रेमी
सरकारी मशीनरी की लापरवाही गोवंशों पर भारी पड़ रही हैं। गोवंश सड़क पर बेसहारा घूम रहे हैं। खाने की तलाश में यहां से वहां भटक रहे हैं। इस पर अधिकारियों को ध्यान देने की जरूरत है।
महेश उपाध्याय - गोप्रेमी
टीम से 200 से भी ज्यादा युवा जुड़े हुए हैं। जिन्होंने अपने दिन रात गोसेवा का समर्पित कर दिया हैं। कोई गोवंश घायल अवस्था में पड़ा दिखता है। टीम के सदस्य तत्काल मदद के लिए पहुंचते हैं।
प्रमोद कुमार - गोप्रेमी
योगी सरकार में गायों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। गोतस्करों के खिलाफ भी सख्ती से कार्रवाई की जा रही है। लेकिन सरकारी मशीनरी की लापरवाही गोवंशों पर भारी पड़ रही हैं।
राजेश कुमार - गोप्रेमी
सभी से अपील है कि घर का भोजन कचरे में नहीं फेंके। बचे भोजन को सड़क पर घूमने वाले इन बेसहारा, बेजुबानों को दें। इससे बेजुबानों के सामने खड़ी भोजन पानी की दिक्कत खत्म होगी।
ध्यानचंद - गोप्रेमी
अपने स्तर पर गोवंश के इलाज से खाने पीने का सभी इंतजाम करते हैं। अब तक 1000 से भी ज्यादा गोवंशों की जान बचा चुके हैं। सरकारी मशीनरी मदद करे तो गोवंशों को बड़ी राहत मिल जाएगी।
रविराज सेतिया - गोप्रेमी
गोवंशों पर हमला कर उन्हें घायल करने की कई घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे लोगों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून एनएसए के तहत कार्रवाई किए जाने की जरूरत है। ऐसी घटनाएं रुकनी चाहिए।
राजेशकुमार - गोप्रेमी
शहर में खुली गोशालाओं की जांच किए जाने की जरूरत है। जब इतनी गोशालाएं खुली हुई हैं। तब इतनी अधिक संख्या में गोवंश सड़कों पर बेसहारा कैसे घूम रहे हैं। इस पर रोक लगनी चाहिए।
विपिन कुमार - गोप्रेमी
गोवंशों की देखभाल के लिए सरकारी मशीनरी को सक्रियता बढ़ानी होगी। तत्काल इलाज का इंतजाम करना होगा। तब कहीं जाकर बेजुबान गोवंशों को राहत मिल पाएगी। काफी परेशानी है।
डॉ प्रेमकुमार - गोप्रमी
गोतस्करों को रोकना काफी मुश्किल भरा काम होता है। कई बार पुलिस की सहायत समय से नहीं मिल पाती है। गोतस्करी रोकने के लिए अलग से टीम का गठन किए जाने की जरूरत है।
दिनेश कुमार - गोप्रेमी
काफी संख्या में गोवंशों पर तेजाब से हमले की घटनाएं सामने आई हैं। इस तरह का घृणित कार्य करने वाले लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई किए जाने की जरूरत है। तभी राहत मिलेगी।
अमरनाथ- गोप्रेमी
आवारा श्वानों की वजह से घायल गोवंशों को काफी दिक्कत रहती है। आवारा श्वान घायल गोवंश को और ज्यादा घायल कर देते हैं। इस पर रोक लगाए जाने की जरूरत है। अधिकारी संज्ञान लें।
नरेंद्र कुमार - गोप्रेमी
आपसी चंदे से एक टिर्री का इंतजाम किया है। जिसे गोवंशों की मदद लिए एंबूलेंस की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। अधिकारी इस पर संज्ञान लें। घायल गोवंशों के इलाज के लिए मदद करें।
भूपत सिंह - गोप्रेमी
गोवंशों का इलाज करने के लिए चोट वाला मलहम और दवाएं मिल जाएं, तो हम लोग ज्यादा से ज्यादा गोवंशों का इलाज आसानी से कर पाएंगे। गोवंशों को भी काफी राहत मिलेगी।
कान्हा झा - गोप्रेमी
गोवंशों के लिए भोजन पानी का प्रबंध करने में पूरा दिन लग जाता है। सभी से अपील है कि वो गोवंशों की मदद के लिए आगे आएं। भोजना पानी का प्रबंध करने में मदद करें।
शशिकांत उपाध्याय- गोप्रेमी
सरकारी मशीनरी की लेटलतीफी की वजह से गोवंशों की मदद के लिए हमें खुद कदम आगे बढ़ाने पड़े हैं। हजारों की संख्या में लोग अपने अपने स्तर से इस टीम से जुड़े हुए हैं।
गजेंद्र - गोप्रेमी
अपने स्तर पर गोवंश के इलाज से खाने पीने का सभी इंतजाम करते हैं। अब तक 1000 से भी ज्यादा गोवंशों की जान बचा चुके हैं। गोवंशों की सेवा का काम लगातार ऐसे ही चलेगा।
राघव राजपूत - गोप्रेमी
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