रोहिणी कोर्ट शूटआउटः कोर्ट में बड़ी वारदात की पहले से थी आशंका, सतर्कता के बाद भी गोलीबारी
रोहिणी की अदालत में हुई गोलीबारी ने कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। सुरक्षा एजेंसियों को इस बात की पहले से खबर थी कि अदालत में बड़ी वारदात होने वाली है। इसके बाद भी घटना को रोका...
रोहिणी की अदालत में हुई गोलीबारी ने कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। सुरक्षा एजेंसियों को इस बात की पहले से खबर थी कि अदालत में बड़ी वारदात होने वाली है। इसके बाद भी घटना को रोका नहीं जा सका। हालांकि सुरक्षा पहले से पुख्ता होने के चलते हमलावरों को भागने या कहीं और गोलीबारी करने का मौका नहीं मिल सका। हमलावरों की गोली से पेशी पर आया बदमाश और पुलिस की गोली से दोनों हमलावर मारे गए हैं। अगर सुरक्षाकर्मी सतर्क नहीं होते तो जिस तरह से अदालत में गोलियां चल रही थीं, उससे कुछ भी हो सकता था।
बताया जाता है कि सुरक्षा एजेंसी को पहले से इस बात की भनक मिल चुकी थी कि यहां कुछ बड़ा होने वाला है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल से लेकर स्थानीय पुलिसकर्मी बड़ी संख्या में संबंधित अदालत के आसपास तैनात भी किये गए थे। अदालत के आस-पास के इलाके को पहले ही खाली करा लिया गया था। घटना के समय कोर्ट रूम में न्यायाधीश, अदालतकर्मी व तीन वकील जिनमें एक महिला वकील व सुरक्षाकर्मी ही मौजूद थे।
सुरक्षा एजेंसी को पेशी के दौरान राइवल गैंग के शूटर्स पर हमले की आशंका थी। इसे देखते हुए नॉर्दन रेंज सेल की टीम के अलावा दूसरी रेंज की स्पेशल सेल की टीम भी कोर्ट में थी। सुरक्षा एजेंसी को स्पेसिफिक इनपुट नही था कि कहां और कब हमला हो सकता है। हमलावर वकील की ड्रेस में कोर्ट के अंदर आकर हमला करेंगे, इसका अंदाजा सुरक्षा एजेंसी नहीं लगा सकी।
बताया जा रहा है कि मारे गए बदमाश गोगी का नाम सुनवाई सूची में पहले नंबर पर था। लेकिन सबसे बाद में उसे पेश किया गया। जैसे ही भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच गोगी को दोपहर एक बजे के करीब कोर्ट रुम में लाया गया। वकील के वेश में बैठे दो हमलावरों ने उस पर गोली चला दी। इसके जवाब में अदालत में पहले से मौजूद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के अधिकारियों ने दोनों हमलावरों पर फायरिंग की। सुरक्षा पहले से पुख्ता होने के चलते हमलावरों को भागने या कहीं और गोलीबारी करने का मौका नहीं मिल सका। हालांकि अफरातफरी और भागदौड़ में एक महिला वकील के पैर में चोट लगी है।
गोगी व उसके दो साथियों पर वर्ष 2011 में हत्या प्रयास का मुकदमा दर्ज किया गया था। इसी मामले में तीनों आरोपियों की पेशी थी। पहले गोगी के दो साथियों को पेश कर बाहर भेज दिया गया। आखिर में गोगी को अकेले पेश करने के लिए जैसे ही लाया गया, ताक में बैठे बदमाशों ने गोली चला दी।