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सुविधा चाहिए, पर सिस्टम के साथ; मालीवाल ने दिल्ली वालों की कौन सी परेशानी बता संसद में कही यह बात

  • AAP सांसद ने ई-रिक्शा की संख्या को सीमित करने, वाहन और चालक दोनों का लाइसेंसिंग करने, रूट और स्टैंड निर्धारित करने और अवैध चार्जिंग पॉइंट को बंद करने की मांग की।

Sourabh Jain लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्लीWed, 2 April 2025 05:44 PM
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सुविधा चाहिए, पर सिस्टम के साथ; मालीवाल ने दिल्ली वालों की कौन सी परेशानी बता संसद में कही यह बात

आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सदस्य स्वाति मालीवाल ने बुधवार को सदन में आम लोगों की समस्या से जुड़ा दिखने में छोटा, लेकिन एक बेहद अहम मुद्दा उठाया। उन्होंने शहर में बेतरतीब तरीके से बढ़ रहे ई-रिक्शा का मुद्दा उठाते हुए उनके लिए रेगुलेशन बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि ई-रिक्शा चालकों द्वारा रॉन्ग साइड ड्राइविंग, रेड लाइट तोड़ना, सड़कों पर पार्किंग, 8-10 सवारी बैठाना समेत हर तरह के यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और ऐसे में अब उनके लिए भी नियम बनाना बेहद जरूरी हो गया है। AAP सांसद ने ई-रिक्शा की संख्या को सीमित करने, वाहन और चालक दोनों का लाइसेंसिंग करने, रूट और स्टैंड निर्धारित करने और अवैध चार्जिंग पॉइंट को बंद करने की मांग की।

शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए मालीवाल ने कहा कि देश में ऑटो रिक्शा, टैक्सी एवं कैब के लिए नियम हैं लेकिन ई-रिक्शा के लिए ऐसे नियम नहीं होने की वजह से आज परिवहन का यह माध्यम अराजक स्थिति उत्पन्न कर रहा है। उन्होंने कहा कि एक ई-रिक्शा में जहां तीन से चार लोग बैठ सकते हैं, वहां 8 से 10 लोग बैठा दिए जाते हैं। ई-रिक्शा का स्ट्रक्चर ऐसा होता है कि अगर हल्का सा बैलेंस बिगड़ते ही पूरी की पूरी गाड़ी पलट जाती है।

ई-रिक्शा के मुद्दे को उठाते हुए मालीवाल ने राज्यसभा में कहा, 'पहले ई-रिक्शा एक किफायती और इको फ्रेंडली परिवहन का माध्य्म माना जाता था। लेकिन आज बिना निगरानी के चलते ये ज्यादातर दिल्ली और देश के अन्य शहरों में सड़कों पर अराजकता फैलाते नजर आते हैं। जहां ऑटोज और टैक्सीज को लेकर बहुत सख्त नियम हैं, वहीं ई-रिक्शा धड़ल्ले से बिना किसी नियंत्रण के, बिना किसी जवाबदेही के चले जा रहे हैं।'

आगे उन्होंने कहा, 'दिल्ली के किसी भी मेट्रो स्टेशन के बाहर देख लीजिए, दिल्ली के किसी भी मार्केट के बाहर देख लीजिए, सैकड़ों की संख्या में ई-रिक्शा सड़कों पर जाम लगाते दिख जाएंगे। ऐसा नहीं है कि सारे ई-रिक्शा चालक गलत हैं, पर सच यह है कि बहुत ओवरलोडिंग होती है। ये भी देखने को आता है बहुत सारे ई-रिक्शा ड्राइवर्स के पास ना तो कोई लाइसेंस है और ना ही उनकी किसी तरह की ट्रेनिंग हुई है।'

मालीवाल ने कहा, 'ज्यादातर ई-रिक्शा चालक रॉन्ग साइड पर चलाते हैं, ओवर स्पीडिंग करते हैं, रेड लाइट जंप करते हैं, यह सब आम होता जा रहा है। बताया जाता है कि दिल्ली में ही ढाई लाख से ज्यादा ई-रिक्शा चल रहे हैं, पर कितनों का रजिस्ट्रेशन है, कितनों के पास लाइसेंस है, किसी को नहीं पता।'

AAP सांसद ने आगे कहा कि 'राज्य सरकारों को चाहिए कि सबसे पहले ई-रिक्शा की संख्या को सीमित करे। ई-रिक्शा के वाहन और चालक दोनों का लाइसेंसिंग होना चाहिए। रूट निर्धारित होना चाहिए, स्टैंड निर्धारित होने चाहिए। जितने अवैध चार्जिंग पॉइंट चल रहे हैं ई-रिक्शा, सबको बंद करना चाहिए। सबसे जरूरी बात, अगर कोई नियम तोड़े तो उसके ऊपर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। केंद्र सरकार को चाहिए कि इस इश्यू पर राज्य सरकारों की जवाबदेही तय हो।'

अंत में मालीवाल ने कहा, 'हमें सुविधा चाहिए, लेकिन सिस्टम के साथ, हमें रफ्तार भी चाहिए, लेकिन जिम्मेदारी के साथ, और सबसे बड़ी बात.. हमें प्रगति भी चाहिए, लेकिन किसी की जिंदगी की कीमत पर नहीं।'