‘कोई चोट नहीं, केवल आपराधिक पृष्ठभूमि के चलते…’; दिल्ली कोर्ट से अमानतुल्लाह खान को अग्रिम जमानत
जज ने कहा कि किसी भी पुलिस अधिकारी को कोई चोट नहीं पहुंची है और आवेदक की कथित भूमिका को ध्यान में रखते हुए, मेरा मानना है कि केवल आपराधिक पृष्ठभूमि के आधार पर अग्रिम जमानत से इनकार नहीं किया जाना चाहिए।
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दिल्ली की एक अदालत ने आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक अमानतुल्ला खान को मंगलवार को अग्रिम जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि उन्होंने एक आरोपी को ‘पुलिस की गलत हिरासत’ से भागने में मदद की, लेकिन यह कथित आधिकारिक कर्तव्य निर्वहन में बाधा नहीं थी।
स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने कहा कि शाहवेज खान नामक व्यक्ति हत्या के प्रयास के मामले में पहले से ही अग्रिम जमानत पर है, जिसमें पुलिस उसे गिरफ्तार करने गई थी।
जज ने कहा, “किसी भी पुलिस अधिकारी को कोई चोट नहीं पहुंची है और आवेदक की कथित भूमिका को ध्यान में रखते हुए, मेरा मानना है कि केवल आपराधिक पृष्ठभूमि के आधार पर अग्रिम जमानत से इनकार नहीं किया जाना चाहिए।”
अदालत ने पाया कि शाहवेज को “लगातार गलत तरीके से बंधक बनाए जाने का खतरा था”, इसलिए उसे बीएनएस की धारा 35 (शरीर और संपत्ति की निजी रक्षा का अधिकार) के तहत संरक्षण दिया गया था।
अदालत ने कहा, "तर्क के लिए अगर खान के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सही मान भी लिया जाए, तो भी आरोपी शाहवेज खान द्वारा गलत तरीके से कैद से भागने में निजी बचाव के अधिकार का प्रयोग और आवेदक द्वारा इस अधिकार का प्रयोग करते हुए आरोपी शाहवेज खान की सहायता करना पुलिस टीम द्वारा कर्तव्य के तथाकथित आधिकारिक निर्वहन में बाधा उत्पन्न करने के समान नहीं है।"
दिल्ली पुलिस ने 10 फरवरी को घटना के संबंध में ओखला से 'आप' विधायक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस ने आरोप लगाया था कि अमानतुल्लाह खान ने भीड़ का नेतृत्व करते हुए हत्या के प्रयास के एक मामले में आरोपी एक घोषित अपराधी को हिरासत से भागने में मदद की थी।
पुलिस ने बताया कि कथित घटना तब हुई जब दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने शाहवेज को गिरफ्तार करने का प्रयास किया। हालांकि, अदालत ने अमानतुल्लाह खान को अग्रिम जमानत का हकदार माना और उन्हें 25,000 रुपये के बांड और इतनी ही राशि के एक जमानतदार पर रिहा कर दिया।
इन शर्तों पर मिली जमानत
जज ने अमानतुल्लाह खान को राहत देते हुए निर्देश दिया कि जब भी जांच अधिकारी (आईओ) द्वारा बुलाया जाए, वह जांच में शामिल हों और सहयोग करें, न्याय से भागें नहीं, सबूतों से छेड़छाड़ न करें, या अभियोजन पक्ष के किसी गवाह को धमकाएं या उससे संपर्क न करें। उन्हें यह भी आदेश दिया गया कि वह अदालत की अनुमति के बिना देश न छोड़ें और अगर वह अपना पता बदलते हैं तो तुरंत सूचित करें।
जज ने पाया कि अमातुल्लाह खान के खिलाफ कथित अपराध के लिए 7 साल से कम की सजा है और मामले में हिरासत में पूछताछ की कोई जरूरत नहीं है। पुलिस के इस तर्क के जवाब में कि अमातुल्लाह खान एक "आदतन अपराधी हैं, जो 26 आपराधिक मामलों में शामिल हैं", जज ने कहा कि आईओ की रिपोर्ट से पता चला है कि 16 मामलों में खान को या तो आरोपमुक्त कर दिया गया या बरी कर दिया गया, जबकि पांच मामलों की जांच चल रही है और बाकी में मुकदमा लंबित है।