एक बैंक ने कर्ज महंगा किया तो दूसरे ने जमा पर ब्याज घटाया
नई दिल्ली, येस बैंक ने 1 अप्रैल से सावधि जमा (FD) पर ब्याज दरें 0.25% घटा दी हैं। सामान्य ग्राहकों के लिए FD की ब्याज दरें 3.25% से 7.75% और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 3.75% से 8.25% तक हैं। जबकि इंडियन...

नई दिल्ली, एजेंसी। निजी क्षेत्र के येस बैंक ने अपने करोड़ों ग्राहकों को झटका दिया है। बैंक ने नए वित्त वर्ष के पहले दिन यानी पहली अप्रैल से सावधि जमा यानी एफडी पर ब्याज दर घटा दी है। बैंक ने अपनी कुछ अवधि की एफडी पर ब्याज दर 0.25 फीसदी घटाई है। फरवरी में आरबीआई के रेपो रेट घटाने के बाद अब ज्यादातर बैंक एफडी पर ब्याज घटा रहे हैं। एचडीएफसी बैंक ने भी एफडी पर ब्याज दर घटा दी है। अब आरबीआई अप्रैल में फिर से बैठक करने जा रहा है। महंगाई और अन्य मानकों को देखते हुए एक बार फिर रेपो रेट घटने की उम्मीद जताई जा रही है। यस बैंक ने इससे पहले 31 जनवरी 2025 को एफडी दरों में संशोधन किया था। अब सामान्य ग्राहकों के लिए FD की ब्याज दरें 3.25 फीसदी से 7.75 फीसदी तक हैं, जबकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए ये दरें 3.75 फीसदी से 8.25 फीसदी तक हैं। सबसे ज्यादा ब्याज दर 12 महीने की FD पर दी जा रही है।
इंडियन बैंक से कर्ज लेना हुआ महंगा:
इंडियन बैंक ने भी रेपो दर से जुड़े कर्ज पर देय ब्याज दर 0.10 प्रतिशत बढ़ाकर 9.05 प्रतिशत करने की घोषणा की है। इससे बैंक का खुदरा कर्ज महंगा होगा। संशोधित ब्याज दरें तीन अप्रैल, 2025 से प्रभावी होंगी। भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले महीने रेपो दर को 6.5 प्रतिशत से घटाकर 6.25 प्रतिशत किया था, इसके बावजूद ब्याज दर में वृद्धि की गई है। हालांकि, छह महीने से तीन साल की परिपक्वता अवधि के लिए ट्रेजरी बिल आधारित ब्याज दर को 0.05 प्रतिशत घटाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया गया है। चेन्नई के बैंक ने अपनी आधार दर को भी 0.05 प्रतिशत घटाकर 9.80 प्रतिशत कर दिया है।
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कटौती के बाद भी कर्ज सस्ता क्यों नहीं हुआ
फरवरी में आरबीआई की रेपो दर कटौती और बैंकों में रिकॉर्ड पैसे डालने के बाद भी कर्ज लेना सस्ता नहीं हुआ है। ऐसा इसलिए क्योंकि ब्याज दर इस बात पर निर्भर करती है कि बैंकों को पैसा जुटाने में कितना खर्च आ रहा है। रिजर्व बैंक ने बैंकों में खूब पैसा डाला है। लेकिन इसका असर बाजार पर ज्यादा नहीं दिख रहा है। इसकी वजह यह है कि साल के आखिर में पैसे की मांग बढ़ जाती है। साथ ही दुनिया भर में ब्याज दरें बढ़ रही हैं। बैंक सावधि जमा पर ब्याज दरें कम करने से हिचकिचा रहे हैं क्योंकि कर्ज की मांग जमा की तुलना में ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। बैंकों का कहना है कि रकम जुटाने की लागत वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में कम हो जाएगी। मतलब अप्रैल से जून के बीच कर्ज सस्ता हो सकता है।
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