भोपाल गैस त्रासदी: परीक्षण के लिए दस टन कचरा जलना शुरू
मध्य प्रदेश के पीथमपुर स्थित अपशिष्ट निपटान संयंत्र में यूनियन कार्बाइड कारखाने के 337 टन कचरे में से 10 टन अपशिष्ट जलाने की प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू हो गई। अधिकारियों का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण...
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इंदौर, एजेंसी। मध्य प्रदेश के पीथमपुर स्थित अपशिष्ट निपटान संयंत्र में यूनियन कार्बाइड कारखाने के 337 टन कचरे में से 10 टन अपशिष्ट को परीक्षण के तौर पर जलाने की प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू हो गई। अधिकारियों ने कहा कि इसकी प्रारंभिक रिपोर्ट सामान्य है और इसे इसे पूरा होने में 72 घंटे लगेंगे।
इंदौर संभाग के आयुक्त दीपक सिंह ने पीथमपुर के अपशिष्ट निपटान संयंत्र का दौरा किया। उन्होंने इसके बाद मीडिया को बताया, हमने संयंत्र में कचरा जलाने की प्रक्रिया दोपहर तीन बजे से शुरू की। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इसकी पूरी निगरानी कर कर रहा है। कचरा जलाने के परीक्षण के दौरान वायु गुणवत्ता और अन्य मानक फिलहाल सामान्य पाए गए हैं। उन्होंने पीथमपुर के लोगों से अपील की कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और यूनियन कार्बाइड कारखाने के कचरे के निपटारे के किसी भी विषय को लेकर वे जिला प्रशासन से सीधी बातचीत कर सकते हैं।
कोर्ट के आदेश पर परीक्षण शुरू
अधिकारियों ने बताया, वर्ष 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के लिए जिम्मेदार कारखाने के कचरे के निपटान के परीक्षण को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर अंजाम दिया जा रहा है। कचरे में मिट्टी, रिएक्टर अवशेष, सेविन, नेफ्थाल और अर्द्ध प्रसंस्कृत अवशेष शामिल हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि सेविन और नेफ्थाल का असर अब लगभग खत्म हो चुका है। कचरे में मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस और रेडियोधर्मी कण नहीं हैं।
भोपाल गैस त्रासदी
भोपाल में 2-3 दिसंबर 1984 की रात यूनियन कार्बाइड कारखाने से जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस रिसी। इसमें 5,479 लोगों की मौत हुई। हजारों लोग विकलांग हो गए। इसे दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदाओं में से एक माना जाता है।
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