सेहत के साथ संपत्ति पर गहरा प्रहार करेगी ग्लोबल वार्मिंग
-इंवायरमेंटल रिसर्च लेटर्स में प्रकाशित शोध में जलवायु परिवर्तन के आर्थिक प्रभावों को लेकर चेतावनी

सिडनी, एजेंसी। ग्लोबल वार्मिंग अब केवल पर्यावरण और सेहत का संकट नहीं रह गया है। यह व्यक्तिगत संपत्ति के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है। एक अध्ययन में सामने आया है कि यदि वैश्विक तापमान चार डिग्री सेल्सियस तक बढ़ता है, तो औसत व्यक्ति की संपत्ति में 40 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। यह पहले के अनुमानों से चार गुना अधिक है।
विज्ञान पत्रिका इंवायरमेंटल रिसर्च लेटर्स में प्रकाशित अध्ययन में यह दावा किया गया है। ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स के शोधार्थियों के अनुसार, अगर तापमान में महज दो डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होती है, तो प्रति व्यक्ति वैश्विक जीडीपी में 16 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। पहले के अनुमानों में यह कमी केवल 1.4 फीसदी बताई गई थी, जो इस नए अध्ययन की तुलना में बेहद कम है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके दूरगामी दुष्प्रभाव होंगे।
जेब पर असर की पांच बड़ी वजहें
1. कृषि उत्पादन में गिरावट : सूखा, बाढ़ और फसल नष्ट होने से खाद्य महंगाई बढ़ेगी।
2. उद्योगों पर असर : अत्यधिक गर्मी और आपदाओं से उत्पादन बाधित होगा, लागत बढ़ेगी।
3. ऊर्जा संकट : कूलिंग सिस्टम की मांग बढ़ने से बिजली महंगी होगी।
4. बढ़ता स्वास्थ्य खर्च : बीमारियों में इजाफा होगा, जिससे इलाज का खर्च बढ़ेगा।
5. बीमा और व्यापार लागत : प्राकृतिक आपदाओं से बीमा प्रीमियम और वैश्विक व्यापार महंगा होगा।
ठंडे देश भी नहीं बचेंगे
कुछ अनुमानों के अनुसार, कनाडा, रूस और उत्तरी यूरोप को जलवायु परिवर्तन से लाभ हो सकता है, लेकिन वैश्विक व्यापार व्यवस्था के कारण हर देश प्रभावित होगा।
तापमान का बढ़ना तय
अध्ययन चेतावनी देता है कि जलवायु लक्ष्यों के बावजूद, तापमान 2.1° डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है, जिससे आर्थिक स्थिरता और संपत्ति पर गंभीर असर पड़ेगा।
कोट:
जब तापमान अपने चरम पर पहुंचता है, तब इसका असली असर दिखता है। आर्थिक मॉडल को जलवायु परिवर्तन के चरम प्रभावों को ध्यान में रखकर दोबारा तैयार करना होगा। - एंडी पिटमैन, अध्ययन के सह-लेखक
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