जैन समुदाय की बड़ी जीत, विरोध के बाद केंद्र ने धर्मस्थल को पर्यटन स्थल में बदलने पर लगाई रोक
इसके अलावा, केंद्र सरकार ने गिरिडीह में जैन समुदाय के सबसे पवित्र स्थानों में से एक, पारसनाथ हिल्स में पर्यटन को बढ़ावा देने के मुद्दे की देखभाल के लिए एक समिति भी बनाई है।

विभिन्न शहरों में जैन समुदाय द्वारा जारी विरोध को देखते हुए, केंद्र ने गुरुवार को धार्मिक स्थल "श्री सम्मेद शिखरजी" को पर्यटन स्थल में बदलने के झारखंड सरकार के फैसले पर रोक लगा दी। केंद्र सरकार ने 'सम्मेद शिखरजी' से संबंधित पारसनाथ पहाड़ी पर सभी प्रकार की पर्यटन गतिविधियों पर रोक लगा दी और झारखंड सरकार को इसकी शुचिता अक्षुण्ण रखने के लिए तत्काल सभी जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया।
इसके अलावा, केंद्र सरकार ने गिरिडीह में जैन समुदाय के सबसे पवित्र स्थानों में से एक, पारसनाथ हिल्स में पर्यटन को बढ़ावा देने के मुद्दे की देखभाल के लिए एक समिति भी बनाई है। केंद्र ने झारखंड सरकार को शराब बेचने और सेवन करने या धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थानों को अपवित्र करने सहित वर्जित व्यवहारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है।
यह घटनाक्रम इस मुद्दे पर दिन के पूर्वार्द्ध में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की जैन समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात के बाद सामने आया है। यादव ने आश्वासन दिया था कि सरकार सम्मेद शिखरजी पर्वत क्षेत्र की पवित्रता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, जो न केवल जैन समुदाय, बल्कि पूरे देश के लोगों के लिए एक पवित्र स्थल है।
केंद्र का यह फैसला जैन समुदाय के लिए बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है, जो दिल्ली, मुंबई, भोपाल, अहमदाबाद और सूरत की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वे इस स्थान को पर्यटन स्थल घोषित करने वाली सभी अधिसूचनाओं को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। बेहद कम आबादी वाले अल्पसंख्यक समुदाय को डर है कि इससे क्षेत्र में शराब और मांसाहारी भोजन की खपत हो सकती है, जिससे उनकी भावनाएं आहत होंगी।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने अगस्त 2019 में पारसनाथ अभयारण्य के आसपास एक पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र अधिसूचित किया था और राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसरण में पर्यावरण-पर्यटन गतिविधियों को मंजूरी दी थी। मंत्रालय ने झारखंड सरकार के वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को एक कार्यालय ज्ञापन जारी किया, जिसमें कहा गया है कि "पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र इस क्षेत्र में अधिसूचना के खंड तीन के प्रावधानों का कार्यान्वयन तत्काल रोका जाता है, जिसमें अन्य सभी पर्यटन और पर्यावरण-पर्यटन गतिविधियां शामिल हैं।"
राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए तुरंत सभी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया जाता है। इस बीच, विभिन्न जैन समूहों के प्रतिनिधियों ने इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद ज्ञापित करने को लेकर एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया और कहा कि इससे यह सुनिश्चित होगा कि उनके सबसे पवित्र तीर्थ स्थल की पवित्रता बनी रहेगी।
उन्होंने एक बयान में कहा, "हमारी चिंताओं को दूर कर दिया गया है और इस मुद्दे को हमारी संतुष्टि के अनुरूप सुलझा लिया गया है।" पर्यावरण मंत्रालय ने कहा कि केंद्र सरकार सम्मेद शिखरजी पर्वत क्षेत्र की पवित्रता और "जैन समुदाय के साथ-साथ राष्ट्र के लिए इसके महत्व को पहचानती है; और इसे बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराती है।"
केंद्र सरकार ने कहा कि राज्य सरकार को भी पारसनाथ पहाड़ी पर शराब और मांसाहारी खाद्य पदार्थों की बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध को सख्ती से लागू करना चाहिए। इससे पहले, केंद्रीय पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डी ने बृहस्पतिवार को कहा था कि झारखंड में अपने एक पवित्र स्थल की सुरक्षा की मांग कर रहे जैन समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।
गिरिडीह जिले में पारसनाथ पहाड़ी स्थित श्री सम्मेद शिखर जी, रांची से लगभग 160 किलोमीटर दूर राज्य की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित है। यह जैन समुदाय के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है, जिसमें दिगंबर और श्वेतांबर दोनों संप्रदाय शामिल हैं, क्योंकि 24 जैन तीर्थंकरों में से 20 ने इस स्थान पर मोक्ष प्राप्त किया था।
जैन समुदाय अपनी इस मांग पर अड़ा हुआ है कि पारसनाथ पहाड़ी को पर्यटन स्थल घोषित नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि उसे आशंका है कि ऐसा होने से वहां पर होटल, बार और रेस्तरां बन जाएंगे जो वहां की पवित्रता को नष्ट कर देंगे। जैन समुदाय के सदस्यों ने 2019 की अधिसूचना को वापस लेने की मांग को लेकर मंगलवार को राज्य की राजधानी स्थित राजभवन तक मार्च किया था। झारखंड सरकार के फैसले के खिलाफ उपवास व्रत कर रहे जैन मुनि सुज्ञेयसागर महाराज (72) का मंगलवार को जयपुर में निधन हो गया। सुज्ञेयसागर महाराज ने 25 दिसंबर से कुछ नहीं खाया था।