मणिपुर मामले में संसद में नहीं गली विपक्ष की दाल? राष्ट्रपति से मुलाकात कर की दखल देने की मांग
मणिपुर के मुद्दे पर सत्र के शुरुआत से ही प्रधानमंत्री मोदी का जवाब मांग रहे विपक्षी सांसद अब राष्ट्रपति से मिले हैं। विपक्षी सांसदों ने इस मामले में राज्यसभा से बुधवार को वॉकआउट कर दिया।

संसद में सत्र के शुरू होने के बाद से ही मणिपुर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री से जवाब मांग रहे विपक्षी दलों ने बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति से मणिपुर के मामले में दखल देने की मांग की है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्षी दलों की ओर से राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगा था। विपक्षी दलों ने दावा किया कि भाजपा शासित पूर्वोत्तर राज्य में हिंसा लगातार जारी है।
विपक्षी गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस (INDIA) के कुछ सांसदों ने 29-30 जुलाई को मणिपुर का दौरा किया था। वे राष्ट्रपति से मुलाकात करने वाले विपक्षी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे। विपक्ष मणिपुर हिंसा पर संसद में नियम 267 के तहत चर्चा के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बयान देने की मांग कर रहा है जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन मणिपुर पर एक अल्पकालिक चर्चा चाहता है जिस पर जवाब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह देंगे।
पी चिदंबरम का केंद्र पर हमला
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने केंद्र सरकार पर हिंसाग्रस्त मणिपुर में स्थिति संभालने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए बुधवार को कहा कि मोदी सरकार ने ''संवैधानिक जिम्मेदारी का इंजन बंद कर दिया है तथा इसकी चाबी फेंक दी है।'' उनकी यह टिप्पणी तब आयी है जब एक दिन पहले उच्चतम न्यायालय ने कहा कि मणिपुर में कानून और व्यवस्था तथा संवैधानिक तंत्र पूरी तरह ढह गया है।
चिदंबरम ने ट्वीट किया, ''मणिपुर सरकार पर उच्चतम न्यायालय द्वारा किये गये अभ्यारोपण को दिल्ली में पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) तथा इंफाल में सीएमओ (मुख्यमंत्री कार्यालय) तक पहुंचने में कितना समय और लगेगा?'' पूर्व गृह मंत्री ने कहा, ''अगर मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह में संवैधानिक नैतिकता की थोड़ी भी समझ है तो उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। राजधर्म का पालन करने वाले ही राजधर्म की बात कर सकते हैं।''
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पुलिस जीप के उस चालक की तरह है जिन्होंने यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं से कहा कि ''चाबी नहीं है।'' चिदंबरम ने कहा, ''केंद्र सरकार ने संवैधानिक जिम्मेदारी (अनुच्छेद 355 और 356) का इंजन बंद कर चाबी फेंक दी है।''
विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा से किया वॉकआउट
मणिपुर मुद्दे पर चर्चा को लेकर अपने नोटिस के स्वीकार नहीं किए जाने पर बुधवार को विपक्षी सदस्यों ने राज्यसभा से वॉकआउट कर दिया। विपक्षी सदस्यों ने सूचीबद्ध कामकाज को स्थगित कर मणिपुर मुद्दे पर चर्चा शुरू करने के लिए नोटिस दिए थे। उच्च सदन की सुबह बैठक शुरू होने पर सभापति जगदीप धनखड़ ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। इसके बाद उन्होंने कहा कि उन्हें मणिपुर की स्थिति पर चर्चा की मांग के लिए नियम 267 के तहत 58 नोटिस मिले हैं। सभापति ने कहा कि मणिपुर मुद्दे पर चर्चा के लिए उन्होंने पहले ही व्यवस्था दी थी और सरकार भी चर्चा के लिए तैयार थी।
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