LMG खरीदना चाहता था मुख्तार? DSP ने लगा दिया था POTA; लेकिन क्यों देना पड़ा इस्तीफा?
गाजीपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने बाहुबली मुख्तार अंसारी को गैंगेस्टर एक्ट में दस साल जेल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही पांच लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। डीएसपी शैलेंद्र सिंह ने यह बात कही है।

गाजीपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने बाहुबली मुख्तार अंसारी को गैंगेस्टर एक्ट में दस साल जेल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही पांच लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। मुख्तार के खिलाफ भाजपा विधायक कृष्णानंद राय और नंदकिशोर गुप्ता रुंगटा की हत्या के मामले में गैंगस्टर का मुकदमा दर्ज है। मामले पर फैसला आने के बाद पूर्व डीएसपी शैलेंद्र सिंह एक बार फिर चर्चा में आ गए। शैलेंद्र सिंह ने ही सबसे पहले मुख्तार को एलएमजी की खरीदारी में पकड़ा था।
पहले सब दे रहे थे बधाई
दो साल पहले एक इंटरव्यू में शैलेंद्र सिंह ने इस मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर बात की थी। आज तक से बातचीत में पूर्व डीएसपी शैलेंद्र सिंह ने कहा था कि सरकार के परमिशन से ही रिकवरी की थी। फोन की जो रिकॉर्डिंग होती है, उसे बिना शासन की अनुमति के नहीं सुन सकते आप। शासन की अनुमति से इसे सुना जा रहा था। शैलेंद्र के मुताबिक जब रिकवरी हुई तो सबने मुझे बधाई थी। लेकिन तब लोगों को मालूम नहीं था कि पोटा लगा हुआ है। लोग सिंपल आर्म्स ऐक्ट में रिकवरी समझ रहे थे। आर्म्स ऐक्ट में जिसके पास हथियार रिकवर होता है, वही दोषी होता है। ऐसे में मुख्तार बच जा रहे थे। उन्होंने बताया कि लेकिन शाम तक शासन और सरकार में बैठे लोगों को पता चला कि पोटा लग गया है और पोटा में जो बात करता है वह भी दोषी हो जाता है। ऐसे में इस मामले में मुख्तार भी लपेटे में आ रहे थे।
फिर दबाव बनाने लगी सरकार
शैलेंद्र सिंह बताते हैं कि इसके बाद सरकार द्वारा दबाव बनाया जाने लगा। कहा गया कि आप इसे तत्काल वापस ले लीजिए। हमने कहा कि सर एफआईआर दर्ज हो गई है, कोई वापस कैसे ले सकता है? तो फिर बात हुई और लोगों ने कहा कि ठीक है, वापस नहीं हो सकता तो अब इसका नाम मत लीजिए आप। जब दूसरा इन्वेस्टिगेशन अफसर जांच करेगा तो नाम मत लीजिएगा मुख्तार का। हमने कहा, सर मैंने वादी बनके उसका नाम लिखाया है, एफआईआर में दर्ज है। मैं अपने ही बयान से पलट जाऊंगा? यह संभव नहीं है।
और होने लगी प्रताड़ना
इसके बाद तमाम बातें हुईं और एसटीएफ का वहां पर क्लोज कर दिया गया। मुझे लखनऊ बुला लिया गया। तमाम तरह से प्रताड़ना होने लगी। अधिकारी भी कहने लगे कि आपसे बहुत नाराज हैं मुलायम सिंह। इस पर मैंने कहा कि आप नंबर दे दीजिए। अगर वह बात करना चाहते हैं तो मैं बात कर लेता हूं। मैं उन्हें चीजें एक्सप्लेन कर दूंगा। इस पर कहा गया कि आपका नाम लेते ही वह चिढ़ जा रहे हैं आपको जरूरत नहीं है बात करने की।
नहीं स्वीकार हुआ पहला इस्तीफा
शैलेंद्र सिंह आगे बताते हैं कि इसके बाद जब देखा कि चीजें बहुत ज्यादा खराब हो गईं तो मैंने 11 फरवरी को पहला इस्तीफा भेजा था। इसमें मैंने लिखा कि अब राजनीति का इतना अपराधीकरण हो गया है कि अपराधी बैठकर डिसीजन ले रहे हैं कि हम लोगों को क्या करना है। इससे अच्छा है कि हम अपनी सर्विस ही छोड़ दें। शैलेंद्र सिंह के मुताबिक इस पर मुलायम सिंह कहने लगे कि यह जानबूझकर कंडिशनल रेजिग्नेशन भेज रहा है ताकि स्वीकार न हो। साथ ही यह भी बातें हुईं कि हाइलाइट होने के लिए और राजनीति करने के लिए यह सब कर रहा हूं। फिर मैंने दस दिन बाद दूसरा इस्तीफा भी भेज दिया।
मुख्तार-एलएमजी में कनेक्शन
आखिर मुख्तार और लाइट मशीनगन की खरीदारी के बीच क्या कनेक्शन था? इसको लेकर शैलेंद्र सिंह बताते हैं साल 2003 में लखनऊ में कृष्णानंद और मुख्तार के बीच क्रॉस फायरिंग हुई थी। इसके बाद हम लोगों को बोला गया कि इसको वॉच कीजिए, वरना कोई बड़ी घटना हो जाएगी। शैलेंद्र बताते हैं कि वॉच करने के दौरान ही मैंने उन दोनों को पकड़ा और रिकॉर्डिंग में मुख्तार अपने आदमी के जरिए सेना का लाइट मशीनगन चुराकर भागने वाले बाबूलाल से बातचीत चल रही थी। इनके बीच करीब एक करोड़ में सौदा पक्का हो गया था।
इसलिए था खरीदना पर जोर
शैलेंद्र सिंह बताते हैं एलएमजी खरीदने पर मुख्तार के जोर के पीछे की सबसे अहम वजह कृष्णानंद ही थे। मुख्तार का कहना था कि कृष्णानंद की गाड़ी साधारण रायफल के लिए बुलेट प्रूफ है, लेकिन एलएमजी उसको भेद देगी और वह कृष्णानंद को मार देंगे। इसलिए मुख्तार एलएमजी खरीदने को लेकर उत्सुक थे। शैलेंद्र के मुताबिक यह सारी बातें रिकॉर्डिंग में हैं। इसके बाद इसे केस डायरी में भी दर्ज किया गया। लेकिन बाद में जब मुलायम ने पोटा हटा दिया तो मुख्तार का यह बयान दर्ज कराया गया कि हम लोग तो उसे पकड़वाने के लिए कह रहे थे। जबकि जिस तरह से बातें हो रही थीं, उसमें सीधा-सीधा कहा जा रहा था कि हमें किसी भी कीमत पर चाहिए।
मुलायम थे बहुत ज्यादा नाराज
शैलेंद्र सिंह के मुताबिक मुख्तार के इस मामले को लेकर मुलायम काफी ज्यादा नाराज थे। इसके चलते बनारस जोन के आईजी का ट्रांसफर हुआ, डीआईजी रेंज का ट्रांसफर हुआ। एसएसपी एसटीएफ का ट्रांसफर भी रात में ही हो गया। वह बताते हैं कि 25 की रात मैंने पकड़ा, 26 की रात यह हाइलाइट हुआ और 27 की रात में ही इन लोगों को हटा दिया गया। सरकार पूरी तरह से इस केस को खत्म करने पर आमादा थी। वह बताते हैं कि इसके बाद में दूसरे केसेज में मुझे जेल भेजा गया। अभी तक इस मामले से जुड़े लोगों को परेशान किया जा रहा है।