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गांधी जी के करीबी थे दादा, नाना ने देश के लिए दिया बलिदान; ऐसा है मुख्तार अंसारी का रसूखदार खानदान

मुख्तार अंसारी के दादा जी स्वतंत्रता सेनानी थे और गांधी जी के करीबी माने जाते थे। वह 1926-27 में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे। इसके अलावा मुख्तार अंसारी के दादा ब्रिगेडियर थे।

Ankit Ojha लाइव हिंदुस्तान, नई दिल्लीMon, 24 April 2023 08:16 AM
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 गांधी जी के करीबी थे दादा, नाना ने देश के लिए दिया बलिदान; ऐसा है मुख्तार अंसारी का रसूखदार खानदान

मऊ से विधायक और माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के नाम से हर कोई परिचित है। मुख्तार इस समय पंजाब की जेल में है। यूपी की बांदा जेल में उसे कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है। माफिया मुख्तार अंसारी और उसके परिवार पर कई मुकदमे दर्ज हैं। मुख्तार के अलावा उसका बेटा और बहू भी जेल में हैं। मुख्तार का छोटा बेटे उमर पर भी कई केस दर्ज हैं। मुख्तार के भाई अफजाल पर भी आधा दर्जन मुकदमे दर्ज हैं।  मुख्तार का खानदान काफी रसूखदार रह चुका है।  मुख्तार में अपराध की दुनिया में कदम रख दिया लेकिन उसका खानदान ऐसा नहीं था। 

बता दें कि मुख्तार की पत्नी भी यूपी पुलिस की लिस्ट में मोस्ट वॉन्टेड हैं। इसके अलावा अंसारी पर 60 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। 2019 में वह पंजाब की जेल में था लेकिन उसने मोहाली के एक कारोबारी को उगाही के लिए फोन किया था। इसके बाद उसे रोपड़ जेल से बांदा जेल में शिफ्ट कर दिया गया। 

कौन थे मुख्तार के दादा और नाना?
मुख्तार अंसारी का परिवार काफी रसूखदार रहा है। मुख्तार के दादा जिनका नाम मुख्तार ही था, आजादी से पहले कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। इसके अलावा वह गांधी जी के करीबी माने जाते थे। मऊ में उनके परिवार की अलग इज्जत थी। वहीं मुख्तार अंसारी के नाना मोहम्मद उस्मान सेना में  ब्रिगेडियर थे। उनके पराक्रम के लिए उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। 1947 में नैशेरा की लड़ाई उन्होंने लड़ी। इसी लड़ाई में उनकी शहादत हो गई थी। 

मुख्तार के पिता की भी थी साफ छवि
मुख्तर अंसारी के पिता सुब्हानुल्लाह अंसारी भी साफ छवि के व्यक्ति थे। वह कम्युनिस्ट पार्टी में थे और 1971 में पालिका चुनाव में निर्विरोध जीते थे। मुख्तार अंसारी बचपन में क्रिकेट का शौकीन था। राजनीति में आने के बाद मुख्तार अंसारी ने अपने खानदान का अनुसरण नहीं किया बल्कि अपराध का रास्ता चुन लिया। मुख्तार अंसारी 1996 में पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचा था। इसके बाद लगातार 2002, 2007, 2012, 2017 में भी जीत दर्ज की। पांच में से तीन चुनाव उसने  जेल में ही रहकर जीत लिए। 

1988 में मुख्तार पर पहला मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद 2005 में भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की गाड़ी पर 400 गोलियां चलवाई गईं। विधायक समेत सात लोग इस घटना में मारे गए थे। इस मामले में मुख्तार गिरफ्तार हुआ लेकिन गवाहों के मुकरने की वजह से बरी कर दिया गया। सितंबर 2022 में पहली बार जेलर को धमकी देने के मामले में उसे सात साल की सजा सुनाई गई। मऊ में दंगा भड़काने के मामले में उसने पुलिस के सामने सरेंडर किया था और इसके बाद से जेल में ही है। बता दें कि उपराष्ट्रपति रहे हामिद अंसारी मुख्तार अंसारी के रिश्ते में चाचा लगते हैं।

मुखतार का बेटा अब्बास अंसारी शॉट गन शूटिंग का अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी था और राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल भी जीत चुका है। अब्बास ने भी 2022 में चुनाव जीता है लेकिन फिलहाल वह मनी लॉन्ड्रिंग के मा्मले में जेल में है।