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जम्मू-कश्मीर में वोटर लिस्ट पर सियासत तेज, NC ने बुलाई सर्वदलीय बैठक तो BJP भी साध रही रणनीति

भाजपा नेता ने कहा, 'वे जम्मू-कश्मीर में एक तरह का अपवाद चाहते हैं, जो कि स्वीकार्य नहीं है। जम्मू-कश्मीर के लोगों ने बिना किसी अपवाद या आरक्षण के फैसले (5 अगस्त 2019 के) को स्वीकार किया है।'

Niteesh Kumar पीटीआई, नई दिल्लीMon, 22 Aug 2022 12:24 PM
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जम्मू-कश्मीर में वोटर लिस्ट पर सियासत तेज, NC ने बुलाई सर्वदलीय बैठक तो BJP भी साध रही रणनीति

भाजपा ने जम्मू-कश्मीर की संशोधित मतदाता सूची में गैर स्थानीय मतदाताओं को शामिल करने के मुद्दे पर अपने नेताओं की बैठक बुलाई है। यह मीटिंग नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के खिलाफ जवाबी रणनीति तैयार करने के लिए होगी। पार्टी के एक प्रवक्ता ने बताया कि भाजपा की जम्मू-कश्मीर की इकाई के अध्यक्ष रविंद्र रैना ने पार्टी मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं की एक बैठक बुलाई है।

दरअसल, केंद्र शासित प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी हिरदेश कुमार ने संशोधित मतदाता सूची में जम्मू-कश्मीर में रहने वाले 'गैर-स्थानीय मतदाताओं को शामिल करने' की बात कही है। प्रशासन ने शनिवार को कहा था कि मतदाता सूची के संक्षिप्त संशोधन के बाद 25 लाख से अधिक मतदाताओं के शामिल होने की खबरों में निहित स्वार्थों के चलते तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।

भाजपा ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी का किया बचाव 
भाजपा ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी का बचाव करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी कानूनी और संवैधानिक रूप से सही है। बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सुनील सेठी ने कहा कि कानून के तहत, कोई भी व्यक्ति जो भारत का नागरिक है और किसी भी कानून से प्रतिबंधित नहीं है, वह किसी भी क्षेत्र, राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में मतदाता बनने का विकल्प चुन सकता है, जहां वह सामान्यत: रहता है।

'विपक्ष मामले को गलत तरीके से कर रहा पेश' 
सेठी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में भी इसे ही लागू किया गया है। धारा 370 के अधिकतर प्रावधान खत्म किए जाने के बाद एक भारत एक कानून होना चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर मामले को गलत तरह से पेश करने का आरोप लगाया। सेठी ने जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा समाप्त किए जाने का जिक्र करते हुए कहा, 'वे केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में एक तरह का अपवाद चाहते हैं, जो कि स्वीकार्य नहीं है। जम्मू-कश्मीर के लोगों ने बिना किसी अपवाद या आरक्षण के फैसले (5 अगस्त 2019 के) को स्वीकार किया है। राजनीतिक दलों को यह समझना होगा और इसे स्वीकार करना होगा।'