भारत जोड़ो यात्रा 2.0 की तैयारी में राहुल गांधी, इस बार वाहन भी होंगे यूज; विधानसभा चुनावों के बाद शुरुआत?
भारत जोड़ो यात्रा का पहला चरण पिछले साल 7 सितंबर को तमिलनाडु के कन्याकुमारी से शुरू हुआ था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में इस यात्रा के जरिए करीब 4,080 किलोमीटर की दूरी तय की गई।

कांग्रेस भारत जोड़ो यात्रा 2.0 की तैयारी में है। पहली यात्रा की सफलता को देखते हुए कांग्रेस दोबारा इसे शुरू करने पर विचार कर रही है। सूत्रों के हवाले से बताया गया कि आगामी दिसंबर से फरवरी के बीच दूसरी भारत जोड़ो यात्रा हो सकती है। कहा जा रहा है कि इन तीन महीनों में इस यात्रा के कभी भी शुरू होने के आसार हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व में होने वाली यह यात्रा इस बार हाइब्रिड मोड में होगी, जिसमें पैदल चलने के साथ ही गाड़ियों का भी इस्तेमाल किया जाएगा। बीते अगस्त में महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नाना पटोले ने भारत जोड़ो यात्रा को लेकर बड़ी जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि राहुल गांधी गुजरात से मेघालय तक की पदयात्रा करने वाले हैं।
कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने इसी साल सितंबर में भारत जोड़ो यात्रा 2.0 को लेकर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि फिलहाल पार्टी भारत जोड़ो यात्रा के दूसरे चरण की योजना बना रही है। ऐसे में कांग्रेस की ओर से इस यात्रा को लेकर अभी तक विस्तार से जानकारी नहीं दी गई है। माना जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान फिलहाल यह तय करने में जुटा है कि इस बार की पदयात्रा किन राज्यों से होकर गुजरेगी। 2024 में आम चुनाव होने हैं। ऐसे में लोकसभा इलेक्शन से पहले राहुल गांधी के नेतृत्व में इस तरह की यात्रा बेहद अहम हो जाती है।
126 दिनों तक चली पहली भारत जोड़ो यात्रा
मालूम हो कि भारत जोड़ो यात्रा का पहला चरण पिछले साल 7 सितंबर को तमिलनाडु के कन्याकुमारी से शुरू हुआ था। राहुल गांधी के नेतृत्व में इस यात्रा के जरिए करीब 4,080 किलोमीटर की दूरी तय की गई। यह पदयात्रा जनवरी 2023 में जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में समाप्त हुई। कुल 126 दिनों तक यह यात्रा चली जिसमें 12 राज्यों के 75 जिले तय किए गए। इनमें तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, यूपी, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर शामिल हैं। राहुल गांधी कहते हैं कि भारत जोड़ा यात्रा का मकसदद भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ देश को एकजुट करना है। उन्होंने इसे बेरोजगारी और असमानता जैसे अन्य सामाजिक-आर्थिक मुद्दों को समझने व हल निकालने में अहम बताया था।
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