'भूख हड़ताल के बाद हुई छात्र की मौत', अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी पर छात्रों मे लगाए आरोप
एपीयू के छात्र कॉलेज द्वारा लगाए गए 8,500 रुपये प्रति सेमेस्टर के शटल शुल्क का विरोध कर रहे हैं और पूरी तरह से छूट की मांग कर रहे हैं। इस विरोध को दस दिन से ज्यादा समय हो गया है।

अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी (एपीयू) में एक छात्र की मौत से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मृतक छात्र के साथियों ने दावा किया गया है कि भूख हड़ताल में भाग लेने के कुछ दिनों बाद उसकी मृत्यु हो गई। एमए डेवलपमेंट फर्स्ट इयर के छात्र 26 वर्षीय अभिजीत शिंदे कॉलेज के उत्सव में भाग लेने के दौरान गिर गए और शुक्रवार को कार्डियक अरेस्ट से उनकी मृत्यु हो गई। पोस्ट ग्रेजुएशन के एक छात्र और शिंदे के दोस्त ने कहा कि उन्होंने गुरुवार को भूख हड़ताल में हिस्सा लिया था। छात्र ने कहा, “वह 24 घंटे के लिए भूख हड़ताल पर था। हम नहीं जानते थे कि उपवास तोड़ने का कोई उचित तरीका होता है। हमें उसकी मौत के बाद ही पता चला।”
एपीयू के छात्र कॉलेज द्वारा लगाए गए 8,500 रुपये प्रति सेमेस्टर के शटल शुल्क का विरोध कर रहे हैं और पूरी तरह से छूट की मांग कर रहे हैं। इस विरोध को दस दिन से ज्यादा समय हो गया है। छात्रों ने आरोप लगाया कि एपीयू उन्हें लगभग 2.5 किलोमीटर दूर स्थित उनके केजीए छात्रावास से कैंपस तक लाने और ले जाने के लिए अनिवार्य शटल शुल्क का भुगतान करने के लिए मजबूर कर रहा है। उन्होंने कहा कि मैनेजमेंट उन्हें उस दौरान इस फीस के बारे में नहीं बताया था जब वे एडमिशन ले रहे थे। अब प्रशासन ने उनके मुद्दों को सुनने से इनकार कर दिया।
एक छात्र के मुताबिक, शिंदे इस विरोध प्रदर्शन के 10वें दिन से अनशन पर था और उसने गुरुवार को ही अनशन तोड़ा था। छात्र ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय परिसर के अंदर बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं की कमी है और प्रदर्शनकारी छात्रों को धमकाने की कोशिश की गई। छात्र ने कहा, "कॉलेज के पास आपात स्थिति के लिए कोई चिकित्सा सहायता तैयार नहीं है। विश्वविद्यालय प्रबंधन केवल यह कहकर प्रतिष्ठा बचाने की कोशिश कर रहा है कि वह विरोध का हिस्सा नहीं था।"
विवाद पर क्या बोला मैनेजमेंट
विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपों से इनकार किया है। विश्वविद्यालय प्रवक्ता ने कहा कि विश्वविद्यालय में चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध थीं और छात्रों के आरोपों का खंडन किया कि कोई चिकित्सा सहायता प्रदान नहीं की गई थी। विश्वविद्यालय ने यह भी दावा किया कि मृतक भूख हड़ताल का हिस्सा नहीं था।
उन्होंने कहा कि छात्र की दुर्भाग्यपूर्ण मौत तब हुई वह उत्सव के उद्घाटन समारोह में परफॉर्म (अन्य छात्रों के साथ डांस) कर रहा था। प्रवक्ता ने कहा कि वह (छात्र) 22 फरवरी की शाम को ही 'धरना' छोड़ चुका था। जिसका अर्थ है कि 23 फरवरी और 24 फरवरी को वह छात्रों के एक छोटे समूह द्वारा किए जा रहे विरोध में शामिल नहीं हुआ था।
प्रवक्ता ने कहा कि जब कार्यक्रम में परफॉर्म करते समय छात्र गिर गया, तो कैंपस के डॉक्टर ने तुरंत उसका इलाज किया और उसकी नब्ज नहीं मिली। छात्र को एंबुलेंस में तुरंत नजदीकी अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। उसे एंबुलेंस में कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) और ऑक्सीजन दी गई। अस्पताल के डॉक्टरों ने भी उसे रिवाइव करने की कोशिश की, लेकिन उसका हार्ट सिग्नल नहीं मिला। इसलिए, अस्पताल आने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया।
उन्होंने विश्वविद्यालय में बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं की कमी और छात्रों को डराने धमकाने के आरोपों को भी खारिज किया है। प्रवक्ता ने कहा, "यह सरासर झूठ है। विश्वविद्यालय के परिसर में पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं और प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मचारी हैं। इस मामले में एक डॉक्टर मौके पर मौजूद थे। दुर्भाग्य से, तत्काल चिकित्सा ध्यान देने के बावजूद छात्र को बचाया नहीं जा सका।"
उन्होंने कहा, "विरोध में शामिल कुछ छात्रों ने डराने-धमकाने वाला व्यवहार अपनाया। छात्र संघ को सूचित किया गया है कि इस तरह का व्यवहार अस्वीकार्य है और उचित कार्रवाई की जाएगी।" उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में शामिल होने से पहले (मई 2022 में) सभी छात्रों को स्पष्ट रूप से सूचित कर दिया गया था कि उन्हें शटल शुल्क का भुगतान करना होगा।