आंध्र में गठबंधन के फेर में फंसी भाजपा, दो गुटों में बंट गए पार्टी नेता
आंध्र प्रदेश में टीडीपी और जनसेना पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर भाजपा असमंजस में है। पार्टी के नेताओं में कुछ गठबंधन के पक्ष में हैं तो कुछ विपक्ष में।

आंध्र प्रदेश में भाजपा के सामने असमंजस की स्थिति बन गई है। बीजेपी अब तक फैसला नहीं कर पाई है कि उसे टी़डीपी के साथ गठबंधन करना चाहिए या नहीं। वहीं टीडीपी ने पवन कल्याण की जनसेना पार्टी के साथ गठबंधन कर लिया है। आने वाले विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में दोनों पार्टियां मिलकर चुनाव लड़ेंगी। विजयवाड़ा में गुरुवार को हुई बीजेपी सेंट्रल कमेटी की बैठक में पार्टी के नेताओं ने गठबंधन को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रिया दी। कई लोग गठबंधन के पक्ष में थे तो कई विपक्ष में भी थे।
भाजपा पहले टीडीपी के साथ भी गठबंधन में रह चुकी है। हालांकि 2018 में टीडीपी एनडीए से अलग हो गई थी। टीडीपी का कहना था कि नरेंद्र मोदी की सरकार में आंध्र प्रदेश के साथ भेदभाव हुआ है। इसी साल सितंबर में पवन कल्याण ने ऐलान कर दिया था कि टीडीपी और जन सेना पार्टी आने वाले चुनाव मिलकर लड़ेंगी। उन्होंने भाजपा से भी कहा था कि गठबंधन में शामिल होने को लेकर जल्द फैसला कर लें।
अब चुनाव में दो महीने के लगभग समय बचा है। टीडीपी और जन सेना पार्टी सीट शेयरिंग को लेकर भी बात कर रही हैं। ऐसे में भाजपा पर भी दबाव है कि वह गठबंधन को लेकर जल्द फैसला करे। गुरुवार को जनसेना पार्टी के पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी के चेयरमैन नांदेंदला मनोहर ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दग्गुबाती पुरांदेश्वरी से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा था कि गठबंधन को लेकर जल्द से जल्द फैसला किया जाए। उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव शिव प्रकाश से भी मुलाकात की और कई मुद्दों को लेकर चर्चा की।
पार्टी के एक नेता ने बताया कि शिव प्रकाश ने पार्टी के नेताओं से गठबंधन में शामिल होने को लेकर राय मांगी ती। उन्होंने कहा, पार्टी के नेताओं के विचार मिले जुले थे। कुछ लोगों ने इस विचार का विरोध किया तो कुछ लोगों ने समर्थन किया। कुछ नेताओं का कहना है कि टीडीपी ने 2018 में गठबंधन धर्म का उल्लंघन किया था। भाजपा के कई नेताओं को लगता है कि क्षेत्रीय पार्टियों के साथ गठबंधन करके उनके पीछे-पीछे लगे रहने से अच्छा है कि खुद की पार्टी को मजबूत किया जाए।
वहीं दूसरे नेताओं का कहना है कि अगर टीडीपी और जनसेना पार्टी के साथ गठबंधन कर लिया जाए तो इसका फायदा आने वाले लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में मिलेगा। अगर भाजपा गठबंधन करती है तभी कुछ सीटें उसके खाते में आ सकती हैं। बताया गया कि शिव प्रकाश ने पार्टी नेताओं से लिखित में राय मांगी है। सूत्रों का यह भी कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू तो भाजपा के साथ आना चाहते हैं लेकिन उनके बेटे और पार्टी के महासचिव नारा लोकेश ऐसा नहीं चाहते।