त्वचा रोग से जूझ रहे 42 प्रतिशत मरीज नींद की समस्या से पीड़ित, शोध में खुलासा
शोध में कहा गया है कि स्वस्थ लोगों की तुलना में 81 प्रतिशत त्वचा रोगियों को जागने पर थकान , 83 प्रतिशत को दिन में नींद आना, 58 प्रतिशत को आंखों में झुनझुनी या जलन महसूस होना और 72 प्रतिशत मामलेजम्हाई

एक नए अध्ययन में पता चला कि त्वचा रोग के कारण आधे लोग नींद की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे पीड़ितों की संख्या करीब 42 प्रतिशत है। इस दिक्कत से जीवन की गुणवत्ता पर भी प्रभाव पड़ रहा है। यह अध्ययन यूरोपियन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी एंड वेनेरोलॉजी (ईएडीवी) कांग्रेस 2023 में प्रकाशित हुआ है। इनके मुताबिक, त्वचा रोग से पीड़ित 49 फीसदी रोगियों ने काम पर उत्पादकता में कमी की सूचना दी, जबकि बिना त्वचा रोग वाले पांच में से एक व्यक्ति ने काम (19 फीसदी) में कमी को बताया। त्वचा रोगों के प्रभाव का आकलन करने के लिए 20 देशों में 50 हजारों से अधिक वयस्कों का विश्लेषण किया गया।
अध्ययन के दौरान पता चला कि त्वचा रोगियों की नींद को प्रभावित करने वाले मुख्य लक्षण में खुजली (60 प्रतिशत) और जलन (17 फीसदी) हैं। शोध के मुताबिक, बिना त्वचा रोग वाले लोगों की तुलना में इन रोगियों में जागने पर थकान 81 प्रतिशत, दिन में नींद आना 83 प्रतिशत, आंखों में झुनझुनी या जलन के 58 प्रतिशत और बार-बार जम्हाई आने के 72 प्रतिशत मामले अधिक देखे गए। वहीं तीन चौथाई लोगों में एकाग्रता में कमी देखी गई।
औसत आयु 40 के करीब
अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों की औसत आयु 40 के करीब थी। इसमें 42 प्रतिशत से अधिक पुरुष और 57 प्रतिशत से अधिक महिलाएं थीं। उनका सर्वेक्षण ऑल प्रोजेक्ट के हिस्से के रूप में किया गया था, जो वैश्विक स्तर पर त्वचा रोगों और त्वचा के प्रकारों पर डाटा एकत्र करने के उद्देश्य से एक बड़े पैमाने का प्रयास था।
विशेषज्ञों की राय
इस बारे में शोधकर्ता डॉ. चार्ल्स ताएब ने त्वचा संबंधी रोगों से मरीजों में नींद की गड़बड़ी का शीघ्र पता लगाने और प्रभावी प्रबंधन के महत्व पर जोर दिया। उनके मुताबिक, ये गड़बड़ी उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर भारी असर डालती है। इसके लिए स्वास्थ्य सेवा बुलिटन में रोगियों की जांच में नींद की गड़बड़ी संबंधी पूछताछ को शामिल करने का सुझाव दिया।
शरीर पर घाव से सामजिक बहिष्कार का डर-
शोधकर्ताओं ने अध्ययन में हिड्राडेनाइटिस सुप्युराटाईवा के साथ जीने वाले लोगों के सामने आने वाली चुनौतियों का भी अध्ययन किया। हिड्राडेनाइटिस सुप्युराटाईवा से शरीर में फोड़े और घाव हो जाते हैं। शोध में पाया कि इस त्वचा रोग के 77 फीसदी रोगियों ने स्थिति के कारण बहुत बुरा महसूस करने की जानकारी दी। वहीं 58 प्रतिशत ने दूसरों से बहिष्कार या अस्वीकृति का अनुभव किया। इसके अलावा आधे से अधिक रोगियों ने शारीरिक संपर्क (57 प्रतिशत) और सामाजिक संपर्क (54 प्रतिशत) से बचने की जानकारी दी।
फोटो खिंचवाने में कतराते हैं लोग-
त्वचा संबंधी रोगों की वजह से मरीजों के आत्मसम्मान, रिश्ते और रोजमर्रा के जीवन पर व्यापक असर देखने को मिला। 52 प्रतिशत मरीजों ने सेल्फी लेने से बचने की जानकारी दी। वहीं 72 फीसदी लोग जब दर्पण के सामने से गुजरते थे, तो अपनी उपस्थिति पर नजर रखते थे। वहीं 79 फीसदी लोगों ने आत्मसम्मान को ठेस पहुंचने की भावना की सूचना दी।
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