शिक्षक नियुक्ति से वंचित 500 अभ्यर्थियों की याचिका खारिज
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिका खारिज की, खंडपीठ ने कहा- विज्ञापन की शर्त के अनुसार जेएसएससी की वेबसाइट पर जारी की गयी थी मेरिट लिस्ट, वेबसाइट पर लिस्ट न

रांची। विशेष संवाददाता हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति (वर्ष 2016) में जेएसएससी की ओर से जारी मेरिट लिस्ट की जानकारी नही होने पर नियुक्ति से वंचित 30 प्रार्थियों की अपील याचिका हाईकोर्ट ने शुक्रवार को खारिज कर दी। चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव और जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि जेएसएससी ने विज्ञापन में ही स्पष्ट किया था कि राज्य स्तरीय मेरिट लिस्ट का प्रकाशन आयोग की वेबसाइट पर किया जाएगा। आयोग ने विज्ञापन की शर्तों के अनुसार वेबसााइट पर मेरिट लिस्ट जारी की। ऐसे में आयोग की कोई गलती नहीं है। प्रार्थियों ने वेबसाइट पर लिस्ट नहीं देखी, ऐसे में आयोग की गलती नहीं है। हाईकोर्ट के आदेश से करीब 500 उम्मीदवारों को झटका लगा है।
इस संबंध में निर्मल पाहन, अलका कुमारी समेत 30 ने अपील याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि सोनी कुमारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग को राज्यस्तरीय मेरिट लिस्ट जारी करने का निर्देश दिया था। आयोग ने मेरिट लिस्ट अपनी वेबसाइट पर जारी कर दी। प्रार्थी सुदूरवर्ती और ग्रामीण इलाके में रहते हैं। इस कारण वह वेबसाइट नहीं देख सके। उनका चयन मेरिट लिस्ट में हो गया था, लेकिन सूचना नहीं मिलने के कारण वह अंतिम चयन प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सके और आयोग ने उन्हें नियुक्ति से वंचित कर दिया।
प्रार्थियों की दलील थी कि आयोग के एसएमएस और ई मेल से भी मेरिट लिस्ट भेज कर जानकारी दी जानी चाहिए थी। पूर्व में एसएमएस से ऐसी जानकारी दी जाती थी। आयोग की ओर से बहस करते हुए महाधिवक्ता राजीव रंजन और अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने अदालत को बताया था कि सोनी कुमारी मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में मेरिट लिस्ट जारी की गयी है। आयोग ने इस संबंध में नोटिस जारी करते हुए यह स्पष्ट कहा था कि मेरिट लिस्ट आयोग की वेबसाइट पर ही उपलब्ध रहेगी। प्रार्थियों ने आयोग की वेबसाइट नहीं देखी, तो यह प्रार्थयों की गलती है, न की आयोग की।
पूर्व में एकलपीठ ने इस मामले की सुनवाई की थी और प्रार्थियों की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि इस मामले में आयोग की गलती नहीं है। इसके बाद प्रार्थियों ने खंडपीठ में अपील दायर की। खंडपीठ ने भी शुक्रवार को याचिका खारिज कर दी। खंडपीठ ने आठ फरवरी को सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
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