बोले पलामू-आउटकम चाहिए 100 % पर संसाधन जीरो
पलामू जिले में विज्ञान शिक्षकों की कमी से विज्ञान शिक्षा में गिरावट आई है। शिक्षकों ने बताया कि छात्रों में विज्ञान के प्रति रुचि है, लेकिन संसाधनों का अभाव है। प्रयोगशालाओं की कमी और उपकरणों की...
देश के पिछड़े जिलों में सतत विकास को तेज करने के लिए आकांक्षी जिलों की सूची में जिन जिलों को नीति आयोग ने समाहित किया है, उसमें पलामू प्रमंडल के तीनों जिले शामिल हैं। परंतु विज्ञान की पढ़ाई के प्रति आकर्षण बढ़ाने की पहल जिले में पूर्व की अपेक्षा कमजोर हुई है। हिन्दुस्तान के बोले पलामू कार्यक्रम में पलामू के विज्ञान शिक्षकों ने खुलकर चुनौतियों को साझा किया। कहा कि बेहतर रिजल्ट के लिए हमेशा दबाव बनाया जाता है पर उस लिहाज से संसाधन उपलब्ध नहीं कराया जाता। मेदिनीनगर। विज्ञान, सतत अनुसंधान, विश्लेषण और सृजन का शास्त्र है। इस विषय का अध्ययन करने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए पठन-पाठन को रोचक बनाने की आवश्यकता को बार-बार उल्लेखित किया जा रहा है। परंतु पलामू जिले में इस दिशा में समुचित प्रयास का घोर अभाव है।
विद्यार्थियों को विज्ञान की गहराइयों को समझाने के लिए शिक्षकों को नई-नई तकनीक का इस्तेमाल करना होता है। बेहतर तरीके से समझाए गए तथ्य को विद्यार्थी, लंबे समय तक आसानी से याद रख पाते हैं। रटने की प्रवृत्ति प्रत्येक विद्यार्थी के लिए बोझिल हो जाता है जबकि तथ्य को समझा दिए जाने से वह रोचक बन जाता है।
विज्ञान में आकड़ों और तथ्यों का काफी समावेश होता है। इसे सहजता से समझाने के लिए समुचित संख्या में शिक्षक, प्रयोगशाला, टीचिंग लर्निंग मैटेरियल, विज्ञान म्यूजियम, शैक्षणिक भ्रमण की बेहद आवश्यकता होती है। मेदिनीनगर सिटी में करीब तीन दशक पहले डॉ चंद्रशेखर वेंकट रमण विज्ञान भवन का निर्माण भी कराया गया था परंतु आज तक उसमें विज्ञान के अध्ययन को प्रोत्साहन करने की पहल शुरू नहीं हो सकी। मेदिनीनगर कोर सिटी में स्थित जिला स्कूल परिसर में स्थित संबंधित भवन में शुरुआती दौर में कमिशनरी ऑफिस संचालित होता रहा और वर्तमान में साइबर थाना, एनएसीसी और जिला बाल कल्याण समिति का आफिस संचालित है।
पलामू के नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में विज्ञान के विषयों यथा भौतिकी, रसायन विज्ञान, जंतु विज्ञान, वनष्पति विज्ञान, भूगर्भ विज्ञान में पीजी डिपार्टमेंट और महाविद्यालय के विभागों में प्राध्यापकों की घोर कमी है। इसके कारण शोध कार्य हो नहीं पा रहे हैं। प्रयोग को बढ़ावा देने, प्रयोगशालाओं को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस करने संबंधित अनेक समस्याओं से विज्ञान विभाग जूझता आ रहा है। जीएलए कॉलेज का बोटेनिकल गार्डन कभी विद्यार्थियों को आकर्षित करता था परंतु वर्तमान में वह उजड़ गया है। पलामू में स्थित मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज और राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज भी प्राध्यापक और उपकरणों की कमी से जूझ रहा है।
पलामू जिले में प्लस-2 हाईस्कूल में भी विज्ञान शिक्षकों की कमी है। प्लस-2 स्कूलों में विज्ञान शिक्षक की 341 पद स्वीकृत है जिसके विरुद्ध 297 शिक्षक कार्यरत हैं। हाईस्कूल में विज्ञान शिक्षक का 1835 पद स्वीकृत है जिसके विरुद्ध 896 शिक्षक कार्यरत हैं। पलामू के मिडिल स्कूलों में विज्ञान शिक्षकों के 222 पद स्वीकृत हैं जिसके विरुद्ध 126 शिक्षक कार्यरत हैं। इसका नकारात्मक असर विज्ञान की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
पलामू के विज्ञान शिक्षकों ने कहा कि विद्यार्थियों में विज्ञान पढ़ने के प्रति पर्याप्त ललक इस जिले में भी है। परंतु समुचित संसाधन नहीं होने के कारण उनकी जिज्ञासाओं को बढ़ाने व अपेक्षित ज्ञान देना संभव नहीं हो पा रहा है। राष्ट्रीय विज्ञान प्रौद्योगिकी संचार परिषद ने 1986 में भारत सरकार से 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का आग्रह किया था ताकि देश में विज्ञान के अध्ययन को प्रोत्साहित किया जा सके। भारत सरकार ने आग्रह स्वीकारा और राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पहली बार 28 फरवरी 1987 को मनाया गया। इसके बाद प्रत्येक साल विज्ञान दिवस मनाते हुए इसे प्रोत्साहित किया जाता है। इस वर्ष विकसित भारत के लिए विज्ञान और नवाचार में वैश्विक नेतृत्व के लिए भारतीय युवाओं को सशक्त बनाना, विषय पर राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जा रहा है।
विज्ञान शिक्षकों की पर्याप्त संख्या नहीं
पलामू जिले के स्कूल और कालेजों में विज्ञान शिक्षकों की पर्याप्त संख्या नहीं है। इसके कारण विश्वविद्यालय में जहां शोध कार्य प्रभावित हो रहा है। वहीं महाविद्यालयों में विज्ञान के विद्यार्थी किसी-किसी प्रकार सिलेबस पूरा कर परीक्षा पास कर रहे हैं। स्कूल स्तर पर भी विज्ञान शिक्षा की स्थिति बेहतर नहीं है। इससे के कारण विद्यार्थियों की बुनियादी ज्ञान कमजोर हो जा रहा है। उच्च शिक्षा के दौरान वे विज्ञान विषय की पढ़ाई करने में परेशान हो जाते हैं और अंतत: उन्हे विज्ञान की पढ़ाई छोड़ देना पड़ता है। इससे उनकी परेशानी बढ़ जाती है।
अत्याधुनिक प्रयोगशाला का है घोर अभाव
जिले के बहुत कम विद्यालयों में प्रयोगशालाओं का निर्माण किया गया है। इन प्रयोगशालाओं में उपकरण भी बेहद कम ओर पुराने हैं। जिले में विज्ञान म्यूजियम या विज्ञान भवन का भी निर्माण नहीं कराया गया है। करीब 24 लाख की आबादी वाले पलामू जिले के सरकारी स्कूलों में विभिन्न योजना से प्रयोगशाला का निर्माण कराया जा रहा है परंतु उसे रनिंग कंडिशन में रखने की व्यवस्था नहीं की जा रही है। इसके कारण नवनिर्मित प्रयोगशालाएं भी विद्यार्थियों के ज्ञानवृद्धि में सहायक नहीं बन रहे हैं। इससे वे नए प्रयोगों की जानकारी नहीं ले पाते हैं और कई प्रतियोगिताओं में पीछे रह जाते हैं।
शिकायतें
1. जिले में विज्ञान शिक्षकों का अभाव है जिससे विज्ञान की पढ़ाई सुचारू रूप से नहीं हो पा रही है।
2. विज्ञान विषय को रोचक और आनंददायक बनाने के लिए कोई अतिरिक्त फंड की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
3. प्रयोग आधारित शिक्षक की उपलब्धता नहीं होने से छात्र विभिन्न तथ्यों को बेहतर रूप से नहीं समझ पाते है।
4. दैनिक दिनचर्या से जोड़कर विज्ञान नहीं पढ़ाए जाने से छात्रों को यह विषय नीरस लगता है।
सुझाव
1. जिले में विज्ञान शिक्षकों की पर्याप्त संख्या होनी चाहिए जिससे विज्ञान की पढ़ाई सुचारू रूप से हो पाए।
2. विज्ञान विषय को रोचक और आनंददायक बनाने के लिए अतिरिक्त फंड की सुविधा उपलब्ध होना चाहिए।
3. प्रयोग आधारित शिक्षक की पर्याप्त संख्या उपलब्ध हो ताकि छात्र विभिन्न तथ्यों को बेहतर रूप से समझ पाएं।
4. दैनिक दिनचर्या से जोड़कर विज्ञान को पढ़ाया जाना चाहिए।
इनकी भी सुनिए
विज्ञान शिक्षकों की कमी भी धीरे-धीरे दूर की जा रही है। प्रयोगशालाओं को भी अपडेट किया जा रहा है। शिक्षकों को प्रशिक्षित कर विषय को रोचक तरीके से पढ़ाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। त्रुटियों को भी दूर करने का प्रयास है।
सौरव प्रकाश, जिला शिक्षा पदाधिकारी, पलामू
जिले के प्रत्येक विद्यालय के विज्ञान विभाग को विशेष आर्थिक पैकेज मिलना चाहिए जिससे परेशानी न हो। साथ ही प्रयोग आधारित शिक्षण की व्यवस्थाएं सुदृढ़ करनी चाहिए। विज्ञान शिक्षकों को नियमित प्रशिक्षण भी मिलना चाहिए।
आशीष कुमार दुबे, प्राचार्य सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस, मेदिनीनगर
विज्ञान पढ़ाते समय प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए जिससे बच्चे इसके संपूर्ण तथ्य से अवगत हो सके और वे पूरी तरह पारंगत हो सके साथ ही उत्सुकता हो। विद्या रानी
विद्यालय में प्रयोगशाला की कक्षाएं अनिवार्य होनी चाहिए जिससे बच्चे प्रयोग की बारीकियां को समझ सके। साथ ही उपकरण भी आधुनिक होने चाहिए।
शैलेन्द्र प्रताप सिंह
जिले में विज्ञान शिक्षकों की पर्याप्त संख्या सुनिश्चित होनी चाहिए जिससे विद्यार्थियों को कोई मुश्किलों का सामना न करना पड़े और वे तथ्यों को समझ सकें।
सोनम भारती
विज्ञान पढ़ते समय शिक्षकों को इसे मनोरंजक के साथ साथ ज्ञानवर्धक बनाने का प्रयास करना चाहिए जिससे बच्चे में इसे पढ़ने की उत्सुकता उत्पन्न हो सके। अनुराधा कुमारी
नियमित रूप से जिला स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन होना चाहिए जिससे छात्रों के बीच नई चीजों के शोध के प्रति सकारात्मक सोच का मार्ग प्रशस्त हो सके। सुषमा कुमारी
विज्ञान को सामाजिक मूल्यों से जोड़कर पढ़ाया जाना चाहिए ताकि विद्यार्थियों को सामाजिकता और तथ्यों के बेहतर तालमेल का ज्ञान हासिल हो सके और समझ सकें।
सुगंधा कुमारी
सीएम स्कूल ऑफ़ एक्सीलेंस में विज्ञान सहित विभिन्न विषयों की पुस्तक अंग्रेजी माध्यम में उपलब्ध कराई जाए जिससे बच्चे खुद को बेहतर सिद्ध कर सकें।
पूजा कुमारी
सभी प्रयोगशालाओं में अत्याधुनिक उपकरण , केमिकल सहित सभी प्रमुख चीजों की उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए जिससे प्रयोग सुचारू रूप से चल सके। अमृता सिंह
दैनिक दिनचर्या से जोड़कर विद्यार्थियों को विज्ञान पढ़ाया जाना सुनिश्चित करना चाहिए जिससे बच्चों को यह विषय पढ़ने में आनंद आए और वे रोजकुछ सीखें। कंचन बाला
विज्ञान पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों को नियमित प्रशिक्षण मिलना चाहिए ताकि वे अपने शिक्षण पद्धतियों को अपडेट कर बच्चों को बेहतर रूप से पढ़ा सके ।
भैरव कुमार दास
प्रयोगशालाओं में केमिकल की कमी है जिसके कारण प्रयोग संबंधित गतिविधियां बेहतर रूप से नहीं चल रही है । लैब में आधुनिक उपकरणों की भी भारी कमी है। मुरारी कुमार
स्कूल के विज्ञान विभाग को विशेष आर्थिक पैकेज मिले जिससे विज्ञान की शिक्षा को बच्चों के बीच और व्यापक बनाया जा सके। इससे बच्चों को भी आसानी हो सकेगी। विकास कुमार चौबे
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।