जिला शिक्षा समिति की सिफारिश पर महुदंड को मिल सकता है 2 हाईस्कूल
झारखंड सरकार ने हुसैनाबाद विधायक संजय सिंह यादव को आश्वासन दिया है कि यदि महुदंड पंचायत का उच्च विद्यालय 2 में अपग्रेड करने का प्रस्ताव भेजा जाता है, तो निर्णय लिया जाएगा। महुदंड पंचायत में शिक्षा,...

मेदिनीनगर, प्रतिनिधि। झारखंड सरकार ने सदन में हुसैनाबाद के विधायक संजय कुमार सिंह यादव को आश्वासन दिया है कि जिला शिक्षा समिति अगर महुदंड पंचायत स्थित उच्च विद्यालय को 2 में अपग्रेड करने का प्रस्ताव भेजती है तो आगे का निर्णय लिया जाएगा। हुसैनाबाद विधानसभा के विधायक संजय सिंह यादव ने जनजातीय और पिछड़ा जाति के बहुलता वाले महुदंड पंचायत में 2 की शिक्षा नहीं होने का मामला गत मंगलवार को सदन में उठाया था। सरकार ने माना कि महुदंड पंचायत के विद्यार्थियों को आठ से 10 किलोमीटर दूर हुसैनाबाद प्रखंड के सांडा गांव और मोहम्मदगंज स्थित 2 उच्च विद्यालय में जाकर पढ़ाई करने के लिए विवश हैं। पलामू जिले का महुदंड पंचायत नक्सल चुनौतियों के दृष्टि से काफी संवेदनशील पंचायत है। यह पंचायत क्षेत्रफल दृष्टि से पलामू जिले का सबसे बड़ा पंचायत है जिसकी क्षेत्रफल करीब 16 किलोमीटर है। 11 राजस्व ग्राम के साथ कुल 16 टोलो में विभक्त पंचायत में सात प्राथमिक, तीन मध्य विद्यालय और एक उच्च विद्यालय स्थित है। पंचायत क्षेत्र में कोई भी नेटवर्क की सुविधा नहीं है। पंचायत के लोगों को पीने के लिए शुद्ध पेयजल की सुविधा भी नहीं है। गांव के लोगों को दो-दो किलोमीटर तक दूर पानी के लिए पहाड़ी क्षेत्रों से होकर जाना पड़ता है। स्वास्थ्य के सुविधा भी नहीं है। ग्रामीणों को बीमार पड़ने के बाद इलाज के लिए 25 किलोमीटर दूर हुसैनाबाद जाना पड़ता है।
वर्तमान मुखिया मीना देवी की पहल पर पंचायत भवन में उप स्वास्थ्य केंद खोला गया है जहां सप्ताह में तीन दिन डॉक्टर बैठते हैं। पंचायत में डेढ़ हजार से अधिक आदिम जनजाति सहित करीब सात हजार से अधिक लोग निवास करते हैं। हुसैनाबाद प्रखंड क्षेत्र के महुदंड पंचायत पलामू जिले के तीनों अनुमंडल हुसैनाबाद, छतरपुर और विश्रामपुर के सीमा पर स्थित है। चारों तरफ से पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण महुदंड पंचायत लंबे समय तक नक्सलियों का गढ़ रहा है। महुदंड पंचायत पहुंचने के लिए कालापहाड़ और मोहम्मदगंज से रास्ता है। कालापहाड़ से करीब आठ किलोमीटर दूर है जबकि मोहमदजंग की ओर से करीब 12 किलोमीटर दूर है। मोहम्मदंज की ओर से रास्ता पूरी तरह से जर्जर है। कहीं कही दो से तीन फिट तक के गढ़े हैं।
पंचायत में नेटवर्क की कोई सुविधा नहीं है। पंचायत क्षेत्र में कभी पांडू, कभी लठेया तो कभी हुसैनाबाद का नेटवर्क काम करता है। पंचायत भवन में नेट काम नहीं करने के कारण सभी सरकारी काम बाधित रहता है। हालांकि पंचायत क्षेत्र में बीएसएनएल सात टावर लगाया गया है, लेकिन अभी तक चालू नहीं होने से लोगों को बहुत परेशानी हो रहा है। पंचायत के अंदर टोलो और गांव को जोड़ने का कोई रास्ता भी नहीं है। महुदंड पंचायत के समाजसेवी और मुखिया पति शिवशंकर यादव ने बताया कि महुदंड पंचायत में रास्ता और नेटवर्क के साथ पंचायत के विकास के लिए कई बार विधायक, सांसद और पूर्व उपयुक्त को भी आवेदन दिया है। लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि पंचायत में बुनियादी सुविधाओं के लिए काम तेजी से करने का कोशिश की जा रही है। पंचायत में पेयजल की घोर किल्लत है। लोगो को दो-दो किलोमीटर तक दूर पानी के लिए जाना पड़ता है।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।