Hindi NewsJharkhand NewsGridih NewsFake Doctors in Private Hospitals Pregnant Women Targeted Amid Rising Concerns Over Healthcare

निजी अस्पतालों में डॉक्टर असली है या फर्जी, नहीं होती पहचान!

गिरिडीह में एक प्राइवेट अस्पताल में एक महिला की मौत ने फर्जी डॉक्टरों के मामले को उजागर किया है। गर्भवती महिलाएं इन अस्पतालों के लिए आसान लक्ष्य बनती हैं। स्वास्थ्य विभाग और आईएमए इस समस्या पर...

Newswrap हिन्दुस्तान, गिरडीहFri, 28 Feb 2025 04:06 AM
share Share
Follow Us on
निजी अस्पतालों में डॉक्टर असली है या फर्जी, नहीं होती पहचान!

शाहिद इमाम गिरिडीह। आपका इलाज करनेवाला डॉक्टर असली है या फर्जी, इसकी पहचान कौन करेगा। हाल में सुदूर क्षेत्र के एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज करानेवाली महिला की मौत और इसके बाद उठे हो- हंगामे ने डॉक्टर के असली और फर्जी होने का मामला गरमा दिया है। इसके पूर्व भी कई लोगों की जानें जा चुकी है, जिसमें डॉक्टर के असली व फर्जी होने की सच्चाई सामने आने से पहले दबा दी गई। इसमें पीड़ित परिजन से लेकर जिम्मेवार विभाग भी दबाने की कोशिश में लगे रहते हैं और घटना दब भी जाती रही है, लेकिन इस बार स्वास्थ्य विभाग को ऐसे अवैध निजी अस्पतालों पर कार्रवाई करना व स्वास्थ्य सेवाओं पर बेदाग छवि दिखाना गले पड़ रहा है, कारण कि इन सभी मुहिम और गतिविधियों पर सत्ताधारी झामुमो, माले के बाद स्पेशल ब्रांच की भी पैनी नजर है।

गर्भवती महिलाएं होती हैं सॉफ्ट टारगेट: जिले में निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की भरमार है। यही नहीं शहर भी इससे अछूता नहीं है। इन निजी अस्पतालों के लिए गर्भवती महिलाएं बेहद सॉफ्ट टारगेट होती है। इनसे आसानी से इलाज में मनमानी राशि वसूली जा सकती है। यही वजह है कि सदर अस्पताल की बेहद अहम यूनिट मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य केन्द्र चैताडीह में विभिन्न निजी अस्पतालों के कर्मी एवं गिरोह सक्रिय हो जाते हैं। यहां गर्भवती की इंट्री करते ही ऐसे नेटवर्क से जुड़े लोग सक्रिय हो जाते हैं। बताया जाता है कि इनमें कथित सहिया एवं अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ता भी होते हैं, जो नेटवर्क के संचालन में जुड़े रहते हैं। गर्भपात कराने आनेवाली महिलाओं को पहले हमदर्दी दिखाने के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं की कमियों का पिटारा खोल देते हैं और मरीजों को गुमराह कर निजी अस्पताल ले जाया जाता है। बताया जाता है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इसका भान है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं करती है। ज्यादातर खासकर सुदूरवर्ती क्लिनिकों और नर्सिंग होमों में लगे बोर्डों पर डॉक्टरों के नाम के आगे फर्जी डिग्रियों की भरमार रहती है। पर इसकी जांच शायद ही कभी की जाती है।

एक्शन लेन की डिमांड करती रहती है आइएमए: स्वास्थ्य सेवाओं पर आइएमए भी गंभीर है। जिलाध्यक्ष डॉ. विद्या भूषण ने कहा कि ऐसे फर्जी डॉक्टरों पर एक्शन लेने की मांग बराबर आइएमए करती रहती है। विभिन्न क्लीनिकों में जो ओपीडी चलती है, जिसमें बाहर से डॉक्टर आते हैं, वह असली और फर्जी है। इसका सर्वे होना चाहिए। बाहर के डॉक्टर इलाज कर चले जाते हैं, इसके बाद मरीज को किसी तरह की कोई परेशानी होती है तो वह कहां जाएं। ऐसे में स्थानीय डॉक्टर को सिर्फ बदनाम किया जाता है। कहा कि आइएमए में लगभग 50 डॉक्टर लाईफटाइम मेम्बर हैं।

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।

अगला लेखऐप पर पढ़ें