लाखों रुपए का बना लिफ्ट टेरिगेशन बेकार
गालूडीह के काशीडीह गांव में 2018-19 में लिफ्ट टेरिगेशन परियोजना शुरू हुई थी, लेकिन मोटर जलने के बाद यह परियोजना विफल हो गई। किसान सिंचाई के लिए अब निजी सोलर पंपों का उपयोग कर रहे हैं। सरकारी परियोजना...
गालूडीह। गालूडीह के उल्दा पंचायत के काशीडीह गांव में वर्ष 2018-19 में काशीडीह के किसानों को सौगात के रूप में लिफ्ट टेरिगेशन का सौगात मिला था।इस लिफ्ट टेरिगेशन के मदद से स्वणरेखा नदी के पानी को उठाकर खेतों में पहुंचाना था। इससे लगभग 200-300 एकड़ जमीन में सिंचाई के माध्यम से खेती की जा सकती। खेतों में सिंचाई को लेकर अंडर ग्राउंड पाइपलाइन बिछाया गया था। खेतों में जगह जगह कल्वर्ट बनाया गया था।उसके बाद विभाग के द्बारा टेस्टिंग की गई थी । किसानों को उम्मीद जागी की खेती अब आसानी से की जाएगी।खेतों को पानी मिल सकेगा। इसके बाद पंप हाउस में लगा दोनों मोटर हेंड ओवर करने से पहले ही जल गया । उसके बाद आज तक लाखों रुपए की लागत से किसानों को मिला सौगात अब सपना बनकर रह गया। इसकी सुधि लेने वाला भी कोई नहीं और ना ही इस प्रोजेक्ट के फेल होने पर कोई जवाबदेही के लिए आगे है। सरकारी परियोजना धरातल पर आने के बाद भी बेकार पड़ा हुआ है।इसको लेकर कौन जिम्मेदार है। अब किसान निजी सोलर लगाकर खेती कर रहे हैं।
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