अनुमंडल मुख्यालय में भीषण जलसंकट से निजात दिलाए प्रशासन
रंका अनुमंडल मुख्यालय में जल संकट की समस्या गंभीर हो गई है। जलापूर्ति बंद होने से कई मोहल्लों में लोग पानी की व्यवस्था करने के लिए परेशान हैं। स्थानीय निवासी गर्मी के कारण पानी की समस्या का समाधान...

रंका, प्रतिनिधि। एनएच 343 गढ़वा-अंबिकापुर सड़क पर अवस्थित रंका अनुमंडल मुख्यालय भीषण जलसंकट की समस्या से जुझ रहा है। अनुमंडल मुख्यालय में जलापूर्ति बंद है। उक्त कारण कई मोहल्लों में जलसंकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। लोग जहां-तहां से पानी की व्यवस्था कर रहे हैं। उक्त काम में छोटे-छोटे बच्चे भी पानी ढो घर लाकर परिवार को मदद कर रहे हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि गर्मी का दस्तक के साथ ही अनुमंडल मुख्यालय में हर साल पानी की समस्या का बढ़ जाती है। मालूम हो कि पुल के पश्चिमी भाग में स्थित पीएचइडी विभाग से पहले पानी सप्लाई की जाती थी। फिलहाल विभाग से जलापूर्ति ठप हो गई है। उसके बाद पंचायतों में जलमीनार लगाकर नल जल योजना के तहत पानी की सप्लाई की जा रही है। उसका भी मोटर खराब हो जाने के कारण करीब एक हफ्ता से जलापूर्ति ठप हो गया है। उक्त कारण अनुमंडल मुख्यालय के बर मोहल्ला, सोनार मोहल्ला, मुख्य सड़क, टंकी मोहल्ला के अलावा मुख्य बाजार, नया दोहर सहित अन्य मोहल्ले में पानी की सप्लाई बंद हो गई है। स्थानीय लोगों से गर्मी को देखते हुए जल्द से जल्द जलसंकट से निजात दिलाने की मांग की है।
हरेक महीने में दस दिन पानी सप्लाई बाधित होती ही है। जलस्तर नीचे जाने से निजी बोरिंग भी काम नहीं करता। गर्मी के कारण परेशानी बढ़ गई है। पानी की व्यवस्था लोग जहां तहां से कर रहे हैं। फिलहाल जलसंकट की विकट स्थिति है। तत्काल समस्या को दूर किया जाए। गायत्री देवी, स्थानीय निवासी
बचपन से ही चापाकल और बाल्टी साईकल से रिश्ता नहीं टूटा है। लगातार एक महीना निर्बाध जलापूर्ति कभी भी नहीं होती है। जलापूर्ति के लिए दिवंगत मुखिया सविता गुप्ता का कार्यकाल सराहनीय था। अनुमंडल मुख्यालय में जलसंकट से निजात दिलाने के लिए ठोस पहल करने की जरूरत है। राकेश कुमार, स्थानीय निवासी
1982 से पीएचइडी का वैध कनेक्शन धारी हैं। पहले जलापूर्ति बाधित होने पर विभागीय अधिकारियों से संपर्क कर व्यवस्था बनती थी पर वर्तमान व्यवस्था चौपट है। मुखिया पर हर बार कितना अनावश्यक बोझ दिया जाय। विभागीय अधिकारी और जनप्रतिनिधि कुछ ठोस पहल नहीं कर सके। पानी की समस्या का तत्काल समाधान हो। डॉ(प्रो) घनश्याम पांडेय, स्थानीय निवासी
सप्लाई के पानी पर आश्रित रहने से काफी परेशानी है। कुंआ से पानी भरने की आदत भी छूट गई और कुंआ भी वीरान हो गये। चापाकल भी पूरा पानी नहीं दे पाता। पूरा मुहल्ला परेशान है। प्रशासन अनुमंडल मुख्यालय में पानी की समस्या दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए। श्रीमती देवी, स्थानीय निवासी
अनुमंडल मुख्यालय में पेयजल की सारी व्यवस्थाएं ध्वस्त हैं। पूर्व मुखिया ने बार बार प्रयास किया था लेकिन बढ़ती आबादी को देखते हुए सरकार के स्तर पर पहल करनी होगी। ग्रामीण जल समिति बनाकर पीएचइडी विभाग जिम्मेवारी से भाग गया है। पानी की समस्या का समाधान होना चाहिए। मुकेश कुमार, स्थानीय निवासी
सुबह से ही पानी की व्यवस्था में लगने से दिनचर्या पर असर पडता है। रंका का जलस्तर हर साल नीचे जाने से दर्जनों चापाकल बेकार हो गये हैं। त्योहार के समय होने से परेशानी बढ गई है। अनुमंडल मुख्यालय में जलसंकट से निजात दिलाने के लिए प्रशासन पहल करे। जीनत खातून, स्थानीय निवासी
रंका में पानी की व्यवस्था कभी संतोषजनक नहीं रही है। पहले पीएचइडी विभाग से संपर्क कर हमलोग प्रबंध कराते थे लेकिन विभाग के पल्ला झाड़ लेने से भगवान भरोसे हो गए हैं। पहले स्थानीय मुखिया के द्वारा व्यवस्था सुधारी जाती थी पर मुखिया के निधन से सब ठप है। जलसंकट से लोग परेशान हैं। निदान होना चाहिए। दीनबंधु पांडेय, स्थानीय निवासी
अनुमंडल का मुख्यालय होने के बावजूद यहां की जलापूर्ति व्यवस्था ग्रामीण जल समिति से होना दुर्भाग्यपूर्ण है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग मृतप्राय है। ग्रामीण समिति के पास कोई फंड नहीं है। मुखिया के उपर निर्भर रहने से हमलोग काफी परेशान हैं। पानी की समस्या तत्काल दूर हो। डॉ गौरीशंकर प्रसाद, स्थानीय निवासी
पानी का संकट का कारण पैतृक घर छोड़कर भंडार पर रहने की नौबत आ गई है। हर दो महीने में पंद्रह दिन पानी की किल्लत हो जाती है। गर्मी में तो स्थिति और विकट हो जाती है। पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए ठोस पहल नहीं हुआ। गर्मी को देखते हुए तत्काल समस्या को दूर करने की जरूरत है। विमल चौरसिया, स्थानीय निवासी
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