Grand Ganagaur Festival Concludes with Vibrant Procession and Cultural Celebrations in Madhupur मधुपुर : पति की लंबी उम्र के लिए महिलाओं ने रखा व्रत, Deogarh Hindi News - Hindustan
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मधुपुर : पति की लंबी उम्र के लिए महिलाओं ने रखा व्रत

मधुपुर प्रतिनिधिगणगौर पूजा होली के 18 दिनों तक चलने के बाद चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को बड़े ही धूमधाम के साथ समापन किया जाता है।

Newswrap हिन्दुस्तान, देवघरWed, 2 April 2025 03:43 AM
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मधुपुर : पति की लंबी उम्र के लिए महिलाओं ने रखा व्रत

मधुपुर प्रतिनिधि गणगौर पूजा होली के 18 दिनों तक चलने के बाद चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को बड़े ही धूमधाम के साथ समापन किया जाता है। इस क्रम में मंगलवार को मधुपुर की सड़क पर भी गणगौर के विसर्जन के लिए युवतियों-महिलाओं का जत्था मारवाड़ी युवा मंच की ओर से अग्रसेन भवन में आयोजित गणगौर उत्सव विसर्जन में शामिल होने के लिए निकला तो देखते ही बन रहा था।गणगौर महोत्सव समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झांकी प्रदर्शित करने का भी अवसर है। इस बार मारवाड़ी युवा मंच की ओर से अग्रसेन भवन में गणगौर सज्जा प्रतियोगिता, हौजी गेम, गणगौर गीत, पेपर गेम, सेल्फी जोन व गणगौर विसर्जन प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। प्रथम द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया।विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का स्टाल भी लगाया गया था। साथ ही कार्यक्रम स्थल दुल्हन की तरह सजाया गया था। इसके उपरांत पारंपरिक गीतों के साथ ईसर-गौरा की मूर्तियों का सामूहिक रूप से विधि पूर्वक निर्मित कृत्रिम तालाब में विसर्जन किया गया। बता दें कि गणगौर महोत्सव के दिन सभी सुहागन महिलाएं और युवतियां सामूहिक रूप से ईसर-गौरा पूजन करती है। पूजा के दौरान महिलाएं समवेत स्वर में पारंपरिक लोकगीत भी गाती है तथा ईसर-गौरा की प्रतिमा की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कर दूर्वा से जल के छींटे देती हैं। इससे एक दिन पूर्व द्वितीय तिथि को सिंधारा उत्सव मनाया जाता है, जिसमें लड़कियां तथा महिलाएं मेंहदी लगाती है, नए वस्त्र धारण करती हैं व पारंपरिक पकवानों का सेवन करती हैं। गणगौर पूजन होलिका दहन के दूसरे दिन अर्थात होली के दिन से शुरू होता है।पूजन आरंभ होने के सप्ताह भर बाद शीतला अष्टमी मनाई जाती है। सोलह दिन पूजनोपरांत चैत मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन सोलह कुओं का जल लाकर गणगौर को पिलाया जाता है।इस दिन प्रात: काल में राजस्थानी समुदाय की महिलाएं सामूहिक पूजन करती है। महिलाएं 'ईसर गौरा' से अपने सुहाग तथा भाइयों की सलामती की प्रार्थना करने के पश्चात विधिपूर्वक नदी अथवा तालाब में मूर्तियां व पूजन सामग्री विसर्जित करती हैं। गुरुवार संध्या महिलाओं का जत्था लोकगीत गाते हुए अग्रसेन भवन विसर्जन हेतु पहुंचा। इन स्थानों पर पारंपरिक गीतों के साथ ईसर-गौरा की मूर्तियों का विधि पूर्वक विसर्जन किया गया। इसके पूर्व श्रीराम मंदिर ठाकुरबाडी से गणगौर माता माता की भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। इस दौरान बाहर से आये कलाकारों व स्थानीय महिलाओं ने शोभायात्रा में जमकर थिरके। शोभायात्रा का अग्रसेन भवन में समापन किया गया।

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