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यूक्रेन के खनिज भंडार पर कब्जा पाकर भी ट्रंप रह सकते हैं खाली हाथ, विशेषज्ञों ने बताया- ऐसा क्यों?

विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि खतरे मोल लेकर भी ट्रंप के हाथ खाली रह सकते हैं और यूक्रेन में दुर्लभ खनिजों तक उनकी पहुंच नहीं हो सकती है क्योंकि यूक्रेन में छिपे खनिजों की सही जानकारी का पूर्णत: अभाव है।

Pramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्लीThu, 27 Feb 2025 06:32 PM
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यूक्रेन के खनिज भंडार पर कब्जा पाकर भी ट्रंप रह सकते हैं खाली हाथ, विशेषज्ञों ने बताया- ऐसा क्यों?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की बहुप्रतीक्षित खनिज समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए शुक्रवार को व्हाइट हाउस आएंगे। ट्रंप ने राष्ट्रपति के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल की पहली कैबिनेट बैठक की शुरुआत में यह घोषणा की और इस समझौते को ‘एक बहुत बड़ा समझौता’ बताया। ट्रंप लंबे समय से यह शिकायत करते रहे हैं कि अमेरिका ने तीन साल से जारी युद्ध में रूस के खिलाफ यूक्रेन की सहायता के लिए करदाताओं का बहुत अधिक धन खर्च किया है।

यह खनिज समझौता अमेरिका को यूक्रेन के तथाकथित दुर्लभ खनिजों के भंडार तक पहुंच प्रदान करेगा जिनका उपयोग एयरोस्पेस, रक्षा, ग्रीम ईनर्जी और परमाणु उद्योगों में किया जाता है। ट्रंप ने मंगलवार को इस समझौते के ड्राफ्ट की सराहना करते हुए इसे बहुत बड़ी डील बताया था और कहा था कि इससे कीव को सैन्य उपकरण और लड़ने का अधिकार मिल जाएगा। विभिन्न अनुमानों के मुताबिक यूक्रेन की भौगोलिक भूमि के गर्भ में खरबों अरब डॉलर के दुर्लभ खनिज हो सकते हैं, जिसमें कोबाल्ट, लिथियम, तांबा, ग्रेफाइट, निकल, टाइटेनियम और यूरेनियम समेत कई अहम खनिज शामिल हैं।

अमेरिका के ट्रांस अटलांटिक संबंध बिगड़े

यूक्रेन के खनिजों पर कब्जा पाने की ट्रंप की प्रेशर टैक्टिस से भले ही यूक्रेन झुक गया हो लेकिन इस फौरी जीत ने अमेरिका के ट्रांसअटलांटिक से संबंध बिगाड़ दिए हैं। कई देशों ने अमेरिका की इस नीति को घोर आलोचना की है। दूसरी तरफ विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि खतरे मोल लेकर भी ट्रंप के हाथ खाली रह सकते हैं और यूक्रेन में दुर्लभ खनिजों तक उनकी पहुंच नहीं हो सकती है क्योंकि यूक्रेन में छिपे खनिजों की सही जानकारी का पूर्णत: अभाव है।

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ABC न्यूज की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यूक्रेनी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के पूर्व महानिदेशक रोमन ओपिमाख ने इस महीने एसएंडपी ग्लोबल कमोडिटी इनसाइट्स को बताया कि "दुर्भाग्य से, यूक्रेन में दुर्लभ खनिज भंडार का कोई आधुनिक मूल्यांकन उपलब्ध नहीं है और इस जानकारी को सार्वजनिक करने पर अभी भी प्रतिबंध लागू है।" उन्होंने कहा कि यूक्रेन में खनिजों का वर्तमान अनुमान सोवियत युग के मानचित्र और अन्वेषण विधियों पर ही आधारित हैं।

क्यों रह सकते हैं ट्रंप के खाली हाथ

दरअसल, यूक्रेन की भूविज्ञान और उप-भूमि वेबसाइट का वह भाग जो देश के संभावित भंडारों का विवरण देता है, वर्तमान में सुलभ नहीं है। उस वेबसाइट पर एक संदेश लिखा है, "कानूनी आवश्यकताओं के अनुसार, साइट के इस भाग तक पहुंच मार्शल लॉ की अवधि तक सीमित है।" सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के ग्रेसलिन बसकरन और मेरेडिथ श्वार्ट्ज ने भी इस महीने लिखा कि जो संसाधन मौजूद हैं, जरूरी नहीं कि उन तक पहुंच हो ही जाए। उन्होंने साफ लिखा कि ट्रम्प के संभावित खनिज सौदे से मध्यम अवधि में अमेरिका को बहुत अधिक लाभ होने की संभावना नहीं है और उम्मीदों के पैमाने पर ट्रंप के हाथ खाली रह सकते हैं।

उन्होंने एक और बात की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है कि तीन साल से छिड़े युद्ध ने यूक्रेन में खनन के लिए आवश्यक सुविधाओं और संरचनाओं के ध्वस्त कर दिया है। इसके अलावा खनन परियाजनाओं तक बिजली सप्लाई और उनका उत्पादन ठप हो चुका है। मेटिनवेस्ट ग्रुप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के कार्यालय के प्रमुख ओलेक्सांद्र वोडोविज़ ने कहा कि यूक्रेन के एक खदान के विकास में 40 लाख डॉलर तक की लागत आ सकती है। पूर्वी यूक्रेन के पोक्रोवस्क में कोकिंग कोल प्लांट जैसी सुविधा विकसित करने के लिए तो लगभग 10 अरब डॉलर की आवश्यकता होगी। यह यूक्रेन का सबसे बड़ा कोकिंग कोल प्लांट है। इसके अलावा लगातार सुरक्षा जोखिम भी आवश्यक निवेश को रोक सकते हैं। बस्करन और श्वार्ट्ज ने कहा, "ट्रंप, पुतिन और ज़ेलेंस्की शांति समझौते पर पहुंच सकते हैं, लेकिन संघर्ष की दीर्घकालिक प्रकृति को देखते हुए आगे संघर्ष और भूमि अधिग्रहण का खतरा मंडराता रहेगा।"

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