पावागढ़ में किसने तोड़ी जैन तीर्थंकरों की मूर्तियां, जैन समुदाय के विरोध के बीच ट्रस्टी ने बताया सच
एक जैन नेता ने कहा, घटना कल दोपहर की है, जहां 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ की मूर्तियों के साथ-साथ 7 अन्य मूर्तियों को तोड़ दिया गया और फेंक दिया गया।

पावागढ़ पहाड़ी के ऊपर शक्तिपीठ महाकाली मंदिर की ओर जाने वाली सीढ़ियों के दोनों ओर स्थित जैन तीर्थंकरों की मूर्तियों में तोड़फोड़ किए जाने फेंके जाने से गु्ससाए जैन समुदाय के कई सदस्यों ने रविवार शाम को विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस स्टेशन में इकट्ठे हुए। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं सोमवार को वडोदरा समस्त जैन संघ के नेता वडोदरा कलेक्टर के निवास पर पहुंचे और मूर्तियों को दोबारा वहां स्थापित किए जाने और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपा। इसी तरह, सूरत में समिति के सदस्यों ने सूरत जिला कलेक्टर के कार्यालय में अतिरिक्त कलेक्टर विजय रावल को ज्ञापन सौंपा।
एक जैन नेता ने कहा, घटना कल दोपहर की है, जहां 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ की मूर्तियों के साथ-साथ 7 अन्य मूर्तियों को तोड़ दिया गया और फेंक दिया गया। इससे जैनियों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। पावागढ़ ट्रस्ट के हितधारकों के साथ चर्चा जारी है। हमारी मांग है कि मूर्तियों को दोबारा स्थापित किया जाए। हमारी कोई अन्य मांग नहीं है। सरकार ने पावागढ़ तीर्थदाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं, जिसमें 11 जैन डेरासर हैं। क्या जैन मंदिरों को भी तीर्थ विकास में शामिल नहीं किया जाना चाहिए? क्या इसका मतलब यह है कि हम अल्पसंख्यक हैं और हमारी उपेक्षा की जा रही है? आज समस्त वडोदरा संघ के नेताओं ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर से मुलाकात की और एक आवेदन सौंपा। इसके जरिए हमने सरकार से शिकायत दर्ज कराई है और हम प्रतिमाएं तोड़ने वालों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराने जा रहे हैं।
इस गुजरात के मंत्री हर्ष सांघवी का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा, ''पावागढ़ एक ऐतिहासिक भूमि है। पावागढ़ के पहाड़ों पर कई जैन तीर्थंकरों की मूर्तियां स्थापित की गई थीं। ये मूर्तियां हजारों वर्षों से वहां मौजूद हैं। किसी भी ट्रस्ट, संस्था या व्यक्ति को ऐसी ऐतिहासिक मूर्तियों और धार्मिक स्थलों को तोड़ने का अधिकार नहीं है। गुजरात के मुख्यमंत्री ने यह सुनिश्चित किया है कि जैनियों की भावनाओं को ठेस न पहुंचे। इन प्रतिमाओं को उनके मूल स्थान पर पुनः स्थापित किया जाना चाहिए। कुछ घंटों में प्रतिमाएं दोबारा स्थापित कर दी जाएंगी।
बता दें, पिछले 4-5 वर्षों से पुरानी पत्थर की सीढ़ियां खराब हो जाने के कारण आने जाने के लिए बंद कर दी गई थीं और नई सीढ़ियां बनाकर उनका इस्तेमाल किया जा रहा था। इन पत्थर की सीढ़ियों के दोनों ओर मूर्तियां स्थापित की गईं, लेकिन इनमें से किसी भी मूर्ति की सक्रिय रूप से पूजा नहीं की जाती थी। कूड़ा-कचरा फैलने से रोकने के लिए इन सीढ़ियों पर टिन का गेट लगाकर प्रवेश भी प्रतिबंधित कर दिया गया था। हालांकि, जब जैन समुदाय के नेताओं ने पहले गंदगी की सूचना दी, तो मंदिर प्रबंधन ने तुरंत क्षेत्र को साफ कर दिया।
पावागढ़ मंदिर के ट्रस्टी अशोकभाई ने इस मामले पर एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि मूर्तियों को जानबूझकर नहीं तोड़ा गया था। उन्होंने कहा, “पुराने मंदिर की ओर जाने वाली सीढ़ियों पर मूर्तियां थीं। 20 दिन पहले काम शुरू होने से पहले ही लोगों को इन्हें हटाने की सूचना दे दी गयी थी। यह बहुत पहले ही सूचित कर दिया गया था कि यदि कोई मूर्तियां रखना चाहता है, तो उन्हें ले जाना चाहिए।''
उन्होंने कहा, “काम की शुरुआत के दौरान भी मूर्तियों को हटाने के लिए कहा गया था। संबंधित लोगों से अनुरोध किए जाने के बावजूद वे उन्हें लेने के लिए आगे नहीं आए।
उन्होंने टूटी हुई मूर्ति के बारे में आगे बताया, “केवल एक मूर्ति टूटी थी, और यह भी जानबूझकर नहींटूटी। पत्थर के कमजोर होने के कारण हटाते समय मूर्ति टूट गई। मैंने कारीगर से इसके बारे में पूछा तो उसने बताया कि मूर्ति पहले से कमजोक थी और इसी के चलते टूटी है। इसके अलावा, इनमें से किसी भी मूर्ति की सक्रिय रूप से पूजा नहीं की जाती थी। यदि इस मूर्ति को पुनः स्थापित करने की आवश्यकता है, तो हम इसे प्रदान करने के लिए तैयार हैं।
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