Gujarat Congress allegation of GIDC land scam in Bharuch BJP government calls it baseless कांग्रेस ने गुजरात में 2 हजार करोड़ रुपए के घोटाले का लगाया आरोप, BJP सरकार ने दिया जवाब, Gujarat Hindi News - Hindustan
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कांग्रेस ने गुजरात में 2 हजार करोड़ रुपए के घोटाले का लगाया आरोप, BJP सरकार ने दिया जवाब

कांग्रेस ने इस मुद्दे की सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश से जांच कराने की भी मांग की क्योंकि इससे राज्य के खजाने को कथित तौर पर भारी नुकसान हुआ है।

Aditi Sharma भाषा, भरूचMon, 17 June 2024 06:31 PM
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कांग्रेस ने गुजरात में 2 हजार करोड़ रुपए के घोटाले का लगाया  आरोप,  BJP सरकार ने दिया जवाब

गुजरात कांग्रेस ने सोमवार को भरूच में जीआईडीसी की दो सम्पदाओं में उद्योगों को भूमि आवंटन की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया, हालांकि राज्य सरकार ने इन दावों को निराधार बताया। कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल ने संवाददाताओं को बताया कि जून 2023 में गुजरात औद्योगिक विकास निगम (जीआईडीसी) प्रबंधन ने सायखा और दाहेज एस्टेट को "संतृप्त" क्षेत्र घोषित किया था, जिसके लिए जमीन का आवंटन केवल सार्वजनिक नीलामी के जरिए जाना था, लेकिन इस साल फरवरी में निर्णय को उलट दिया गया।

उन्होंने बताया कि जीआईडीसी प्रबंधन ने दोनों सम्पदाओं को "असंतृप्त" घोषित कर दिया, जिसका अर्थ था कि सार्वजनिक नीलामी की आवश्यकता के बिना, निश्चित 'जंत्री' दर (सरकार द्वारा निर्धारित दर) पर जमीनत आवंटित की जा सकती थी। गोहिल ने आरोप लगाया कि यह बहुत कम कीमत पर जमीन आवंटित करने और इस तरह 2,000 करोड़ रुपये का घोटाला करने के लिए किया गया। उन्होंने जून 2023 के फैसले को पलटने पर राज्य की भाजपा सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।

सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जज से जांच की मांग

उन्होंने इस मुद्दे की सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश से जांच कराने की भी मांग की क्योंकि इससे राज्य के खजाने को कथित तौर पर भारी नुकसान हुआ है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गोहिल ने कहा, "जब किसी जीआईडीसी को संतृप्त घोषित कर दिया जाता है, तो उसे शेष भूखंडों की बिक्री नीलामी के जरिए करनी पड़ती है, जिससे राज्य को अधिक राजस्व प्राप्त होता है।" हालांकि, मंत्री ऋषिकेश पटेल ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें असंतृप्त घोषित करने का निर्णय जीआईडीसी बोर्ड द्वारा उसकी 519वीं बैठक में लिया गया था, जब राज्य सरकार को उद्योग निकायों से प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ था।

पटेल ने बताया कि उद्योग निकायों ने सरकार के ध्यान में लाया कि दोनों जीआईडीसी में पर्याप्त मात्रा में बिना बिकी भूमि है, इसलिए उन्हें "संतृप्त" घोषित नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, इस पर सरकार ने विचार किया और 519वीं बैठक में अपने निर्णय को पलट दिया। पटेल ने कहा, "दाहेज और सायखा औद्योगिक एस्टेट में रासायनिक और इंजीनियरिंग दोनों ही क्षेत्र हैं। जीआईडीसी ने इन एस्टेट के रासायनिक क्षेत्रों में लगभग 90 प्रतिशत भूखंड बेचे जाने के बाद पूरे एस्टेट को संतृप्त क्षेत्र घोषित करने का फैसला किया, जबकि इंजीनियरिंग क्षेत्रों में पर्याप्त भूमि उपलब्ध थी।"

उन्होंने कहा, "औद्योगिक निकायों से अभ्यावेदन प्राप्त करने के बाद, जीआईडीसी ने अपनी 519वीं बैठक में इस तथ्य पर विचार करने के बाद दोनों एस्टेट को असंतृप्त घोषित किया कि रासायनिक और इंजीनियरिंग क्षेत्रों को मिलाकर पर्याप्त भूमि उपलब्ध थी।" मंत्री ने कहा कि निर्णय में कोई अनियमितता नहीं है और सायखा में एक भी भूखंड आवंटित नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि भूमि आवंटन पर सभी निर्णय विभिन्न पहलुओं पर विचार करने और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से एक समिति द्वारा लिए जाते हैं। मंत्री ने कहा, "जीआईडीसी एक गैर-लाभकारी संस्था है। सायखा में भूमि आवंटित करके सरकार को करोड़ों रुपये का वित्तीय नुकसान पहुंचाने के आरोप पूरी तरह से निराधार और काल्पनिक हैं।"

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