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टैरिफ पर ट्रंप की दो टूक, इस बार किसी भी देश को नहीं दी जाएगी छूट, भारत पर कितना पड़ेगा असर

  • राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो अप्रैल को ऐतिहासिक जवाबी टैरिफ लागू करेंगे। इस बार किसी भी देश को छूट नहीं दी जाएगी। ऐसे में देखें भारत पर इसका कितना और कहां असर पड़ सकता है।

Drigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तानWed, 2 April 2025 05:49 AM
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टैरिफ पर ट्रंप की दो टूक, इस बार किसी भी देश को नहीं दी जाएगी छूट, भारत पर कितना पड़ेगा असर

अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय व्हाइट हाउस ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो अप्रैल को ऐतिहासिक जवाबी टैरिफ लागू करेंगे। इस बार किसी भी देश को छूट नहीं दी जाएगी। व्हाइट हाउस ने बताया कि पारस्परिक टैरिफ तत्काल प्रभाव से लागू होंगे, जबकि कार टैरिफ तीन अप्रैल से लागू होंगे। व्हाइट हाउस ने यह भी घोषणा की कि अमेरिका में बने उत्पादों को इन टैरिफ से छूट दी जाएगी। वर्तमान में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप विवरण को अंतिम रूप देने के लिए अपनी व्यापार और टैरिफ टीम के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं।

ट्रम्प के जवाबी टैरिफ से किन सेक्टर्स पर पड़ेगा सबसे अधिक असर

शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने मंगलवार को कहा कि भारत को अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के नजरिये से अमेरिका की प्रत्येक मांग का आकलन करना चाहिए। यूएसटीआर की रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए जीटीआरआई ने कहा कि कृषि और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में प्रस्तावित कई बदलाव भारत की अपने छोटे किसानों की रक्षा करने, खाद्य सुरक्षा बनाए रखने, डिजिटल भविष्य को सुरक्षित करने की क्षमता के लिए गंभीर जोखिम पैदा करते हैं।

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प्रश्न: अमेरिका की पारस्परिक व्यापार और शुल्क योजना क्या है?

- इस योजना के तहत अमेरिका उन देशों पर आयात शुल्क बढ़ा सकता है, जिनके साथ उसका व्यापार घाटा है। ट्रम्प का दावा है कि अमेरिका बहुत कम शुल्क लगाता है, जबकि अन्य देश अमेरिकी वस्तुओं पर ऊंचे शुल्क और व्यापारिक प्रतिबंध लगाते हैं। इससे अमेरिका को एक ट्रिलियन डॉलर का व्यापार घाटा होता है, जो उसके उद्योगों और श्रमिकों को नुकसान पहुंचाता है।

प्रश्न: भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार का आकार क्या है?

- वर्ष 2021-22 से 2023-24 के बीच अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा। अमेरिका भारत के कुल वस्तु निर्यात में लगभग 18 प्रतिशत का योगदान देता है। वहीं, भारत के कुल आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 6.22 प्रतिशत है।

कुल द्विपक्षीय व्यापार में अमेरिका की हिस्सेदारी 10.73 प्रतिशत है। वहीं, अमेरिका का भारत के साथ व्यापार अधिशेष (यानि भारत से आयात की तुलना में अधिक निर्यात) लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2019-20 में 17.26 अरब डॉलर था, जो वर्ष 2023-24 में दोगुने से अधिक बढ़कर 35.32 अरब डॉलर हो गया।

प्रश्न: भारतीय निर्यात पर कितने आयात शुल्क लग सकते हैं?

- यह अभी स्पष्ट नहीं है कि शुल्क कैसे लागू होंगे - उत्पाद स्तर पर, क्षेत्र स्तर पर, या देश स्तर पर।

प्रश्न : भारत, अमेरिका को किन वस्तुओं का निर्यात करता है?

- भारत के अमेरिका को निर्यात 30 क्षेत्रों में फैले हैं, जिनमें 6 कृषि और 24 उद्योग से हैं।

अमेरिकी शुल्क का संभावित असर का आकलन

1. देश स्तर पर : 4.9 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क

यदि अमेरिका सभी भारतीय उत्पादों पर एक समान शुल्क लगाता है, तो यह अतिरिक्त 4.9 प्रतिशत होगा।

कारण : अमेरिका में भारतीय निर्यात पर औसत शुल्क 2.8 प्रतिशत है, जबकि भारत में अमेरिकी उत्पादों पर 7.7 प्रतिशत शुल्क है, जिससे 4.9 प्रतिशत का अंतर बनता है।

2. कृषि और उद्योग के लिए अलग शुल्क

कृषि उत्पाद : 32.4 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क

कारण : भारतीय कृषि उत्पादों पर अमेरिका 5.3 प्रतिशत शुल्क लगाता है, जबकि भारत अमेरिकी कृषि उत्पादों पर 37.7 प्रतिशत शुल्क लगाता है। यह अंतर 32.4 प्रतिशत का है।

औद्योगिक उत्पाद : 3.3 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क

कारण : अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों पर भारत 5.9 प्रतिशत शुल्क लगाता है, जबकि अमेरिका भारतीय औद्योगिक उत्पादों पर सिर्फ 2.6 प्रतिशत शुल्क लगाता है। यह अंतर 3.3 प्रतिशत का है।

इन भारतीय वस्तुओं पर शुल्क बढ़ोतरी संभव

कृषि उत्पाद

- मछली, मांस और समुद्री भोजन : 27.83 प्रतिशत (निर्यात कारोबार : 2.58 अरब डॉलर)

- प्रसंस्कृत खाद्य, चीनी और कोको: 24.99 प्रतिशत (निर्यात कारोबार : 1.03 अरब डॉलर)

- अनाज, सब्जियां, फल और मसाले: 5.72 प्रतिशत (निर्यात कारोबार : 1.91 अरब डॉलर)

- डेयरी उत्पाद: 38.23 प्रतिशत (निर्यात कारोबार : 181.49 मिलियन डॉलर)

- खाद्य तेल: 10.67 प्रतिशत (निर्यात कारोबार : 199.75 मिलियन डॉलर)

- शराब, वाइन और स्पिरिट्स: 122.10 प्रतिशत (निर्यात कारोबार : 19.20 मिलियन डॉलर)

औद्योगिक उत्पाद

- फार्मा उत्पाद: 10.90 प्रतिशत (निर्यात कारोबार : 12.72 अरब डॉलर)

- सोना, चांदी और आभूषण: 13.32 प्रतिशत (निर्यात कारोबार : 11.88 अरब डॉलर)

- इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम: 7.24 प्रतिशत (निर्यात कारोबार : 14.39 अरब डॉलर)

- मशीनरी और कंप्यूटर: 5.29 प्रतिशत (निर्यात कारोबार : 7.10 अरब डॉलर)

- रसायन (फार्मा को छोड़कर): 6.05 प्रतिशत (निर्यात कारोबार : 5.71 अरब डॉलर)

- वस्त्र, यार्न और कालीन: 6.59 प्रतिशत (निर्यात कारोबार : 2.76 अरब डॉलर)

- रबर उत्पाद: 7.76 प्रतिशत (निर्यात कारोबार : 1.06 अरब डॉलर)

- सिरेमिक और कांच: 8.27 प्रतिशत (निर्यात कारोबार : 1.71 अरब डॉलर)

- जूते: 15.56 प्रतिशत (निर्यात कारोबार : 457.66 मिलियन डॉलर)

(यह आकलन ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) द्वारा किया गया है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारत में अमेरिकी निर्यात पर वास्तविक आयात शुल्क उतना अधिक नहीं है, जितना दावा किया जाता है। यदि अमेरिका निष्पक्ष व्यापार दृष्टिकोण अपनाता है, तो भारतीय उद्योग न्यूनतम व्यवधान के साथ अमेरिका को निर्यात जारी रख सकते हैं, जिससे संतुलित व्यापार संबंध बनेंगे।

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