इस शख्स के मुकेश अंबानी भी हैं फैन, सेल्समैन से रिटेल किंग बनने की दिलचस्प है कहानी
अतीत पर गौर करें तो 1918 का साल कई मायने में अहम है। ये वो साल था, जब पहले विश्व युद्ध पर विराम लगा और दुनियाभर ने राहत की सांस ली। इसी साल अमेरिका के ओक्लाहामा में ऐसे शख्स का जन्म हुआ, जिसने आगे...
अतीत पर गौर करें तो 1918 का साल कई मायने में अहम है। ये वो साल था, जब पहले विश्व युद्ध पर विराम लगा और दुनियाभर ने राहत की सांस ली। इसी साल अमेरिका के ओक्लाहामा में ऐसे शख्स का जन्म हुआ, जिसने आगे चलकर रिटेल मार्केट की तस्वीर ही बदल डाली। ये शख्स थे-सैम वॉल्टन।
दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल कंपनी 'वॉलमार्ट' के फाउंडर सैम वॉल्टन का बचपन आर्थिक तंगी में बीता तो उन्होंने कम उम्र में ही कमाई के रास्ते ढूंढने शुरू कर दिए। मसलन, खेती के जरिए कमाई की तो वहीं दूध बेचने का भी काम किया। सैम वॉल्टन ने अखबार बेचने से लेकर सेल्समैन तक की नौकरी की। सेल्समैन की नौकरी के दौरान सैम वॉल्टन को ग्राहकों से डील करने के तरीके की समझ आई। उन्होंने ग्राहकों की उस नब्ज को पकड़ा, जिसे कोई छु भी नहीं पा रहा था। सैम वॉल्टन को ये समझ आ गई कि ग्राहक से बड़ा बॉस कोई नहीं है। हालांकि, इस समझ के बावजूद आर्थिक तौर पर सैम वॉल्टन काफी कमजोर थे।

इस बीच, वॉल्टन को सेना की नौकरी करने का भी मौका मिला। यही वो वक्त था जब वॉल्टन ने अपने भविष्य की रेखाचित्र तैयार कर ली थी। सेना की नौकरी और रिश्तेदारों की मदद से वॉल्टन ने पैसे जुटाए और 'बेन फ्रेंकलिन स्टोर' की फ्रेंचाइजी ले डाली। ये उस दौर का नया प्रयोग था लेकिन दूसरों को कुछ खास फायदे का सौदा नहीं लगा। वॉल्टन ने इस कारोबार का विस्तार किया और मुनाफा भी खूब कमाए।
वॉलमार्ट की शुरुआत: इसके बावजूद वह खुद का कारोबार शुरू करना चाहते थे। वॉल्टन की ये चाहत साल 1962 में पूरी हुई। सैम वॉल्टन ने 44 साल की उम्र में रोजर्स, अर्कांसेस में अपना पहला रिटेल मार्केट खोला। इस मार्केट को नाम दिया- वॉलमार्ट। करीब 5 साल बाद वॉलमार्ट के पास 24 स्टोर थे, जिनकी बिक्री 12.7 मिलियन डॉलर के करीब थी। इसके बाद वॉलमार्ट के स्टोर्स बढ़ते गए और कारोबार का विस्तार होता गया। साल-दर साल सफलता मिलती चली गई और वॉलमार्ट दुनियाभर में रिटेल कारोबार का किंग बन गया।

शेयर बाजार में लिस्टिंग: साल 1972 में न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में वॉलमार्ट की लिस्टिंग हुई। ये वो वक्त था जब वॉलमार्ट की 78 मिलियन डॉलर की बिक्री हो रही थी और कंपनी के 50 से ज्यादा स्टोर्स खुल गए थे। वॉलमार्ट ने रिटेल मार्केट के साथ 1978 में पहला फार्मेसी खोल दिया, तो वहीं 1979 में वॉलमार्ट फाउंडेशन की स्थापना की।
साल 1980 में वॉलमार्ट 1 बिलियन डॉलर सालाना बिक्री की कंपनी बन गई, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है। वॉलमार्ट के साथ 276 स्टोर्स और 21,000 कर्मचारी जुड़े रहे। 80 के दशक में वॉलमार्ट ने अपने कलेवर को भी बदला। मसलन, रिटेल मार्केट में कैश रजिस्टर को कम्प्यूटरीकृत पॉइंट-ऑफ-सेल सिस्टम से बदल दिया गया है। 90 के दशक में वॉलमार्ट के कारोबार का विस्तार हुआ।

वॉल्टन का निधन: हालांकि, 1992 में मेडल ऑफ़ फ्रीडम से सम्मानित होने के बाद सैम वॉल्टन का निधन हो गया। इसके अगले ही साल वॉलमार्ट की बिक्री में जबरदस्त उछाल आया। साल 1993 में सप्ताह भर के भीतर वॉलमार्ट की बिक्री 1 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गई। कंपनी का विस्तार अमेरिका के अलावा दूसरे देशों में भी होने लगा। साल 1996 में चीन में कपंनी ने अपना पहला स्टोर खोला।
वॉल्टन परिवार संभाल रहा कारोबार: वर्तमान में सैम वॉल्टन के बच्चे कारोबार को संभाल रहे हैं। सैम वॉल्टन के बच्चे- जिम वॉल्टन, रॉब वॉल्टन और एलिस वॉल्टन आज दुनिया के टॉप 20 अरबपतियों में शामिल हैं। वॉल्टन, अमेरिका में सबसे अमीर परिवार है। परिवार के पास अर्वेस्ट बैंक भी है, जो अर्कांसस, ओक्लाहोमा, मिसौरी और कंसास में 16 बैंकों का संचालन करता है।
मुकेश अंबानी कर रहे मंथन: बीते दिनों मीडिया में ऐसी खबरें आई थीं कि मुकेश अंबानी अपने बच्चों के बीच संपत्ति के बंटवारे के लिए मंथन कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने वॉल्टन परिवार के संपत्ति बंटवारे का मॉडल को भी देखा है। मुकेश अंबानी को ये सबसे अधिक पसंद आया है। रिपोर्ट के मुताबिक सैम वॉल्टन की मौत के बाद जिस तरह से बिजनेस ट्रांसफर को मैनेज किया गया था, उससे अंबानी काफी प्रभावित हैं।
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