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EPFO ने क्लेम सेटलमेंट में देरी के लिए IT को ठहराया जिम्मेदार, EPFOA ने लिखा सरकार को पत्र

EPFO दुनिया का सबसे बड़ी सोशल सिक्योरिटी ऑर्गेनाइजेशन है। मौजूदा समय में 277 मिलियन अकाउंट हैं। वहीं, ये 20 लाख करोड़ रुपये का फंड मैनेज कर रहे हैं। मौजूदा समय में यह संस्था काफी दबाव में है।

Tarun Singh राजीव जयसवाल, नई दिल्लीWed, 25 Oct 2023 09:53 PM
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EPFO ने क्लेम सेटलमेंट में देरी के लिए IT को ठहराया जिम्मेदार, EPFOA ने लिखा सरकार को पत्र

इम्पलॉयीज प्रोविडेंट फंड ऑफिसर्स एसोशिएशन का कहना है कि उनके अधिकारियों पर काफी दबाव है। जब से ईपीएफओ ने एनुअल अकाउंट्स का मैनुअल अपडेशन का रुख किया है तब से काम का बोझ बढ़ गया है। अधिकारियों का कहना है कि सॉफ्टवेयर की बढ़ती समस्याओं की वजह से क्लेम सेटेलमेंट में देरी होती है। जिसकी वजह से अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जाता है। पूरे मसले की असली जड़ ईपीएफओ के आईटी सिस्टम को माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आईटी सिस्टम बिलकुल बेकार हो चुका है। मौजूदा व्यवस्था की वजह से अधिकारियों पर दबाव बढ़ा है।  

बता दें, ईपीएफओ (EPFO) दुनिया का सबसे बड़ी सोशल सिक्योरिटी ऑर्गेनाइजेशन है। मौजूदा समय में 277 मिलियन अकाउंट हैं। वहीं, ये 20 लाख करोड़ रुपये का फंड मैनेज कर रहे हैं।

क्या लिखा गया है पत्र में?

1 नवंबर को ईपीएफओ का 71वां स्थापना दिवस है। उससे पहले इम्पलॉयीज प्रोविडेंट फंड ऑफिसर्स एसोशिएशन (EPFOA) ने सरकार को एक लेटर लिखा है। जिसमें कहा गया है कि परफॉर्मेस रिव्यू करने के लिए क्लेम रिजेक्शन रेशियो के महत्वपूर्ण पैरा मीटर है। पत्र के अनुसार इसे बिना बेहतर सॉफ्टवेयर के नीचे नहीं लाया जा सकता है। लेटर में कहा गया है कि मौजूदा समय में ईपीएफओ “GIGO” प्रिंसिपल पर काम कर रहा है। आईटी की भाषा में GIGO का “गलत इनपुट का नतीजा गलता आउटपुट होगा” हिन्दुस्तान टाइम्स ने इस लेटर को देखा है।

“पिछले कुछ सालों में बदतर हुई व्यवस्था”

एसोसिएशन ने अपने लेटर में कहा है कि हम सॉफ्टवेयर के बुनियादी ढांचे से जूझ रहे हैं। पिछले 2 से 3 सालों के दौरान यह बद से बदतर हो गया है। पत्र में कहा गया है, “हमारा पुराना सॉफ्टेवेयर जो कि क्लेम सेटेलमेंट की रीढ़ है। उसपर दबाव इतना बढ़ गया है कि वो रोजाना का काम भी ठीक से नहीं कर पा रहा है।” एसोसिएशन के महासचिव सौरभ स्वामी कहते हैं कि बदले हुए नियमों के अनुसार अब 20 दिन के अंदर ही दावों का निपटान करना होता है। ऐसा ना करने पर अतिरिक्त ब्याज के साथ भुगतान करना होता है। जिसके लिए अधिकारियों का जिम्मेदार माना जाता है।

20 दिन के अंदर करना होता है भुगतान 

लेटर में कहा गया है, “कानून स्पष्ट तौर पर कहता है कि सभी प्रकार के पूर्ण दावों का निपटारा किया जाएगा और लाभार्थी को 20 दिन के अंदर भुगतान किया जाएगा। परफॉर्मेंस मैट्रिक्स के रूप में अपूर्ण दावों की निगरानी करना योजनाओं के प्रावधानों के विरुद्ध है। लेकिन फिर भी इनवैलिड क्लेम के रिजेक्शन के लिए अधिकारियों का टारेगट किया जा रहा है।” 

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