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सौगात: वीरपुर रजिस्ट्री ऑफिस में कामकाज शुरू

वीरपुर में बुधवार को अवर निबंधन कार्यालय का उद्घाटन हुआ, जिससे स्थानीय निवासियों की वर्षों पुरानी मांग पूरी हुई। अब उन्हें जमीन निबंधन के लिए 42 किलोमीटर दूर नहीं जाना पड़ेगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार...

Newswrap हिन्दुस्तान, सुपौलThu, 3 April 2025 03:27 AM
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सौगात: वीरपुर रजिस्ट्री ऑफिस में कामकाज शुरू

वीरपुर, एक संवाददाता। वीरपुर को बुधवार को अवर निबंधन कार्यालय की सौगात सूबे के मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन विभाग के मंत्री रत्नेश सादा ने फीता काटकर दिया। सालों पुरानी मांग वीरपुर वासियों की पूरी हुई। अब यहां के लोगों को जमीन निबंधन के लिए 42 किलोमीटर दूर गणपतगंज नहीं जाना होगा। वीरपुर के पुराने अनुमंडल कार्यालय में रजिस्ट्री ऑफिस की शुरुआत तत्काल की गई है। अवर निबंधन कार्यालय के लिए जमीन आवंटित कर दी गई है। वीरपुर वासियों के लिए यह किसी तोहफे से कम नहीं है। 20 जनवरी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रगति यात्रा के दौरान वीरपुर में निबंधन ऑफिस खोले जाने की घोषणा की थी। ठीक 16 दिन बाद 6 फरवरी को कैबिनेट ने इसकि स्वीकृति दी और बुधवार को इसका विधिवत उदघाटन भी हो गया। उदघाटन के दिन जमीन की रजिस्ट्री कराने वाले हृदयनगर निवासी निशा आचार्य एवं बसंतपुर निवासी खुर्शीद आलम को मंत्री के हाथों दस्तावेज दिलवाकर रजिस्ट्री की शुरुआत की गई।

कार्यक्रम में मंत्री रत्नेश सादा ने कहा कि नीतीश कुमार की सरकार हर कौम के लोगों की तरक्की के लिए दिन-रात काम कर रही है। वीरपुर को केंद्रीय विद्यालय, हवाई अड्डा और निबंधन कार्यालय की सौगात मिली है। कल तक लोग जमीन की रजिस्ट्री के लिए 42 किलोमीटर दूर गणपतगंज जाते थे। आज से यह झंझट खत्म, अब रजिस्ट्री ऑफिस आपके घर के पास ही आ चुका है।

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के राज में 12 हजार विकास मित्रों की बहाली हुई। अल्पसंख्यक के उत्थान के लिए कई काम किए गए। कब्रिस्तान की घेराबंदी कर सभी झगड़े को खत्म किया गया। सुपौल बिजेंद्र बाबू का जन्मभूमि है। वह जब से बिजली मंत्री बने बिहार में बिजली की समस्या को खत्म कर दिया। मंत्री नीरज कुमार सिंह ने जो काम किया वह सराहनीय है। महराना प्रताप के सहयोगी उस समय भील थे। उनकी रक्षा के लिए 22 हजार में 14 हजार नें अपना सर कटा दिया। जब केंद्रीय विद्यालय के लिए रजिस्ट्री फीस 33 लाख छूट देने की बात आई तो मैंने इसकी अनुमति दी। निबंधन कार्यालय खोलने की अनुमति देने में भी कोई बिलम्ब नहीं किया। मुख्यमंत्री ने दलित, महादलित के विकास के लिए महादलित आयोग की स्थापना की। आज उन्हीं की देन है कि समाज की सबसे नीचे के कतार में खड़ा व्यक्ति आज मुखिया सरपंच, विधायक, मंत्री बन रहा है।

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