नवरात्र में आयोजित की जाती है देवी भागवत कथा - आचार्य
सुपौल। वरीय संवाददाता सदर प्रखंड के कर्णपुर स्थित बाबापीठ में चल रहे सहस्त्र संवाददाता सदर प्रखंड के कर्णपुर स्थित बाबापीठ में चल रहे सहस्त्र चण्ड

सुपौल। वरीय संवाददाता सदर प्रखंड के कर्णपुर स्थित बाबापीठ में चल रहे सहस्त्र चण्डी महायज्ञ के द्वितीय दिवस पर वैदिक मंत्रों की गूंज और आहुति की सुगंध से संपूर्ण वातावरण दिव्यता से भर उठा। यह पुण्य स्थल परमहंस बाबा निश्चलानंद नाथ की तपोभूमि और समाधि स्थल है, जो अपने सिद्ध चमत्कारों और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध हैं।महायज्ञ में फ्रांस से पधारे भारतीय मूल किन आत्मप्रिया विशेष पूजा-अर्चना कर विश्व कल्याण की मंगलकामना की। उन्होंने वेदाचार्यों के सान्निध्य में आहुतियां अर्पित कर सनातन संस्कृति के इस दिव्य आयोजन में भाग लिया। महायज्ञ का संचालन कर रहे गुरुदेव शिवाचार्य पंडित जीवेश्वर मिश्र ने यज्ञ की महत्ता और इसके गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यज्ञ केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि के संतुलन का आधार है।
उन्होंने कहा कि बाबापीठ, कर्णपूर जैसे सिद्ध स्थानों पर यज्ञ करने से इसकी ऊर्जा कई गुना बढ़ जाती है और इसका प्रभाव पूरे ब्रह्मांड में व्याप्त होता है। परमहंस बाबा की तपस्या और साधना से इस भूमि में विशेष दिव्यता है, जिसके कारण यहाँ किया गया यज्ञ शीघ्र फलदायक होता है।उन्होंने कहा कि सहस्त्र चण्डी महायज्ञ दैवीय शक्तियों को प्रसन्न करने और नकारात्मक शक्तियों को समाप्त करने का श्रेष्ठ उपाय है।
देवी भागवत कथा का आयोजन करते हुए पूज्य व्यास शुकदेवानंद जी महाराज ने आदिशक्ति की महिमा का अद्भुत वर्णन किया। उन्होंने प्रवचन में कहा कि जब-जब देवताओं पर संकट आया, तब-तब वे मां भगवती की शरण में गए और उन्हीं की कृपा से संकटों का निवारण हुआ। उन्होंने आगे कहा कि इस संपूर्ण सृष्टि में शक्ति ही सर्वोपरी है, इसके अतिरिक्त अन्य कुछ भी नहीं। जब देवताओं को भी परम शक्ति की शरण में जाना आवश्यक हो जाता है, तो मनुष्यों के लिए भी यही मार्ग प्रशस्त है। प्रत्येक व्यक्ति को मां भगवती की आराधना कर उनके चरणों में समर्पित होना चाहिए, क्योंकि वही जगतजननी, संकटमोचक और कल्याणकारी हैं। इस अवसर पर उपस्थित पंडित श्रीधर झा, पंडित गोविंद मिश्र, पंडित मणिरमण, पंडित चन्दन झा, पंडित मनोज झा , पंडित कुंदन राय पंडित आशीष झा ,एवं कर्णपूर ,मलहनी, सुखपुर, के श्रद्धालु ने कहा कि बाबापीठ, कर्णपूर की पावन भूमि पर यह अनुष्ठान एक दिव्य अनुभव प्रदान कर रहा है। भक्तों का मानना है कि इस महायज्ञ में सम्मिलित होकर उन्होंने एक अलौकिक ऊर्जा और आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया।
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