जिले के सरकारी अस्पतालों में छह दिन बाद ओपीडी सेवा बहाल
सीतामढ़ी के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की तीन दिवसीय हड़ताल के बाद ओपीडी सेवाएं फिर से शुरू हुईं। मरीजों की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे इलाज में कठिनाई हो रही है। सदर अस्पताल में चिकित्सकों की कमी से...

सीतामढ़ी। जिले के सरकारीअस्पतालों में चिकत्सिकों की तीन दिवसीय हड़ताल के बाद मंगलवार को छह दिनों के अंतराल के बाद ओपीडी सेवाएं फिर से शुरू हो गईं। हालांकि, लंबे समय बाद ओपीडी का संचालन होने से सभी विभागों में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। विशेषज्ञ चिकत्सिकों के हड़ताल में शामिल होने के कारण जिले में लगभग आठ हजार से अधिक मरीजों का इलाज प्रभावित हुआ है, और अब ओपीडी की शुरुआत से इन मरीजों को इलाज मिलने की उम्मीद जग गयी है। जिससे दिनभर हर विभागों में मरीजों की भीड़ उमड़ी रही। चिकत्सिकों की कमी से जूझ रहा अस्पताल: जिले के सदर अस्पताल में चिकत्सिकों की गंभीर कमी का सामना किया जा रहा है। सदर अस्पताल में 75 चिकत्सिकों के पदों के विरुद्ध मात्र 25 चिकत्सिक कार्यरत हैं। इससे अस्पताल प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि एक ओर जहां मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर चिकत्सिकों की कमी से उचित इलाज मुहैया कराना चुनौतीपूर्ण हो गया है। सदर अस्पताल में चिकत्सिकों की कमी का एक कारण विधानसभा प्रश्न और विभागीय आदेश के तहत पांच चिकत्सिकों की प्रतिनियुक्ति का टूटना भी है।
इसके अलावा, अन्य वरष्ठि चिकत्सिकों की प्रतिनियुक्ति भी अब तक वापस नहीं हो पाई है, जिससे अस्पताल में समस्या और गंभीर हो गई है।
ओपीडी और इमरजेंसी में उमड़ी भीड़: मंगलवार कोओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं फिर से शुरू होने के बाद दोपहर तक 900 से अधिक मरीजों का इलाज किया जा चुका था। वहीं शाम तक हजार से अधिक मरीज देखे जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, अस्पताल में अभी भी बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन प्रतीक्षालय में बैठकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। कई मरीजों का कहना है कि चिकत्सिकों की कमी के कारण अस्पताल में इलाज कराना मुश्किल हो गया है।
पीपी मोड पर संचालित जांच घर बंद होने से बढ़ी परेशानी:
सदर अस्पताल में पीपी मोड पर संचालित एक जांच केन्द्र में कंपनी के द्वारा बिना सूचना के सभी कर्मचारियों को काम से हटा दिया गया,जिससे सैकड़ों मरीजों का की जांच प्रभावित हुई। अस्पताल में अव्यवस्था का माहौल बन गया और मरीजों को जांच में कठिनाई का सामना करना पड़ा। बताया जा रहा है कंपनी के एचआर द्वारा मंगलवार आकर सीधे सभी कर्मियों से रेजग्निेशन लिए जाने से पीपी मोड पर संचालित जांच घर बंद हो गया। उपाधीक्ष डॉ.सुधा झा ने बताया विभागीय आदेश के कारण अस्पताल में प्रतिनियुक्त लैब टेक्नीशियन को विरमित कर दिया गया है। अब जांच घर में मात्र चार एवं ब्लड बैंक में दो लैब टेक्नीशियन बचे हैं। जिससे ब्लड बैंक भी बंद होने के कगार पर है। वहीं अस्पताल आने वाले मरीजों का जांच कराना भी मुश्किल हो रहा है।
सिविल सर्जन की प्रतक्रियिा:
इस संदर्भ में सिविल सर्जन डॉ. अखिलेश कुमार ने कहा, चिकत्सिकों की हड़ताल के कारण पिछले 5-6 दिनों से ओपीडी बंद थी। मंगलवार कोओपीडी की शुरुआत हुई तो मरीजों की भारी भीड़ उमड़ी। मैंने खुद अस्पताल जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और सुनश्चिति किया कि इलाज में किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो। सदर अस्पताल में चिकत्सिकों की कमी को दूर करने के लिए हम जिला पदाधिकारी से मिलकर विभाग को चिकत्सिकों एवं कर्मियों की प्रतिनियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजने का प्रयास करेंगे, ताकि अस्पताल में चिकत्सिकों एवं कर्मियों की कमी का समाधान हो सके।
समस्या का समाधान?
सिविल सर्जन ने चिकत्सिकों की कमी की समस्या को शीघ्र सुलझाने का आश्वासन दिया है, लेकिन इस स्थिति में सुधार होने में समय लग सकता है। इस बीच,अस्पताल प्रशासन को यह सुनश्चिति करना होगा कि ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं नर्बिाध रूप से चलें, ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके। चिकत्सिकों की कमी और अन्य समस्याओं के बावजूद, अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को इस दिशा में तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
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