जीवों को भवसागर पार करने के लिए गुरु कृपा जरुरी: आचार्य मनीष
अकोढ़ीगोला, एक संवाददाता। जो भगवान से मिला दे, वहीं गुरु है। शास्त्रों में आचार्य को भगवान के स्वरुप बताया गया है। जोरावरपुर हनुमान मंदिर प्रांगण में चल रहे
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अकोढ़ीगोला, एक संवाददाता। हम जीवों को भवसागर से पार करने के लिए गुरु कृपा जरूरी है। भागवत कथा में व्यास जी महाराज लिखते हैं कि परमात्मा की विशेष कृपा होती है, तब मनुष्य का शरीर मिलता है। मनुष्य को भवसागर से पार करने के लिए गुरु नौका के समान होता है। हम ब्रह्मा, शिव आदि हो सकते हैं। लेकिन भवसागर से पार नहीं हो सकते हैं। बिना गुरु के ज्ञान नहीं हो सकता है। जो भगवान से मिला दे, वहीं गुरु है। शास्त्रों में आचार्य को भगवान के स्वरुप बताया गया है। जोरावरपुर हनुमान मंदिर प्रांगण में चल रहे श्रीश्री शतचण्डी महायज्ञ के दौरान शुक्रवार को भागवत कथावाचक आचार्य मनीष जी महाराज ने कही।
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