Marwari Community Celebrates Ganagaur Festival with Rituals and Traditions मारवाड़ी महिलाओं ने हर्षोल्लास के साथ मनाया गया गणगौर पर्व, Saharsa Hindi News - Hindustan
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मारवाड़ी महिलाओं ने हर्षोल्लास के साथ मनाया गया गणगौर पर्व

सहरसा में मारवाड़ी समाज की कुंवारी कन्याओं और नवविवाहिताओं ने गणगौर पर्व धूमधाम से मनाया। सभी सुहागिन महिलाओं ने पूजा की और 16 कुओं से पानी लाकर गणगौर को पिलाया। मूर्तियों का विसर्जन पोखर में किया...

Newswrap हिन्दुस्तान, सहरसाWed, 2 April 2025 04:30 AM
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मारवाड़ी महिलाओं ने हर्षोल्लास के साथ मनाया गया गणगौर पर्व

सहरसा, नगर संवाददाता। मारवाड़ी समाज की कुंवारी कन्याओं और नवविवाहिताओं ने मंगलवार को धूमधाम व रीतिरिवाज के साथ गणगौर पर्व को मनाया। नववाहिता सहित सभी उम्र की सुहागिन महिलाओं ने गणगौर की पूजा किया। लड़कियों ने 16 कुओं से पानी लेकर गणगौर को पिलाया। दोपहर बाद बनाई गई मूर्तियों को पोखर में विसर्जित किया गया। यह पर्व फाल्गुन पूर्णिमा से 17 दिनों तक चलती है। गोबर के बरकुआ बनाकर होलिका दहन कर उसके राख से 8 पिंडियां बनाती है। जिसकी चैत के पहले दिन कुंवारी कन्या और नवविवाहित महिलाएं गणगौर की पूजा करती है। कुंवारी कन्या अच्छे पति और नवविवाहिता अपने पति की लंबी आयु के लिए पूजा करती है। आठ दिन बाद मारवाड़ी समाज के सभी महिला, पुरूष और बच्चे माता शीतला को जल चढ़ाकर पूजा करते हैं। प्रसाद के रूप में माता को ठंडे बाजरा की रोटी, राबड़ी, गुड़ से बने मीठा भात चढ़ाते हैं। वासेरा पर्व के दिन लड़कियां कुम्हार के घर से मिट्टी लेकर पांच मूर्ति इसर, गोरा, रोवां, मालन और कनीराम बनाकर पूजती हैं। जिनमें इसर को भगवान शिव, गोरा को पार्वती, रोवां को इसर की बहन, मालन को माली और कनीराम को इसर के भाई के रूप में पूजते हैं। पूजा में भाई का भी विशेष महत्व होता है। रक्षाबंधन की ही तरह बहन भाई को तिलक लगाती है और भाई सामर्थ्य अनुसार बहन को भेंट देता है। जिसे गौर बिंधौरा कहा जाता है। मूर्तियां बनाने के बाद लड़कियां दोपहर में गणगौर को पानी पिलाती है और रात में पूजा के गीत गाती है। चैत शुक्ल तीज को लड़कियां, महिलाएं और बच्चे सूर्यास्त से पहले पोखर में मूर्तियां को विसर्जित करती है। अंतिम दिन नवविवाहिता के पति ससुराल आते हैं और उसे विदाकर अपने घर ले जाते हैं।होली के दूसरे दिन से शुरू पर्व का समापन चैत्र शुक्ल तृतीया को होता है।जहां पूजा की जाती है उस स्थान को गणगौर का पीहर और जहां विसर्जन किया जाता है वह स्थान ससुराल माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार मां पार्वती ने भी अखण्ड सौभाग्य की कामना से कठोर तपस्या की थी। जिसके प्रताप से भगवान शिव को पाया। इसी दिन भगवान शिव ने माता पार्वती को और मां पार्वती ने स्त्री जाति को सौभाग्य का वरदान दिया था। तभी से इस व्रत की शुरुआत हुई। नम्रता यादुका,सुमन अग्रवाल,गीता गोयल,सुनीता यादुका अंजली यादुका,रेखा तुलस्यान,प्रीती तुलस्यान,बबीता तुलस्यान आदि ने गणगौर पर्व की जानकारी दिया।

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