मौसम बदलते ही शहर में मच्छरों का आतंक, फॉगिंग का असर नहीं
पूर्णिया में पिछले एक सप्ताह से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जबकि गांवों में थोड़ी राहत है। नगर निगम के योजनाओं का कोई प्रभाव नहीं दिख रहा है, जिससे लोगों में नाराजगी है। फॉगिंग का काम केवल दिखावे के...
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पूर्णिया। शहर में पिछले एक सप्ताह से मच्छरों का प्रकोप तेज हो गया है जबकि ग्रामीण इलाके में अभी भी थोड़ी सी राहत है। ऐसा इसलिए कि पिछले एक सप्ताह से ठंड में कमी हो गई है और गर्मी का असर शुरू हो गया। मालूम हो कि शहर में कुल 46 वार्ड है जिसमें घनी आबादी रहती है। घनी आबादी के बीच मच्छरों का इतना प्रकोप है कि शाम होते ही लोग छटपटाने लगते हैं। नगर निगम की ओर से मच्छर भगाने के लिए बड़ी-बड़ी योजनाएं बनती है लेकिन उसको अमली जामा पहनाने के लिए कोई खास व्यवस्था नहीं होती। गांव में थोड़ी राहत: फरवरी महीने में ही आपेक्षिक रूप से गर्मी हो जाने के कारण मच्छरों का प्रकोप हर जगह बढ़ा है लेकिन कौन है इसका असर अभी काम दिख रहा है। नगर निगम की जो व्यवस्था है उस पर लोग विफरे हुए हैं और कहते हैं कि शहर से तो अच्छा गांव ही है। मच्छरों के बढ़ने के कारण में सबसे अधिक और बड़ा कारण कचरा का निस्तारण नहीं होना बताया जा रहा है और इसके साथ ही जितने भी छोटे बड़े नाले हैं वहां पर भी एंटी लारवा नहीं चलाया जा रहा है। एंटी लारवा के छिड़काव के लिए यह माकूल समय है। लोगों को इस बात की परेशानी है कि आखिर जब नगर निगम इतनी बड़ी रकम होल्डिंग टैक्स के रूप में वसूलते हैं तो पैसे खर्च कहां करती है? अगर मच्छरों से निजात दिलाने के लिए काम किया जा रहे हैं तो जमीन पर कुछ दिखता क्यों नहीं है?
फॉगिंग का सिर्फ दिखावा: जानकार बताते हैं कि नगर निगम शाम में मच्छरों को भगाने के लिए फागिंग का काम करती है, जो सिर्फ मार्केट के गलीकूची में फागिंग वाहन दौड़ा कर कोरम पूरा कर लेता है और मार्केट में ही लोगों के सामने क्रेडिट बनने लगता है। शहर के चारों तरफ जो वार्ड नए हैं। वहां तो कभी फागिंग वाहन जाती ही नहीं है।
कोट: सभी वार्डों में फॉगिंग के लिए रोस्टर बना दिया गया है और रोस्टर के अनुसार काम चल रहा है। अगर कोई कह रहा है कि फागिंग नहीं होती है तो यह बात निराधार है।-पवन कुमार पवन, सिटी मैनेजर पूर्णिया।
धूप रही तल्ख और हवा तेज: पूर्णिया। सोमवार की सुबह से ही सूरज के तेवर तल्ख रहे और पश्चिमी विक्षोभ का असर सुबह से ही देखा गया। हालांकि जिस तरह का असर होना था उस तरह का असर नहीं दिखा है लेकिन ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि मंगलवार से अगले तीन दिनों तक तेज हवा चलती रहेगी। इस बीच सूरज की किरण तीखी होती चली जाएगी। गेहूं की फसल परिपक्व होने के पहले ही जलकर कटने लायक हो जाएगी। बताया जा रहा है कि मौसम के अचानक बदलाव के कारण मौसमी बीमारी भी शुरू हो गई है जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है और अस्पतालों में भीड़ लगनी शुरू हो गई है। जानकार बताते हैं कि ऐसे मौसम में यदि समय पर सिंचाई नहीं की तो मक्का की फसल भी प्रभावित हो सकती है।
अधिकतम पारा 28 डिग्री: मंगलवार को अधिकतम तापमान 28.4 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 14.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। जानकारी के अनुसार अगले एक सप्ताह तक इसी तरह के तापमान बने रहेंगे और यदि पछिया हवा कम हुई तो तापमान का पारा ऊपर जाएगा।
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