मोबाइल बढ़ा रहा ऑटिज्म की बीमारी
मुजफ्फरपुर में ऑटिज्म से ग्रसित बच्चों की संख्या में वृद्धि हो रही है। डॉक्टरों के अनुसार, मोबाइल की लत इस बीमारी को बढ़ा रही है। बच्चों में संवाद कौशल की कमी और हकलाने की समस्या भी देखने को मिल रही...

मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। ऑटिज्म के शिकार बच्चों की बीमारी मोबाइल बढ़ा रही है। एसकेएमसीएच की शिशु रोग की ओपीडी में एक दिन के अंतराल पर ऑटिज्म से ग्रसित बच्चे पहुंच रहे हैं। शिशु रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जेपी मंडल ने बताया कि ऑटिज्म से ग्रसित बच्चों की संख्या में वृद्धि हुई है। ओपीडी में ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं।
डॉ. मंडल ने बताया कि ऑटिज्म से ग्रसित बच्चों में मोबाइल की लत बीमारी बढ़ा रही है। जिन बच्चों को यह बीमारी पहले से है, उन्हें मोबाइल हाथ में देने से उनका एकाकीपन बढ़ जा रहा है। ऑटिज्म से ग्रसित बच्चों को मोबाइल नहीं दिया जाना चाहिए। माता-पिता अगर बच्चे के साथ ज्यादा समय बिताएं तो बच्चे इस बीमारी से बच सकते हैं।
स्पीच थिरैपिस्ट डॉ. श्री प्रकाश ने बताया कि ऑटिज्म के शिकार बच्चों में हकलाने की भी समस्या हो रही है। उन्होंने बताया कि उनके पास तीन से 10 साल तक के बच्चे ऑटिज्म के शिकार होकर पहुंच रहे हैं। हकलाहट के अलावा बच्चों में संवाद कौशल में भी कमी देखी जा रही है। डॉ. श्री प्रकाश ने बताया कि वह हर महीने 10 से 15 मरीज इस तरह के देखते हैं। मोबाइल के कारण बच्चों मे ऑटिज्म की शिकायत बढ़ी है। मोबाइल के कारण बच्चों और माता-पिता में बात नहीं हो रही है। इसका बच्चों पर असर पड़ रहा है। डॉक्टरों ने बताया कि ऑटिज्म एक दिमागी बीमारी है। इसमें मरीज न तो अपनी बात ठीक से कह पाता है न ही दूसरों की बात समझ पाता है और न ही उनसे संवाद स्थापित कर सकता है। इस डेवलपमेंटल डिसेबिलिटी के लक्षण बचपन से ही नजर आ जाते हैं। इस कारण ऑटिज्म के शिकार बच्चों में हकलाहट की समस्या हो रही है। उनकी बोली बिगड़ रही है। शुरुआत में अभिभावक इस बीमारी पर ध्यान नहीं देते हैं। इसलिए आगे चलकर समस्या बढ़ जाती है। डॉ जेपी मंडल ने बताया कि बच्चों में लक्षण नजर आने के बाद सबसे पहले पीडियाट्रिक जांच जरूरी होती है।
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