वक्फ संशोधन विधेयक पारित होना मुस्लिम समाज के अधिकारों पर सीधा हमला
या दी है। धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने इसे वक्फ संपत्तियों और मुस्लिम समाज के अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया है। गजनफर अली खान ने कहा कि यह बिल

वक्फ संशोधन विधेयक पारित होना मुस्लिम समाज के अधिकारों पर सीधा हमला हवेली खड़गपुर, एक संवाददाता।
संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पारित होने के बाद मुस्लिम समाज से जुड़े लोगों ने नाराजगी जताते हुए प्रतिक्रिया दी है। धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने इसे वक्फ संपत्तियों और मुस्लिम समाज के अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया है।
गजनफर अली खान ने कहा कि यह बिल वक्फ संपत्तियों के अधिकारों को सीमित करता है और समुदाय के हितों के खिलाफ है। यह बिल मुस्लिम समाज के लिए किसी भी दृष्टिकोण से हितकर नहीं है। अप्रत्यक्ष रूप से यह बिल धर्म पर प्रहार है। यह धार्मिक स्थलों की संपत्तियों को प्रभावित कर सकता है, जिससे समुदाय के विकास कार्यों पर असर पड़ेगा।
शेख टोला स्थित मक्का जामा मस्जिद के मौज्जिम सरफराज ने कहा कि यह कानून वक्फ संपत्तियों की हिफाजत के बजाय उन्हें कमजोर करने का प्रयास है। इससे मस्जिदों, दरगाहों, कब्रिस्तानों और मदरसों की जमीनों को खतरा पैदा हो जाएगा। उन्होंने सरकार से इस कानून को वापस लेने की मांग की और कहा कि यह फैसला मुस्लिम समाज के हितों के खिलाफ है।
वक्फ बिल आजाद भारत में असंवैधानिक अशांति और मूल अधिकारों के हनन जैसा है। मुझे नहीं लगता कि वक्फ संशोधन की कोई आवश्यकता है।
जिसे जबरन पारित किया जाना देश की एकता और अखंडता के लिए सही नहीं है। यह एक ऐसा ज़ख्म है जिसका कोई मरहम नहीं
रखशां हाशमी, मुंगेर
शिक्षिका सह कवियित्री
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