अलविदा रमजान, ईद की खुशी लेकर फिर आना...
मुंगेर में अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से ईद के उपलक्ष्य में कवयित्री गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न कवयित्रियों ने ईद और मानवता के मुद्दों पर अपने रचनाएँ प्रस्तुत कीं। अध्यक्ष...

मुंगेर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। अखिल भारतीय साहित्य परिषद जिला शाखा मुंगेर की ओर से ईद के उपलक्ष्य में कवयित्री गोष्ठी आयोजित की गयी। तोपखाना बाजार स्थित डॉ जाकिर हुसैन के आवास पर आयोजित कार्यक्रम में संस्था के अध्यक्ष मधुसूदन आत्मीय ने ईद की मुबारकबाद देते हुए शेर सुनाया खुदा की मौजूदगी का एहसास हर बार रमजान कराता है, नासमझ इंसान मगर हवन बनता जाता है। श्रीमती मारिया ने दुआ करूं ईद पर खुद पास आ जाए नज्म सुनाया। आस्मा ने ए खुदा जमीन पर तेरी जंग होगी कब तक, इंसान का खून इंसान पीएगा कब तक सुनाकर इंसानी जिंदगी के सबसे बड़े सवाल को उठाया। सबा सिद्दीकी ने ईद का दिन है दिल की बातें कर लो आज। जारा ने सुनाया रब को याद करूं, हर दिन फरियाद करूं। लाडली ने एक गीत मुझे मिल गया बहाना तेरे दीद का प्रस्तुत किया। दरख़्शा ने अल्लाह से सवालिया लहजे में पूछा- ज़मी पर तेरी खुद जंग होगी कब तक, मारूफा सिद्दीकी ने परवरदिगार आलम तेरा ही है सहारा सुनाया। रफत फातिमा ने गीत गाया अलविदा रमजान ईद की खुशी लेकर फिर आना, भूले भटके इंसानों को सही राह दिखाना। परिषद के महासचिव प्रमोद निराला ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
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